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महेंद्रनाथ में पहली सोमवारी पर प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त:10 घंटे तक जाम में फंसे श्रद्धालु, SP संभालते रहे मोर्चा, DM नहीं पहुंचे




सावन की पहली सोमवारी पर जिले के प्रसिद्ध बाबा महेंद्रनाथ धाम में जिला प्रशासन द्वारा किए गए चाक-चौबंद व्यवस्था के दावे धरातल पर कमजोर साबित होते नजर आए। मंदिर परिसर और आसपास की व्यवस्था पहले ही दिन लड़खड़ा गई, जिससे हजारों शिवभक्तों को घंटों तक भीषण जाम और अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। सुबह छह बजे से ही मंदिर के चारों ओर, मुख्य सड़क पर रसूलपुर से लेकर चैनपुर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई श्रद्धालु आठ से दस घंटे तक जाम में फंसे रहे और देर शाम तक सड़क पर रेंगते हुए आगे बढ़ते दिखाई दिए। दबाव बढ़ा और दोनों ओर लंबा जाम लग गया
स्थानीय लोगों के अनुसार जाम की सबसे बड़ी वजह रविवार रात ड्रॉप गेट का प्रभावी संचालन नहीं होना रहा। रात में दोपहिया और चारपहिया वाहन मंदिर के काफी नजदीक तक पहुंच गए और लोगों ने सड़क किनारे ही वाहन खड़े कर जलाभिषेक के लिए प्रवेश कर लिया। सड़क संकरी होने के कारण सुबह लौटने वाले वाहनों का दबाव बढ़ा और दोनों ओर लंबा जाम लग गया। प्रशासन द्वारा मंदिर से करीब 200 मीटर की परिधि में बनाई गई निजी पार्किंग व्यवस्था भी राहत देने के बजाय वाहनों की भीड़ बढ़ाने का कारण बनी। बच्चे कई जगह फिसलकर गिरते नजर आए
रविवार रात विभिन्न क्षेत्रों से डीजे लगी बड़ी गाड़ियों का महेंद्रनाथ धाम पहुंचना और फिर एक साथ लौटना भी जाम को और गंभीर बना गया। जबकि प्रशासन की ओर से डीजे पर प्रतिबंध की बात कही जाती रही है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में डीजे वाहन सड़क पर चलते दिखाई दिए। सुबह हुई हल्की बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए। मंदिर जाने वाली एप्रोच सड़कें और मुख्य मार्ग कीचड़ से भर गए। कीचड़ के कारण पैदल चलना मुश्किल हो गया और महिला, पुरुष व बच्चे कई जगह फिसलकर गिरते नजर आए। श्रद्धालुओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। 27 स्थानों पर मजिस्ट्रेट प्रतिनियुक्ति का दावा था
सबसे हैरानी की बात यह रही कि जिला प्रशासन ने 27 स्थानों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति का दावा किया था, लेकिन अधिकांश स्थानों पर मजिस्ट्रेट नजर नहीं आए। कहीं-कहीं पुलिसकर्मी तैनात दिखे, पर समन्वित व्यवस्था का अभाव साफ दिखाई दिया। हालात बिगड़ने की सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा स्वयं मुख्य सड़क पर पहुंचे और यातायात व्यवस्था संभालते हुए जाम को नियंत्रित करने का प्रयास किया। उनके मौके पर सक्रिय होने के बाद धीरे-धीरे रुके हुए वाहन आगे बढ़ने लगे और स्थिति में कुछ सुधार हुआ। वहीं पूरे घटनाक्रम के दौरान जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय मौके पर नजर नहीं आए, जिसे लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में चर्चा बनी रही। पहली सोमवारी की यह अव्यवस्था प्रशासनिक तैयारियों की पूरी तरह पोल खोलता नजर आया।



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