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हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले स्थित माता चिंतपूर्णी धाम में सप्तमी और अष्टमी की मध्यरात्रि को ज्योति स्वरूप में देवियों के पहुंचने की परंपरा एक बार फिर देखने को मिली। श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे। परिसर में चारों ओर जयकारों की गूंज सुनाई दी। हाथों में जलती ज्योतियां लेकर श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए कतारों में खड़े रहे। इससे पूरा चिंतपूर्णी धाम भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया। मान्यता है कि नवरात्र के इन विशेष दिनों में विभिन्न देवी शक्तियां ज्योति स्वरूप में मां चिंतपूर्णी के दरबार में हाजिरी लगाने आती हैं। रात बढ़ने के साथ मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। दूर-दराज से पहुंचे भक्त घंटों कतारों में खड़े होकर दर्शन का इंतजार करते रहे। मध्यरात्रि के करीब श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। परंपरा का प्रमाणिक लिखित दस्तावेज उपलब्ध नहीं चिंतपूर्णी धाम में नवरात्र के दौरान ज्योति स्वरूप में देवियों के आने की यह मान्यता सदियों से चली आ रही है। हालांकि, इस परंपरा की सटीक ऐतिहासिक शुरुआत का कोई प्रमाणिक लिखित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा में सप्तमी-अष्टमी की मध्यरात्रि को विशेष माना जाता है। आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की आराधना धार्मिक दृष्टि से भी अष्टमी का विशेष महत्व है। नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की आराधना की जाती है। चिंतपूर्णी में नवरात्र के दौरान प्रत्येक रात्रि जागरण की परंपरा भी है, जिससे इन दिनों श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी होती है। शक्तिपीठ की मान्यता से जुड़ा है चिंतपूर्णी धाम माता चिंतपूर्णी को शक्तिपीठों में प्रमुख स्थान प्राप्त है। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता सती के शरीर के अंग जहां-जहां गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए। चिंतपूर्णी को लेकर मान्यता है कि यहां माता सती के चरण गिरे थे। इसी कारण यह स्थान सदियों से शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। नवरात्र के दौरान इस धाम की धार्मिक आभा और भी बढ़ जाती है। देवी शक्ति की उपस्थिति का प्रतीक सप्तमी और अष्टमी की रात को ज्योति स्वरूप में देवियों के आगमन की मान्यता श्रद्धालुओं के विश्वास को और गहरा करती है। भक्तों का कहना है कि मां के दरबार में जलती ज्योति केवल प्रकाश नहीं, बल्कि देवी शक्ति की उपस्थिति का प्रतीक है। कोई माथा टेकने पहुंचा तो कोई मनोकामना लेकर अष्टमी की मध्यरात्रि उमड़ा भक्तों का सैलाब इसी अटूट आस्था की तस्वीर रहा। कोई माता के दरबार में माथा टेकने पहुंचा तो कोई मनोकामना लेकर। घंटों की प्रतीक्षा के बावजूद श्रद्धालुओं के चेहरे पर थकान से अधिक उत्साह दिखाई दिया। मां के जयकारों के बीच चिंतपूर्णी धाम में देर रात तक भक्ति का रंग चढ़ा रहा।
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मां चिंतपूर्णी के दरबार पहुंचीं देवियां:अष्टमी की मध्यरात्रि उमड़ा लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब, जयकारों से गूंजा धाम
