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दक्षिण कोरिया के एम्ब. डॉ. योसेफ कांग की कृति ‘हानेउल माएउम’ में संत सौरभ के जीवन-दर्शन, मानवीय मूल्यों, शांति, करुणा, सेवा तथा वैश्विक सद्भाव को अंतरराष्ट्रीय साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक विश्व रिकॉर्ड साहित्यिक पहल के अंतर्गत लगातार 18वें दिन 18वीं पुस्तक के रूप में जारी की गई है। कोरियाई शीर्षक ‘हानेउल माएउम’ का अंग्रेजी उपशीर्षक ‘Sant Saurabh and the Heart of Universal Harmony’ है। रचना में भारतीय संत परंपरा और कोरियाई सांस्कृतिक संवेदना के बीच मानवीय संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया है। लेखक ने संत सौरभ की विचारधारा को करुणा, पारस्परिक सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, सांस्कृतिक समझ तथा विश्वबंधुत्व के संदर्भ में अभिव्यक्त किया है। कृति का केंद्रीय संदेश ‘एक मानवता, एक परिवार’ है। इसमें अलग-अलग राष्ट्रों, भाषाओं और परंपराओं के बावजूद मनुष्यों को संवेदना, सहयोग और सद्भाव के साझा सूत्र से जोड़ने की भावना प्रस्तुत की गई है। पुस्तक के आवरण पर भारत एवं दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय ध्वज, चेरी ब्लॉसम, पारंपरिक कोरियाई स्थापत्य, सियोल का नगर-दृश्य, पर्वतीय प्राकृतिक परिवेश तथा संत सौरभ का चित्र दिखाई देता है। यह दृश्य संयोजन दोनों देशों की सांस्कृतिक पहचान और साहित्यिक संवाद को दर्शाता है। पुस्तक का प्रकाशन गीता ज्ञान इंटरनेशनल पब्लिकेशन एवं दिव्य प्रेरक कहानियां ई-प्रकाशन केंद्र, भारत द्वारा किया गया है। यह प्रकाशन भारत और दक्षिण कोरिया के बीच साहित्य, संस्कृति तथा मानवीय मूल्यों पर आधारित संवाद को रचनात्मक मंच प्रदान करता है।
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योसेफ कांग की बुक ‘हानेउल माएउम' का लोकार्पण:संत सौरभ के जीवन-दर्शन और वैश्विक सद्भाव का है संगम
