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सरकार ने जेपीएससी और जेएसएससी की 22 परीक्षाएं रद्द कर दी हैं, सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को पैसे लेकर मनचाहे इंटरव्यू बोर्ड में भेजा जाता था सरकारी नौकरी पाने का सामान्य नियम है-पढ़ाई, परीक्षा, मेरिट और चयन। लेकिन झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) भर्ती परीक्षा में इस पूरे ढर्रे को उल्टा घुमा कर रख दिया गया था। यह परीक्षा अभ्यर्थियों की काबिलियत पर नहीं, बल्कि बिचौलियों के नेटवर्क, फिक्स रेट कार्ड और इंटरव्यू बोर्ड की मनचाही सेटिंग के आधार पर चलाई जा रही थी। गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकार ने इस नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। सीआईडी की पूछताछ में परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के खुलासे ने पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जांच में सामने आया है कि लिखित परीक्षा में पास कराने का रेट 10 लाख रुपए तय था। वहीं इंटरव्यू के लिए 15 लाख रुपए में सौदा हुआ था। अभ्यर्थियों को रैंडम आधार पर इंटरव्यू बोर्ड मिलता है। लेकिन इस परीक्षा में रोल नंबर के आधार पर गुप्त कोड तैयार किए जाते थे। सेटिंग वाले अभ्यर्थियों के कोड और रोल नंबर संबंधित लोगों तक पहुंचा दिए जाते थे। बड़ा सवाल यह है कि इंटरव्यू के अगर बोर्ड आवंटन रैंडम था तो किसी खास अभ्यर्थी का कोड पहले से किसी को कैसे पता चल जाता था। मनचाहे इंटरव्यू बोर्ड के लिए अभ्यर्थी काजल से लिए थे 10 लाख
सीआईडी की जांच में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। इस जांच से जुड़े विवरण में काजल नाम की एक अभ्यर्थी का भी उल्लेख है। दावा किया गया है कि उसका इंटरव्यू आयोग की पूर्व सदस्य के बोर्ड में कराने के लिए उनके पीए तक 10 लाख रुपए पहुंचाए गए थे। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन जांच एजेंसी उसके लेनदेन का बैंक रिकॉर्ड, कॉल रिकॉर्ड, चैट या अन्य डिजिटल साक्ष्य की तलाश की जा रही है। ऐसा सिर्फ एक अभ्यर्थी के साथ नहीं हुआ है। बल्कि इसकी लंबी सूची है, जिन्हें पैसे लेकर मनचाहा इंटरव्यू बोर्ड दिया गया था। सेकेंड टॉपर सॉल्वर गैंग का आरोपी, छिपाई जानकारी
धांधली की परतें यहीं नहीं रुकीं। 10 जनवरी 2026 को जारी अंतिम परिणाम में मेरिट सूची में रैंक-2 हासिल करने वाले प्रमोद कुमार पाठक का नाम उत्तर प्रदेश के चर्चित सिपाही भर्ती परीक्षा के ‘सॉल्वर गैंग’ से जुड़ा निकला। प्रमोद इस मामले में एसआईटी जांच के बाद जेल भी जा चुका है और केस अभी लंबित है। इसके बावजूद उसने सीडीपीओ भर्ती के दौरान अपना आपराधिक इतिहास छिपाया। प्रमोद का कहना है कि नियुक्ति के समय उससे इस संबंध में पूछा ही नहीं गया था। एक ही परीक्षा के लिए तीन बार बदली आंसर-की
सीडीपीओ प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर-कुंजी को लेकर भी प्रक्रिया सवालों के घेरे में रही। जेपीएससी ने 27 जून 2024 को मॉडल उत्तर-कुंजी जारी की। इसके बाद 3 जुलाई को संशोधित मॉडल उत्तर-कुंजी और इसके बाद फिर 8 जुलाई को दोबारा संशोधित व सुधारित उत्तर-कुंजी जारी करनी पड़ी। यानी एक ही परीक्षा के उत्तरों को आयोग को लगातार दो बार संशोधित करना पड़ा। इससे अभ्यर्थियों के बीच सही उत्तर और मूल्यांकन की शुद्धता को लेकर सवाल उठे। आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड में तीनों चरण दर्ज हैं। अंतिम रिजल्ट के बाद भी अभ्यर्थियों को कॉपी देखने का मौका… सीडीपीओ का अंतिम परिणाम 10 जनवरी 2026 को जारी हुआ। इसके अगले ही दिन आयोग ने कटऑफ अंक जारी किए और 14 जनवरी को अभ्यर्थियों को अपनी उत्तरपुस्तिका देखने के लिए आवेदन का अवसर दिया। 21 जनवरी को इस संबंध में फिर प्रेस विज्ञप्ति जारी हुई। यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अभ्यर्थी अपने प्राप्त अंकों और उत्तरपुस्तिका का मिलान कर सकें, लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड में इससे किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के अंक बदलने या मूल्यांकन में गड़बड़ी सिद्ध होने की बात नहीं है। सीडीपीओ भर्ती: विज्ञापन से परीक्षा रद्द होने तक
8 जून 2023: जेपीएससी ने विज्ञापन संख्या 21/2023 के तहत सीडीपीओ के 64 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया।
29 अप्रैल से 30 मई 2024: भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया चली।
10 जून 2024: प्रारंभिक परीक्षा आयोजित हुई।
16 जुलाई 2024: प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी हुआ।
2, 3 और 4 अगस्त 2025: मुख्य लिखित परीक्षा आयोजित हुई।
8 दिसंबर 2025: मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी हुआ।
20 दिसंबर 2025: इंटरव्यू के लिए ई-कॉल लेटर जारी किया गया।
7, 8 और 9 जनवरी 2026: इंटरव्यू आयोजित हुआ।
18 अगस्त 2026 : नियुक्ति रद्द करने का नोटिफिकेशन जारी।
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रद्द भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार की कहानी:सीडीपीओ: लिखित परीक्षा के लिए 10 लाख, इंटरव्यू के लिए 15 लाख में सौदा
