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जब से मैं अमेरिका से लौटा हूं, बहुत सारे वाकये और किस्से याद आ रहे हैं। कुछ तो मैं भूल भी गया था। ये कोई यादगार नहीं, मगर मजेदार जरूर हैं। इन्हीं में से एक किस्सा सुनाता हूं। आजकल तो सिक्योरिटी की वजह से हर किसी को समय पर एयरपोर्ट पहुंचकर चेक-इन करना पड़ता है, लेकिन 90 के दशक में प्रोडक्शन वाला घर आकर हमारा सामान ले जाता था और चेक-इन करके बोर्डिंग पास लाकर एयरपोर्ट के गेट पर खड़ा रहता था। हम लोग प्लेन उड़ने से ऐन वक्त पहले पहुंचते थे। इससे आदमी थोड़ा लापरवाह हो जाता था। कई बार घरेलू उड़ानों में ऐसा भी हुआ कि टिकट किसी के नाम का था, लेकिन वह नहीं पहुंचा तो उसकी जगह कोई और चला गया। तब अंदर पहचान पत्र वगैरह देखने का इतना चलन नहीं था। यह किस्सा फिल्म बीवी नंबर 1 की शूटिंग का है। हमें अमेरिका के मियामी और फोर्ट लॉडरडेल में शूटिंग करनी थी। दरअसल, सलमान की डेट्स नहीं थीं और वो एक महीने लंदन में शो करके अमेरिका जा रहे थे। वाशु जी ने कहा कि मैं अमेरिका आ जाता हूं, तुम शो के बाद शूटिंग कर लेना। इस पर सलमान ने कहा, ‘आपको पता है कि अमेरिका कितना बड़ा है। मुझे अलग-अलग शहरों में शो करने हैं। आप जिस शहर में क्रू लेकर रुकेंगे, मुझे वहां आना-जाना पड़ेगा। चलिए, आपके लिए इतनी तकलीफ भी उठा लूंगा, मगर एक दिन आने और एक दिन जाने में निकल जाएगा। शूटिंग के लिए आपको सिर्फ चार दिन मिलेंगे और बाकी तीन दिन सब बेकार बैठे रहेंगे। इतने खर्च का क्या फायदा?’ इस पर वाशु जी ने कहा, ‘कोई बात नहीं। हफ्ते में तीन दिन सब घूमेंगे-फिरेंगे, एन्जॉय करेंगे और बाकी चार दिन शूटिंग करेंगे।’ सलमान मान गए। वाशु जी और डेविड साहब पूरी यूनिट लेकर मियामी चले गए। मुझे मुंबई में कुछ काम था, इसलिए मैं दो दिन बाद रवाना हुआ। मुंबई से निकला तो विमान दो घंटे के लिए लंदन में रुका। वहां से शो की पूरी टीम उसी फ्लाइट में बैठ गई। मुरानी ब्रदर्स, सलमान खान, संजय दत्त वगैरह सब साथ थे। हम न्यूयॉर्क के जॉन एफ. केनेडी एयरपोर्ट पर उतरे। वहां अराइवल हॉल में सब खड़े होकर बातें कर रहे थे। एयर इंडिया का लोकल स्टॉफ भी हमारे साथ बातचीत में शामिल थे, क्योंकि वहां से हमें मियामी की कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी थी। इसी बीच एयर इंडिया के एक कर्मचारी ने मुझसे कहा, ‘रूमी जी, अपना टिकट दिखाइए।’ टिकट देखकर वे बोले, ‘आपकी फ्लाइट इन लोगों के साथ जेएफके से नहीं है। आपको तो न्यू जर्सी के नेवार्क एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़नी है। वहां पहुंचने में डेढ़-दो घंटे लग जाएंगे, जबकि आपकी फ्लाइट एक घंटे बाद है। अब वह तो छूट ही जाएगी। आप अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट पकड़ लीजिए। पास में ही लागार्डिया एयरपोर्ट है, वहां जल्दी पहुंचिए।’ मैंने फटाफट सलमान के स्टाफ और मोहम्मद मुरानी से कहा कि मेरे बैग के टैग लेकर मेरा सामान होटल पहुंचा देना। फिर मैं पत्नी हनान के साथ टैक्सी लेकर लागार्डिया एयरपोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां पता चला कि मियामी जाने वाली अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट भी निकल चुकी है। खैर, दो घंटे बाद दूसरी फ्लाइट थी। मैं और मेरी पत्नी मियामी पहुंचे।
अब मजेदार बात सुनिए। मियामी एयरपोर्ट से बाहर निकले तो हमें लेने कोई नहीं आया। तभी याद आया कि प्रोडक्शन का जो आदमी हमें लेने आने वाला था, वह तो उसी फ्लाइट में आने वाला था जो हमसे छूट गई थी। उस जमाने में मोबाइल फोन तो आ गए थे, मगर अंतरराष्ट्रीय रोमिंग की सुविधा नहीं थी। लिहाजा उसे बता भी नहीं सकते थे कि हमने दूसरी फ्लाइट पकड़ ली है। अब क्या करें? पत्नी ने कहा, ‘टैक्सी पकड़ो और होटल चलो।’ मैंने कहा, ‘होटल का नाम ही नहीं पता। मुझे यह भी नहीं मालूम कि मियामी में यूनिट कहां ठहरी है। जाएं तो जाएं कहां?’ पत्नी पहली बार मेरे साथ अमेरिका आई थी। वह झल्लाकर बोली, ‘कैसे आदमी हो!’ मैंने वहां मिलने वाला टेलीफोन कार्ड खरीदा और भारत में वाशु जी तथा डेविड साहब के ऑफिस के लैंडलाइन नंबर पर फोन लगाने लगा। वहां रात हो चुकी थी। इसलिए वहां से कुछ पता नहीं चल पाया। तभी एक अंग्रेज हमें परेशान देखकर पास आया और पूछने लगा कि क्या हुआ। हमने उसे पूरा किस्सा सुनाया और बताया कि हमें अपनी शूटिंग यूनिट का होटल नहीं मालूम। उसने कहा, ‘मियामी में एक हिल्टन होटल है। मैंने वहां बहुत सारे भारतीय और ढेर सारा सामान देखा है। लगता है, किसी फिल्म की यूनिट ठहरी हुई है।’ मैंने उसे धन्यवाद कहा और टैक्सी लेकर ड्राइवर से हिल्टन चलने को कहा। वह बोला, ‘कौन-सा हिल्टन? मियामी में तो सात हिल्टन हैं!’ पत्नी ने कहा, ‘उस आदमी से हिल्टन का पूरा पता तो पूछ लेते!’ मेरे दिमाग में तो यही था कि हिल्टन एक ही होगा। मैंने कहा, ‘चलो, ऊपरवाले का नाम लेकर सारे हिल्टन के चक्कर लगाते हैं। किसी न किसी में तो हमारी यूनिट मिल ही जाएगी।’
हमारी किस्मत अच्छी थी। हम पहले ही हिल्टन पहुंचे। रिसेप्शन पर मैंने मिस्टर डेविड धवन और वाशु भगनानी का नाम बताया। रिसेप्शन वाले ने फौरन कमरे का नंबर बता दिया। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मैं बाहर आया, टैक्सी छोड़ी और आखिरकार अपने होटल पहुंच गया। तो यह था बीवी नंबर 1 की शूटिंग का एक मजेदार किस्सा। अब वाशु जी और उनकी फिल्म को याद करते हुए यह गाना सुनिए, अपना ख्याल रखिए और खुश रहिए : ‘इश्क चांदी है, इश्क सोना है, है जवानी तो इश्क होना है।’
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रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:एक गलत फ्लाइट और सात हिल्टन होटल्स का फेर
