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खेत तालाब निर्माण में ₹17.42 लाख की गड़बड़ी का आरोप:धार में किसानों का दावा- रिकॉर्ड में भुगतान, जांच की मांग; सरपंच ने आरोप नकारे




धार जिले के नालछा ब्लॉक के झाड़ी बरौदा गांव में खेत तालाबों के निर्माण और सरकारी राशि के भुगतान को लेकर सवाल उठे हैं। किसान रवि पवार, नारायण पवार और श्यामलाल पटेल ने 17 लाख 42 हजार 506 रुपए की राशि में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। किसानों का कहना है कि रिकॉर्ड में राशि निकाली गई, लेकिन कुछ खेतों में तालाबों का निर्माण नहीं हुआ। वहीं, सरपंच कुंदन मुनिया ने आरोपों को खारिज करते हुए नियमानुसार भुगतान होने की बात कही। रिकॉर्ड में राशि निकली, खेत में तालाब नहीं
किसानों के अनुसार, रवि पवार के पिता भारत भेरूसिंह के नाम पर 4 लाख 68 हजार 268 रुपए स्वीकृत बताए गए हैं। इसमें से 1 लाख 48 हजार 248 रुपए निकाले जाने का रिकॉर्ड है, लेकिन खेत में तालाब नहीं बना। रवि पवार का दावा है कि उनके पिता के खाते में केवल 4 से 5 हजार रुपए ही आए। नारायण पवार के मामले में 4 लाख 69 हजार 957 रुपए की स्वीकृत राशि में से 1 लाख 51 हजार 119 रुपए निकाले जाने की जानकारी है। किसान का कहना है कि राशि उनके खाते में नहीं आई। बनेसिंह के मामले में 4 लाख 68 हजार 208 रुपए में से 2 लाख 96 हजार 757 रुपए और एक अन्य तालाब के मामले में 4 लाख 68 हजार 354 रुपए में से 3 लाख 79 हजार 657 रुपए निकाले जाने का दावा है। किसानों ने इन भुगतानों में सरपंच के भाई विक्रमसिंह पिता उमराव सिंह के नाम से जुड़े खाते के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। गोविंदपुरा के बलराम पिता कन्हैयालाल के नाम पर 4 लाख 69 हजार 931 रुपए में से 2 लाख 98 हजार 725 रुपए निकाले जाने की जानकारी दी गई। रूपसिंह पिता निहाल सिंह के नाम से जुड़े रिकॉर्ड में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए गए। निजी राशि से तालाब बनाने का दावा
किसानों का कहना है कि कुछ तालाबों का निर्माण उन्होंने अपनी जेब से करीब 10 से 11 लाख रुपए खर्च कर कराया। उनका आरोप है कि रिकॉर्ड में दर्ज वेंडरों को उन्होंने निर्माण का ठेका नहीं दिया था। जब हमने मौके पर जाकर देखा तो चार तालाब दिखाई दिए, जबकि भारत भेरूसिंह के नाम पर दर्ज बताए गए तालाब का निर्माण नहीं मिला। ग्राम के सरपंच कुंदन ने कहा कि काम कराने वालों के उपलब्ध कराए गए खातों में नियमानुसार भुगतान किया गया है। कुछ किसानों ने काम करने वालों के खाते उपलब्ध कराए थे। जहां तालाब नहीं बना है, वहां काम कराया जाएगा। अब मामले की वास्तविक स्थिति विभागीय दस्तावेजों, निर्माण कार्य और बैंक खातों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।



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