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पंजाब के पांच जिलों के राइस मिलर्स ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट और होशियारपुर के राइस मिलर्स ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें समय रहते पूरी नहीं की गई तो वे आंदोलन करेंगे। मिलर्स की बैठक में धान की सरप्लस स्थिति, पुराने चावल की लिफ्टिंग, भंडारण, बिजली की बढ़ी दरों, मजदूरी और मिलिंग चार्ज जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई। अमृतसर राइस मिलर्स यूनियन के प्रधान राजिंदर सलवान ने बताया कि इन 5 जिलों में धान की आवक पंजाब के अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक होती है और राइस मिलों की संख्या भी काफी ज्यादा है। हर सीजन में मिलर्स को धान की खरीद, मिलिंग, भंडारण और सरकारी लिफ्टिंग से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सलवान के अनुसार, इन जिलों में धान अन्य मंडियों की तुलना में लगभग 15 से 20 दिन पहले पहुंच जाता है। इसके कारण बड़ी मात्रा में धान दूसरे जिलों में चला जाता है, जिससे बाद में स्थानीय राइस मिलों को आवश्यकतानुसार धान उपलब्ध नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि बाहर के जिलों से धान लाने का किराया और तैयार चावल की बैक मूवमेंट का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है, जिससे अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। सलवान ने यह भी बताया कि पिछले कुछ समय में बिजली की दरों में काफी बढ़ोतरी हुई है और मजदूरी भी महंगी हो चुकी है। इसके विपरीत, राइस मिलिंग के चार्ज लगभग पुराने ही हैं, जिससे मिलर्स पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने ब्रोकन चावल में पहले अधिक गुंजाइश मिलने का जिक्र करते हुए कहा कि अब लगभग 10 प्रतिशत की सीमा को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) से संबंधित भुगतान और व्यवस्था को लेकर भी पिछले साल से समस्याएं बनी हुई हैं। सभी कारणों से राइस मिलिंग कारोबार पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। मिलिंग चार्ज बढ़ाने और बिजली दरों में राहत देने की मांग की है। पिछले सीजन का लगभग 35प्रतिशत चावल अभी भी उनके स्टॉक में पड़ा है, जिससे भंडारण की समस्या और बढ़ गई है।
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राइस मिलर्स ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा:अमृतसर समेत 5 जिलों में धान की सरप्लस स्थिति से मिलर्स परेशान; कारोबार पर बढ़ा दबाव
