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राजगढ़-खिलचीपुर में डीजे और जयकारों के बीच बप्पा को विदाई:गाड़गंगा नदी में क्रेन से बड़ी प्रतिमाएं विसर्जित, पुलिस ने संभाली कमान




राजगढ़ में अनंत चतुर्दशी पर शुक्रवार शाम से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हुआ। शाम होते ही राजगढ़, खिलचीपुर और नरसिंहगढ़ में गणेश प्रतिमाओं के चल समारोह निकले। राजगढ़ में रात 8 बजे से नेवज नदी और खिलचीपुर में गाड़गंगा नदी के घाट पर डीजे और गणपति बप्पा के जयकारों के बीच प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। वहीं, नरसिंहगढ़ में भी देर रात तक बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन चलता रहा। खिलचीपुर में पुलिस और एसडीआरएफ तैनात खिलचीपुर में गाड़गंगा नदी पर विसर्जन के दौरान सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी, नगर परिषद की टीम और एसडीआरएफ नाव के साथ तैनात रही। एसडीओपी धर्मवीर नागर और टीआई कमल सिंह गेहलोत लगातार व्यवस्था की निगरानी करते रहे। छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन रामघाट पर किया गया। वहीं बड़ी प्रतिमाओं को जल मंदिर के पास क्रेन की मदद से नदी में विसर्जित कराया गया। घाट पर रोशनी की व्यवस्था भी की गई थी। श्रद्धालु ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे लगाते हुए प्रतिमाओं को विदाई देते रहे। चिंतामन गणेश मंदिर पर प्रसाद वितरण खिलचीपुर के चिंतामन गणेश मंदिर पर रामबाबू रामगढ़ वाले की ओर से श्रद्धालुओं को पूरी-सब्जी का प्रसाद बांटा गया। देर रात तक अलग-अलग पंडालों से गणेश प्रतिमाओं के चल समारोह गाड़गंगा नदी के घाट तक पहुंचते रहे। नरसिंहगढ़ में छत्री चौराहे से निकली झांकियां नरसिंहगढ़ में छत्री चौराहे से गणेश प्रतिमाओं के चल समारोह निकाले गए। अलग-अलग पंडालों से आकर्षक झांकियां भी निकलीं। पुलिस टीम जुलूस और झांकियों के साथ तैनात रही। थाना प्रभारी गूजा सोलंकी के नेतृत्व में पुलिस ने यातायात और सुरक्षा व्यवस्था संभाली। धुवली तालाब पर छोटी-बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन नेशनल हाईवे-46 स्थित धुवली तालाब पर नगरपालिका और पुलिस प्रशासन ने विसर्जन कुंड तैयार कराया था। यहां बड़ी प्रतिमाओं का क्रेन से और छोटी प्रतिमाओं का नाव की मदद से गहरे स्थान पर विसर्जन कराया गया। बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं को जलभराव वाले हिस्से से दूर रखा गया। छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन दोपहर करीब 2 बजे से शुरू हो गया था, जबकि बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन देर रात तक चलता रहा। पूजन सामग्री के लिए अलग वाहन लगाया नगरपालिका ने पूजन सामग्री को अलग से एकत्र करने के लिए स्वच्छता वाहन लगाया था। इसका उद्देश्य नदी और आसपास के क्षेत्र को साफ रखना और जल प्रदूषण को कम करना था। विसर्जन स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पुलिस, नगरपालिका और होमगार्ड की टीमें तैनात रहीं।



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