![]()
गयाजी में पितृपक्ष मेले की शुरुआत हो गई है। पहले ही दिन करीब दो लाख तीर्थयात्री पिंडदान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे हैं। फल्गु नदी के देवघाट पर सुबह से ही भीड़ उमड़ पड़ी है। करीब एक किलोमीटर तक लोग पिंडदान करते नजर आ रहे हैं। कोई अपने माता-पिता के लिए कर्मकांड कर रहा है, तो कोई दादा-दादी और नाना-नानी के लिए। खास बात यह रही कि सुबह से बारिश होती रही। कभी रिमझिम फुहार पड़ी, तो कभी तेज बारिश हुई। इसके बावजूद पिंडदानियों के कदम नहीं रुक रहे। बारिश के बीच लोग फल्गु नदी के तट पर बैठकर विधि-विधान से पिंडदान करते नजर आ रहे। भींगे कपड़ों और गीली जमीन के बीच भी श्रद्धालुओं के चेहरे पर पितरों के लिए कर्मकांड पूरा करने का भाव साफ दिख रहा है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार पितृपक्ष के पहले दिन फल्गु नदी के तट पर पिंडदान का विशेष महत्व है। यही वजह है कि पहले दिन देवघाट पर सबसे ज्यादा भीड़ नजर आई। पिंडदानी अपने साथ पूजा सामग्री लेकर पहुंचे। पुरोहितों के निर्देश पर कर्मकांड शुरू किया। देवघाट की 3 तस्वीरें… पूर्वजों के लिए पिंडदान राजस्थान के अलवर से आए राजेश कुमार पारिक अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के लिए पिंडदान करने पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि पहले खीर से पिंडदान की शुरुआत होती है। इसके बाद पुरोहित के बताए अनुसार कर्मकांड पूरा किया जाता है। 14 पूर्वजों का किया पिंडदान छत्तीसगढ़ के शक्ति से आए अशोक बंसल का परिवार भी देवघाट पहुंचा है। उन्होंने बताया कि परिवार में करीब 102 साल बाद ऐसा मौका आया है। इस बार परिवार के 14 पूर्वजों का पिंडदान करने का सौभाग्य मिला है। यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा विशेष पल है। ‘काफी साल बाद गयाजी आने का मौका मिला है’ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से आईं सरिता अग्रवाल भी अपने सास-ससुर और परिवार के अन्य बड़े लोगों के पिंडदान के लिए गया जी पहुंची। उन्होंने बताया कि वह बचपन में भी गयाजी आ चुकी हैं। इस बार पितरों के लिए पिंडदान करने का मौका मिला है। प्रशासन और नगर निगम की टीम एक्टिव देवघाट पर पिंडदान के साथ ही आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी है। बारिश से रास्ते और जमीन गीली रही। इसके बावजूद लोग कर्मकांड पूरा करने में जुटे हैं। प्रशासन और नगर निगम की टीमें भी व्यवस्थाओं में लगी रही। श्रद्धालुओं की सुविधा, सफाई और आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। तीर्थ पुरोहित गयापाल पंडा और गजाधर लाल कटारिया ने बताया कि कम से कम से 2 लाख लोग पहुंचे हैं। सबकी श्रद्धा और भक्ति रहती है कि हमारे भी पितरों का मोक्ष हो। आज फल्गुनी तीर्थ का श्राद्ध है। गयाजी तीर्थ में इनकी महिमा अपरंपार है। यह भगवान विष्णु की नगरी है। यहां गयासुर, धर्मशिला, गयापाल पुरोहितों और भगवान विष्णु का संगम है। गयाजी तीर्थों में श्रेष्ठ है।
Source link
गयाजी में रिमझिम फुहारों के बीच पितरों के लिए पिंडदान:देवघाट पर एक किलोमीटर तक भीड़, पहले दिन 2 लाख तीर्थ यात्री पहुंचे; राजस्थान-छत्तीसगढ़ से भी आए
