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राम मंदिर ट्रस्ट की आज अहम बैठक:चढ़ावा चोरी जांच, सीईओ नियुक्ति और ट्रस्टी चयन पर सबकी नजर




श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर देशभर की निगाहें टिकी हैं। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद यह पहली बड़ी बैठक है, जिसमें मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, पारदर्शिता और भविष्य की कार्ययोजना पर मंथन होने की संभावना है। बैठक से पहले मंगलवार को वैदेही भवन में विश्व हिंदू परिषद और ट्रस्ट के कई शीर्ष पदाधिकारियों की मौजूदगी ने चर्चाओं को और तेज कर दिया। सीईओ चयन पर फैसला टलने के आसार सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के चयन पर तत्काल फैसला होना मुश्किल दिख रहा है। तीन सदस्यीय चयन समिति को सैकड़ों आवेदन प्राप्त हुए हैं और उनकी स्क्रीनिंग अभी पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में समिति तीन नाम ट्रस्ट के समक्ष पेश नहीं कर पाएगी, जिसके कारण बैठक में इस विषय पर अंतिम निर्णय टल सकता है। चढ़ावा चोरी की एसआईटी जांच अंतिम दौर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने 70 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए हैं। दान संग्रह, गणना, बैंक तक परिवहन, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित दस्तावेजों का मिलान अंतिम चरण में है। सीसीटीवी फुटेज, अभिलेख और गवाहों के बयानों का विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। एसआईटी को 30 जुलाई तक अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट बैठक तक उपलब्ध होती है या नहीं, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ट्रस्टियों के रिक्त पदों पर भी मंथन बैठक में ट्रस्ट के रिक्त पदों को भरने को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार विभिन्न धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों से कई नामों पर विचार चल रहा है। विश्व हिंदू परिषद की ओर से भी कुछ नाम प्रस्तावित किए गए हैं। अंतिम निर्णय ट्रस्ट की सहमति के बाद ही होगा। बैठक से पहले बढ़ी राजनीतिक और धार्मिक हलचल मंगलवार को वैदेही भवन में ट्रस्ट महासचिव कृष्ण मोहन, कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि सहित विश्व हिंदू परिषद के कई वरिष्ठ पदाधिकारी पहुंचे। बंद कमरे में हुई बैठक को बुधवार की प्रस्तावित बैठक की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि किसी भी पदाधिकारी ने आधिकारिक तौर पर चर्चा का विषय सार्वजनिक नहीं किया। पारदर्शिता और जवाबदेही पर रहेगा फोकस चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद ट्रस्ट प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है। माना जा रहा है कि भविष्य में दान प्रबंधन, वित्तीय निगरानी, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। बुधवार की बैठक में लिए जाने वाले निर्णय मंदिर प्रबंधन की आगामी कार्यप्रणाली की दिशा तय कर सकते हैं।



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