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छतरपुर में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के खिलाफ चल रहे आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता अमित भटनागर ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट से प्रभावित आदिवासी परिवारों की समस्याओं, विस्थापन, पुनर्वास और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राहुल गांधी के सामने रखा। आंदोलन कारियों ने राहुल को बताया कि प्रभावित आदिवासी समुदाय लंबे समय से अपने अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर सत्याग्रह कर रहा है। उन्होंने आंदोलन के दौरान सामने आई परेशानियों और प्रभावित परिवारों की मांगों की जानकारी भी राहुल को दी। राहुल गांधी ने दिया समर्थन मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट और वीडियो साझा कर आंदोलन कारियों के संघर्ष का समर्थन किया। उन्होंने कहा- अपने जायज हक की लड़ाई लड़ रहे बुंदेलखंड के निवासी सम्मान और समर्थन के हकदार हैं। राहुल ने भरोसा दिलाया कि आदिवासी परिवारों की इस लड़ाई में वे और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है। उन्होंने आंदोलन कारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके मुद्दों को आगे उठाने की बात कही। विस्थापन और पुनर्वास का मुद्दा आंदोलन कारियों ने राहुल गांधी को बताया कि केन-बेतवा प्रोजेक्ट से पन्ना और छतरपुर जिले के बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट के चलते आदिवासी समुदाय को विस्थापन और आजीविका से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित परिवारों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। आंदोलन कारियों का दावा है कि कई परिवारों को भूमि के बदले भूमि और कानून के तहत मिलने वाले पुनर्वास अधिकार पर्याप्त रूप से नहीं मिले हैं। पर्यावरणीय नुकसान के आरोप आंदोलनकारियों ने प्रोजेक्ट से पन्ना टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, प्रोजेक्ट के कारण बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र प्रभावित होगा और पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने ग्राम सभा की सहमति और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और अन्य दबाव का सामना करना पड़ा। लंबे समय से जारी है आंदोलन केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट को लेकर बुंदेलखंड में प्रभावित परिवारों और आंदोलनकारियों का विरोध लंबे समय से जारी है। अमित भटनागर सहित अन्य कार्यकर्ता विस्थापन, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के अधिकारों को लेकर अलग-अलग चरणों में सत्याग्रह और विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि उनके मुद्दों को राजनीतिक और सार्वजनिक मंच पर मजबूती से उठाया जाएगा। संसद से सड़क तक समर्थन राहुल गांधी ने प्रतिनिधि मंडल को भरोसा दिलाया कि उनके पुनर्वास, भूमि अधिकार और जबरन बेदखली के खिलाफ आवाज को संसद में प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा- जरूरत पड़ी तो मैं खुद जमीन पर आकर आपके साथ आंदोलन में शामिल होऊंगा। उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना गरिमापूर्ण पुनर्वास, वैकल्पिक आजीविका और वन अधिकार अधिनियम (FRA, 2006) के पारदर्शी पालन के किसी भी परिवार को बेघर नहीं किया जाना चाहिए। बल प्रयोग की निंदा गांधी ने शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे आदिवासियों पर पुलिस बल, बुलडोजर कार्रवाई और दमनकारी नीतियों की सख्त आलोचना की। इस आश्वासन के बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश प्रशासन से विस्थापितों की मांगों पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है।
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राहुल गांधी बोले- जरूरत पड़ी तो खुद जमीन पर उतरूंगा:केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के प्रभावितों से मिले; संसद में मुद्दा उठाने का वादा किया
