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उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) की बसों से डीजल चोरी रोकने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए बसों के डीजल टैंक में सेंसरयुक्त डिवाइस लगाई जाएगी। डीजल चोरी होने या टैंक से रिसाव होने पर यह डिवाइस संबंधित अधिकारियों को अलर्ट करेगी। इसके साथ ही टैंक में खास तरह के वॉल्व भी लगाए जाएंगे, जिससे डीजल भरने के बाद उसे दोबारा निकालना आसान नहीं होगा। परिवहन निगम प्रशासन नई बसों की खरीद में इस व्यवस्था को अनिवार्य करने जा रहा है। इसके लिए बसों की चेसिस खरीद से जुड़ी टेंडर शर्तों में सेंसरयुक्त डिवाइस लगाने का प्रावधान शामिल किया जा रहा है। ऑटोमोबाइल कंपनियों को नई बसें डीजल टैंक में सेंसर लगाकर ही उपलब्ध करानी होंगी। डीजल की खपत और लीकेज पर भी रहेगी नजर नई तकनीक से बसों में डीजल की खपत पर नजर रखी जा सकेगी। सेंसर यह पता लगाने में भी मदद करेगा कि टैंक से डीजल कहां लीक हो रहा है। यदि डीजल चोरी करने की कोशिश की जाती है, तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंच जाएगी। रेलवे के इंजनों में भी इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे डीजल चोरी की घटनाओं पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है। डीजल चोरी के कई मामले आ चुके हैं सामने रोडवेज बसों से डीजल चोरी के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। पिछले वर्ष अवध बस डिपो से 2,879 लीटर डीजल चोरी होने का मामला सामने आया था। इससे पहले खुर्जा डिपो में करीब दो साल तक डीजल चोरी की घटनाएं हुई थीं, जिसके बाद छह चालकों को निलंबित किया गया था। वहीं, 25 नवंबर 2021 को कैसरबाग डिपो की सात बसों से 60 लीटर डीजल चोरी होने का मामला भी सामने आया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद परिवहन निगम प्रशासन नई बसों में सेंसरयुक्त डिवाइस लगाने की व्यवस्था कर रहा है। इसका उद्देश्य डीजल चोरी पर अंकुश लगाने के साथ ईंधन की खपत पर निगरानी बढ़ाना है।
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रोडवेज बसों में डीजल चोरी रोकने को लगेंगे सेंसर:नई बसों में सेंसरयुक्त डिवाइस और खास वॉल्व लगाना होगा अनिवार्य,टेंडर की शर्तों में शामिल होगी व्यवस्था
