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मध्य लंदन की एक शांत सड़क पर लाल सिग्नल हरा होते ही नारंगी रंग की लेम्बोर्गिनी का एक्सीलेटर दबाया गया। 350 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम इस कार के इंजन की गर्जना से पूरी सड़क दहल उठी। 6.3 करोड़ रु. (6,00,000 पाउंड) की इस कार पर दुबई की नंबर प्लेट लगी थी। समस्या यह थी कि जिस सड़क पर सुपरकारों की स्पीड लिमिट 20-30 किमी/घंटा तय है, वहां ड्राइवर 350 की स्पीड से सुपरकार दौड़ा रहे हैं। आखिर तीसरी बार नियम तोड़ने पर पुलिस ने कार जब्त कर ली। यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि खाड़ी देशों (मिडिल ईस्ट) के अमीर शेख के उस बेलगाम शौक का हिस्सा है, जो अब लंदन जैसे वैश्विक शहर के लिए गंभीर नागरिक और सुरक्षा समस्या बन चुका है। दुबई, कतर और सऊदी अरब के कई अमीर शेखों, उद्योगपतियों और उनके बेटों में गर्मियों की छुट्टियां लंदन के पॉश इलाकों (जैसे मेफेयर और नाइट्सब्रिज) में बिताने की पुरानी परंपरा रही है। लेकिन, ये लोग बीते कुछ वर्षों से अपनी सुपरकारें कार्गो विमानों से लंदन ले जाने लगे हैं। केवल एक कार को प्लेन से लंदन लाने-ले जाने का खर्च 26 लाख रु. (25,000 पाउंड) से अधिक आता है। लंदन की सड़कों पर इन कारों का अनियंत्रित प्रदर्शन, इंजन की बेवजह तेज आवाज और खतरनाक स्पीडिंग सार्वजनिक उपद्रव बन चुकी है। पुलिस ने ‘रिफॉर्म एक्ट’ की धारा-59 का प्रयोग करते हुए एक ही हफ्ते में 90 से अधिक सुपरकारें जब्त कीं, जिनकी कुल कीमत ₹83 करोड़ रु. (8 मिलियन पाउंड) से अधिक थी। जब्त वाहनों में अधिकांश पर खाड़ी देशों की नंबर प्लेट्स थीं। इनमें 35 करोड़ रु. की अति-दुर्लभ ‘फरारी मोंजा’ भी शामिल थी, जिसके ड्राइवर के पास वैध ब्रिटिश लाइसेंस तक नहीं था। पुलिस द्वारा इन कारों को जब्त कर मार्बल आर्च पर खड़ा किए जाने के बाद वहां इन्हें देखने वालों और लाइव-ब्लॉगर्स का हुजूम उमड़ पड़ा। सुपरकारों की रीसेल वैल्यू अच्छी, इसलिए शेखों की पसंदीदा खास तौर से सुपरकारें स्टेटस सिंबल, सोशल मीडिया का कंटेंट और दिखावे का सबसे बड़ा जरिया बन चुकी हैं। यह सिर्फ रफ्तार का शौक नहीं है, बल्कि ‘एलीट’ दिखने की सनक बन चुकी है। 1980 के दशक में फरारी साल में 3,000 से कम कारें बनाती थी। आज 13 हजार से ज्यादा बना रही है। लेम्बोर्गिनी भी हर साल 10,000 से ज्यादा कारें बना रही है। ऑटो एक्सपर्ट बताते हैं कि बीएमडब्ल्यू एम3 जैसी साधारण लग्जरी कारें 5 साल में अपनी 60% कीमत गंवा देती हैं। इसके विपरीत, पोर्शे या फरारी जैसी सुपरकारें अपनी रीसेल वैल्यू बनाए रखती हैं, जिससे ये अमीरों के लिए एक सुरक्षित निवेश बन गई हैं।
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लंदन में शेखों का बेकाबू शौक:350 की रफ्तार से दौड़ा रहे सुपरकारें; 83 करोड़ की 90 गाड़ियां जब्त
