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लक्ष्यराज ने राजस्थान में मराठी-भाषा पढ़ाने का किया समर्थन:बोले- राजनीति में GenZ आए तो बुराई क्या; कोई तरीके से बात रखे तो सुनना चाहिए




जयपुर में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा- स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को अलग-अलग भाषाएं सीखने का अवसर मिलना चाहिए। यह केवल मराठी या राजस्थानी भाषा तक सीमित नहीं होना चाहिए। आज की दुनिया में किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके क्षेत्र या प्रदेश तक सीमित नहीं है। जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में शुक्रवार को आयोजित स्कून्यूज ग्लोबल एजुकेटर्स फेस्ट के उद्घाटन के मौके पर उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने यह कहा। कार्यक्रम में की-नोट स्पीकर के रूप में डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने राजस्थान में मराठी भाषा के केंद्र और स्टडी की व्यवस्था शुरू करने के मीडिया के सवाल पर इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा- देश में हर व्यक्ति को अलग-अलग भाषाएं सीखने और समझने का अवसर मिलना चाहिए। किसी भाषा को सीखना केवल शब्दों को सीखना नहीं, बल्कि उस भाषा से जुड़ी संस्कृति, परंपरा और समाज को समझना भी है। उन्होंने कहा- हमारा देश भाषाओं की विविधता से समृद्ध है और देश में जितनी चीजें सीखने और सिखाने के अवसर बढ़ेंगे, उन्हें स्वीकार करना चाहिए। वहीं GenZ के राजनीति में आने को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ. लक्ष्यराज ने कहा- यदि राजनीति किसी के अधिकार, बेहतरी और सेवा के लिए की जाती है तो इसमें बुराई क्या है। उन्होंने कहा कि यदि कोई बात सलीके से और उचित तरीके से रखी जाती है तो उसे सुना जाना चाहिए। स्टूडेंट्स को नए सब्जेक्ट-कौशल सीखने के मिलें अवसर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा- 21वीं सदी में दुनिया और देश के बीच दूरियां कम हुई हैं। ऐसे में बच्चों को अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों को समझने का अवसर देना शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्कूल सुधारों के साथ आने वाले समय में विद्यार्थियों को भाषाओं के साथ-साथ अन्य नए सब्जेक्ट और कौशलों को सीखने के और अधिक अवसर मिलेंगे। डॉ. मेवाड़ ने कहा- यदि देश को विकसित होना है तो उसका सबसे मजबूत रास्ता शिक्षा से होकर जाता है। शिक्षा जितनी विविध होगी, आने वाली पीढ़ी उतनी ही बेहतर तरीके से देश और दुनिया को समझ सकेगी। GenZ प्रदर्शन पर बोले- मतभेद जरूरी, मनभेद नहीं जंतर-मंतर पर हुए GenZ प्रदर्शन और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी से जुड़े सवाल पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा- हाल ही एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक की कही बात मुझे महत्वपूर्ण लगी कि मतभेद जीवन में जरूरी है, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा- हर व्यक्ति को अपनी बात कहने की आजादी होनी चाहिए और दूसरों की बात सुनने की भी क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं की भागीदारी को संवाद और सकारात्मक उद्देश्य से जोड़कर देखने की बात कही। शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का किया समर्थन शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर डॉ. मेवाड़ ने कहा- बदलाव जीवन का स्थायी हिस्सा है। कोई भी व्यवस्था हमेशा एक जैसी नहीं रह सकती। उन्होंने कहा- शिक्षा क्षेत्र में जो बदलाव हो रहे हैं, उनका स्वागत किया जाना चाहिए। कहा- 21वीं सदी हिंदुस्तान की डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा- 19वीं सदी ब्रिटेन की और 20वीं सदी अमेरिका की थी, लेकिन 21वीं सदी हिंदुस्तान की होगी। उन्होंने सोशल मीडिया के बदलते दौर पर कहा- जीवन की असली खूबसूरती सादगी और सरलता में बसी थी, जब सोशल मीडिया अस्तित्व में नहीं था। आज तकनीक हमारी जरूरत है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल दुनिया हमारी संवेदनाओं, सादगी और मानवीय मूल्यों पर हावी न हो जाए। लक्ष्यराज सिंह ने कहा- देश को आगे बढ़ाने की भारी जिम्मेदारी हमारे गुरुओं के कंधों पर है। गुरु ही वे शक्ति हैं, जो आने वाली पीढ़ी को सही दिशा और बेहतर भविष्य का मार्ग दिखाते हैं। गुरु कोई काल्पनिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि हमारे जीवन को छूकर उसे नई दिशा देने वाले निर्माता हैं। आज का युग परिवर्तन का है। बदलता वही है, जो स्वयं बदलने का साहस रखता है और वही कुछ कर दिखाता है, जिसके अंदर कुछ करने का दृढ़ संकल्प होता है। ब्लाइंड बच्चों के स्कूल जाने का किया वादा कार्यक्रम के दौरान एक भावुक और रोचक क्षण भी देखने को मिला। मंच पर एक दृष्टिबाधित विद्यार्थी ने डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ से कहा- उन्होंने हमारे म्यूजिक की ट्रेनिंग के लिए म्यूजिक सिस्टम उपलब्ध कराया है। अब बच्चे चाहते हैं कि आप हमारे स्कूल आएं। छात्र ने उनसे पूछा- क्या आप हमारे स्कूल आएंगे या फिर हम बच्चे बस में बैठकर आपके घर आ जाएं। इस पर डॉ. मेवाड़ ने कहा- मैं जल्द ही बच्चों के बीच आऊंगा और बच्चे भी उनके घर आएं, इसके लिए मैं बस की व्यवस्था करूंगा। उन्होंने कहा- बच्चों के साथ मेरा विशेष जुड़ाव है और ब्लाइंड स्कूल जिस तरह से काम कर रहा है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों से मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात होगी। कहा- डॉक्टर्स ने मुझे बौद्धिक रूप से अक्षम माना था लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अपने बचपन का किस्सा शेयर करते हुए बताया- मुझे डिस्लेक्सिया डायग्नोसिस (व्यक्ति को पढ़ने, लिखने और शब्दों को समझने में कठिनाई) हुआ था। डॉक्टर्स ने मुझे बौद्धिक रूप से अक्षम माना था। इसके बावजूद मैंने इसे जीवन पर हावी नहीं होने दिया और पीएचडी तक शिक्षा पूरा की। यही नहीं सामाजिक सेवा और जनकल्याण क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए अब तक मैंने 10 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। अपनी यात्रा से शिक्षकों और विद्यार्थियों को किया प्रेरित कार्यक्रम में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अपनी व्यक्तिगत यात्रा के अनुभव भी शेयर किए। उन्होंने स्कून्यूज और उसके मंच की सराहना करते हुए कहा- संस्था 10 साल से भविष्य की पीढ़ी को दिशा देने का काम कर रही है। उन्होंने कहा- मुझे इस मंच पर अपनी बात रखने और उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर मिला, जिन्होंने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने और यहां तक पहुंचने में सहयोग दिया। इस अवसर पर स्कून्यूज के संस्थापक और सीईओ रवि संतलानी भी मौजूद रहे। उद्घाटन सत्र के दौरान ‘विलिंगनेस प्रोजेक्ट’ का शुभारंभ किया गया। इस प्रोजेक्ट के तहत कार्यक्रम में दिव्यांग लोगों को मंच पर कृत्रिम हाथ दिए गए। कार्यक्रम में भारत और दुनिया भर से 500 से अधिक शिक्षक, प्राचार्य, स्कूल निदेशक, शिक्षाविद और विचारक शामिल हो रहे हैं।



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