लुधियाना में सरकारी ‘एडनोक’ की कालाबाजारी:आधार कार्डों के दुरुपयोग की शिकायत, दंपती पर बैठी जांच कमेटी, रोजाना सप्लाई होते 60 पत्ते




पंजाब के लुधियाना में सरकारी डिस्पेंसरियों से मरीजों को मुफ्त मिलने वाली ‘एडनोक’ गोलियों की कथित कालाबाजारी और लोगों के आधार कार्ड नंबरों के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों के आधार कार्ड नंबरों का इस्तेमाल कर रिकॉर्ड में उनके नाम पर दवा जारी दिखाई जाती थी, जबकि दवा कथित तौर पर बाजार में बेच दी जाती थी। मामले में सुभाष नगर डिस्पेंसरी के ईटीपी ऑपरेटर हरदीप सिंह और ओट स्टाफ नर्स गुरविंदर कौर के खिलाफ शिकायत दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच कमेटी गठित की है। इसमें ड्रग इंस्पेक्टर और साइकेट्रिस्ट को भी शामिल किया गया है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 2 से 3 दिन में जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वायरल वीडियो के बाद सामने आया मामला मामले से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हुआ है। इसमें दवा लेने वाले एक युवक ने दावा किया कि सरकारी सप्लाई की ‘एडनोक’ गोलियां बाजार में बेची जा रही हैं। इन दवाओं के पत्तों पर ‘NOT FOR SALE’ लिखा होता है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसे रोजाना करीब 60 से 70 पत्ते उपलब्ध करवाए जाते थे, जिन्हें वह आगे बेचता था। आधार कार्ड नंबरों पर दवा जारी करने का आरोप शिकायतकर्ता प्रशोत्तम लाल ने आरोप लगाया कि कई लोगों के आधार कार्ड नंबरों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर रिकॉर्ड में दवा जारी दिखाई जा रही है। इसके बाद दवा कथित तौर पर बाजार में करीब दोगुने दाम पर बेच दी जाती थी। शिकायतकर्ता ने विभाग से मांग की है कि जिन लोगों के आधार कार्ड नंबरों पर दवा जारी हुई है, उनकी फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई जाए। उसका दावा है कि इनमें कई ऐसे लोग हैं जो नशे की दवा लेते ही नहीं हैं। 60 से 70 पत्ते रोजाना सप्लाई करने का दावा प्रशोत्तम लाल ने आरोप लगाया कि वह करीब दो महीने तक हरदीप सिंह के संपर्क में रहा। उसके मुताबिक, हरदीप उसे कई बार दवा के पत्ते अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने के लिए भेजता था। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसे लोकेशन बताकर वहां मौजूद व्यक्ति को दवा पहुंचाने के लिए कहा जाता था। उसने आरोप लगाया कि रोजाना 60 से 70 पत्तों की सप्लाई होती थी और एक पत्ता 400 से 500 रुपए में बेचा जाता था। इस हिसाब से रोजाना 30 से 40 हजार रुपए की कमाई होने का भी दावा शिकायत में किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की अभी विभागीय जांच होनी बाकी है। अपने आधार पर 7 दिन की दवा, हाथ में मिली 2 दिन की प्रशोत्तम ने आरोप लगाया कि पहले उसके आधार कार्ड पर 7 दिन की दवा जारी की जाती थी, लेकिन अब उसे 2 दिन की गोलियां ही दी जाती हैं, जबकि रिकॉर्ड में 7 दिन की दवा दर्ज होने का दावा किया गया है। उसने यह भी आरोप लगाया कि मामले की जानकारी सामने लाने के बाद उसे मारपीट और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पहले भी सामने आया था ऐसा मामला शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इससे पहले तरसेम भारद्वाज नाम के व्यक्ति के आधार कार्ड का भी इसी तरह कथित दुरुपयोग हुआ था। उसके अनुसार, तरसेम ने कभी यह दवा नहीं ली, लेकिन उसके नाम पर हर महीने गोलियां जारी होने का रिकॉर्ड सामने आया था। हालांकि, इस आरोप की भी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। एसएमओ ने कहा- शिकायत मिली, विभागीय जांच शुरू एसएमओ रमिंदर कौर गिल ने कहा कि मामले में लिखित शिकायत मिली है और इसकी जांच करवाई जा रही है। मामला गंभीर होने के कारण विभागीय जांच शुरू की गई है। हरदीप सिंह के साथ स्टाफ नर्स गुरविंदर कौर पर भी आरोप लगाए गए हैं, इसलिए उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। डिप्टी मेडिकल कमिश्नर बोले- 2 से 3 दिन में रिपोर्ट आएगी डिप्टी मेडिकल कमिश्नर सग्गड़ ने कहा कि मामले की जांच के लिए पहले चार सदस्यों की कमेटी बनाई गई थी। मामला गंभीर होने के कारण अब इसमें ड्रग इंस्पेक्टर और साइकेट्रिस्ट को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी डिस्पेंसरियों में इस तरह की गतिविधि बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 2 से 3 दिन में जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।



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