Headlines

विदिशा में लोगों ने मनाया भुजरिया पर्व:निकलीं शोभायात्राएं, बेतवा नदी में भुजरियों का विसर्जन, लहंगी नृत्य आकर्षण




विदिशा में भुजरिया पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। दोपहर बाद शहर के अलग-अलग मोहल्लों से महिलाओं की टोलियां भुजरिया लेकर जुलूस के रूप में निकलीं। शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी श्रद्धालु भुजरिया लेकर बेतवा नदी के घाट पर पहुंचे। यहां पूजा-अर्चना के बाद भुजरियों का विसर्जन किया गया। जुलूस में महिलाएं हाथों में गेहूं के दाने लेकर भुजरिया की पूजा करती नजर आईं। सावन और भुजरिया के पारंपरिक गीतों से माहौल भक्तिमय रहा। वहीं, पुरुषों की टोलियां भी पारंपरिक लहंगी खेलते हुए जुलूस में शामिल हुईं। ढोलक की थाप पर पुरुष गोल घेरा बनाकर छोटे डंडों के साथ लहंगी खेलते हुए आगे बढ़े। बेतवा घाट पर हुआ भुजरिया विसर्जन शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए जुलूस बेतवा नदी के घाट पर पहुंचा। यहां पूजा-अर्चना के बाद भुजरियों का विसर्जन किया गया। विसर्जन के दौरान बेतवा नदी घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने घाट पर सुरक्षा के इंतजाम किए थे। होमगार्ड के जवानों के साथ एनडीआरएफ की टीम भी तैनात रही। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे। नागपंचमी के बाद बोए जाते हैं गेहूं के दाने मान्यता के अनुसार, नागपंचमी के बाद गेहूं के दानों को छोटे-छोटे पात्रों में बोया जाता है। करीब 7 से 8 दिनों में गेहूं भुजरिया के रूप में तैयार हो जाते हैं। रक्षाबंधन के दूसरे दिन भुजरिया पर्व पर लोग घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना के साथ इनकी पूजा करते हैं। किसान अच्छी बारिश और बेहतर फसल की कामना भी करते हैं। एक-दूसरे के घर जाकर भुजरिया भेंट करते हैं भुजरिया पर्व पर लोग एक-दूसरे के घर जाकर भुजरिया भेंट करते हैं और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं। पर्व को लेकर बच्चों में भी उत्साह रहा। बच्चे अलग-अलग टोलियां बनाकर लोगों से भुजरिया मिलते और बड़ों का आशीर्वाद लेते नजर आए।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *