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ज्योतिष्पीठ (बद्रिकाश्रम) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इस वर्ष अपना चातुर्मास अनुष्ठान छत्तीसगढ़ में करेंगे। यह अनुष्ठान 29 जुलाई से 26 सितंबर 2026 तक बेमेतरा जिले के सलधा स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में आयोजित होगा। इसे विश्व के सबसे बड़े निर्माणाधीन सवा लाख शिवलिंग मंदिर के रूप में बताया जा रहा है। शंकराचार्य के आगमन से प्रदेश के संत समाज और श्रद्धालुओं में उत्साह है। चातुर्मास हिंदू धर्म की प्रमुख आध्यात्मिक परंपराओं में से एक है। इस दौरान संत-महात्मा एक स्थान पर रहकर साधना, स्वाध्याय, धर्मोपदेश और लोककल्याण से जुड़े कार्यक्रम करते हैं। इस अवधि में धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए कई धार्मिक आयोजन भी होते हैं।
गौसंरक्षण पर होगी चर्चा चातुर्मास प्रवास के दौरान प्रतिदिन वेद-पुराण प्रवचन, धर्मसभा, श्रद्धालुओं के लिए आशीर्वचन, गौसंरक्षण पर चर्चा और समाज व राष्ट्र से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। आयोजन में देशभर से संत, विद्वान और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
सभी जिलों और गांवों से लोगों को आमंत्रित दंडी स्वामी इन्दुभवानंद तीर्थ ने कहा कि शंकराचार्य का छत्तीसगढ़ आगमन प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है। उनके अनुसार यह चातुर्मास अनुष्ठान धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा तथा समाज में नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देगा। आयोजन समिति के अनुसार प्रदेश के सभी जिलों और गांवों में लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भंडारे सहित आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। समिति ने धर्मप्रेमी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर धर्मोपदेश का लाभ लेने की अपील की है।
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद करेंगे सवा लाख शिवलिंग मंदिर में चातुर्मास पूजन:छत्तीसगढ़ के सपाद लक्षेश्वर धाम में होगा अनुष्ठान, देशभर से संत-श्रद्धालु पहुचेंगे
