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शिक्षा व्यवस्था पर सवाल:शिक्षकों पर पोर्टल में डाटा अपलोड से लेकर सर्वे व एमडीएम तक की जिम्मेदारी




शिक्षक दिवस पर शनिवार को देशभर में शिक्षकों के सम्मान में कार्यक्रम हुए। उन्हें राष्ट्र निर्माण की रीढ़ बताया गया। लेकिन सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के शिक्षकों के सामने सवाल कुछ और है- वे बच्चों को पढ़ाएं या विभाग के 86 तरह के काम पूरे करें? शिक्षकों की ओर से बताई गई जिम्मेदारियों की सूची देखें तो शिक्षक सिर्फ कक्षा में पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं रह गया है। उसे ऑनलाइन डाटा भरने, पोर्टल संभालने, सर्वे करने, बैठकों में जाने, अभियान चलाने और एमडीएम का हिसाब देखने वाला भी बनना पड़ रहा है। ऐसे में शिक्षकों का बड़ा समय कक्षा के बाहर के कामों में चला जाता है। बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए उनके पास समय बहुत कम बचता है। डाटा अपलोड का काम ड्रॉप बॉक्स कार्य, यू-डायस प्लस की फैसिलिटी, टीचर और स्टूडेंट मॉड्यूल, छात्रों का आधार सत्यापन, अपार और डीबीटी डाटा के काम करने होते हैं। इसके बाद ईको क्लब पोर्टल, ई-कल्याण, उल्लास ऐप पर असाक्षरों की एंट्री और प्रशस्त एेप से संबंधित जिम्मेदारियां हैं। इनकी जानकारी जुटाने, उसे सत्यापित कर अपलोड करने में समय लगता है। शिक्षक किन कामों में अधिक व्यस्त रहते हैं हर सप्ताह कोई न कोई गतिविधि: शिक्षकों को हर सप्ताह एसएचडब्ल्यूपी कक्षा, दवा वितरण, ईको क्लब बैठक, बाल संसद, एसएमसी और अभिभावक-शिक्षक बैठक करनी होती है। सीपीडी प्रशिक्षण, जूम मीटिंग, मूल्यांकन, रीडिंग कैंपेन और पुस्तकालय संचालन जैसे काम भी जिम्मे हैं। खेल, प्रतियोगिता और प्रदर्शनी का जिम्मा: स्कूल रुआर, डहर कार्य, शिशु गणना, खेलो झारखंड लिटिल चैंपियनशिप, सुब्रतो कप, बैंगल्स डे और इंस्पायर अवॉर्ड जैसी गतिविधियों की जिम्मेदारी भी शिक्षकों पर है। विज्ञान प्रदर्शनी और खेल महोत्सव में बच्चों की तैयारी से लेकर भागीदारी तक करानी होती है। पखवाड़ा खत्म नहीं होता, नया अभियान शुरू: स्वच्छता, स्वास्थ्य और जल पखवाड़े से लेकर पृथ्वी दिवस, ग्लोबल वार्मिंग डे और साक्षरता दिवस तक के आयोजन कराने होते हैं। विकसित भारत बिल्डथॉन, शिक्षा सप्ताह, साधना सप्ताह, ग्राम शिक्षा संगम, पोषण, बाल सुरक्षा सप्ताह जैसे अभियान चलते रहते हैं स्कूल रैंकिंग व प्रमाणन शिक्षकों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार, स्वच्छ हरित विद्यालय रेटिंग और विद्यालय प्रमाणीकरण जैसे कार्य भी वे करते हैं। स्कूल में निर्धारित गतिविधियां कराना, रिकॉर्ड रखना और संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना। यानि शिक्षक से सिर्फ यह नहीं पूछा जाता कि बच्चों ने कितना सीखा, बल्कि स्कूल की गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड भी तैयार रखना पड़ता है। टीचर बोले- शिक्षक को हर काम का कर्मचारी बना दिया अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि शिक्षक का मूल दायित्व बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और उनका सर्वांगीण विकास करना है। लेकिन शिक्षकों को लगातार विभागीय, प्रशासनिक, ऑनलाइन और अभियान आधारित जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। इन गतिविधियों के वीडियो रोज पोस्ट करने का दबाव भी है। शिक्षकों को अनावश्यक बोझ से मुक्त किया जाना चाहिए।



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