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अगस्त में मेहरबान रहे मानसून की बदौलत मध्य प्रदेश में अब तक कोटे की 73 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। भिंड, निवाड़ी और सतना ऐसे जिले हैं, जहां पर कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल में 93%, इंदौर-उज्जैन में 61%, जबलपुर में 68% और ग्वालियर में 83% पानी गिरा है। मौसम विभाग के अनुसार, निवाड़ी में सबसे ज्यादा 39.1 इंच पानी गिर चुका है, जो कोटे से 28 प्रतिशत ज्यादा है। डिंडौरी, मंडला में 37 इंच से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है। बता दें कि अगस्त के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में मानसून ट्रफ, डिप्रेशन और लो प्रेशर एरिया (निम्न दवाब क्षेत्र) एक्टिव रहे। इस वजह से पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का दौर बना रहा। डिंडौरी, सतना, सिवनी समेत कई जिलों में तो बाढ़ आ गई। नर्मदा, मंदाकिनी नदियां उफान पर रही और झरने फूट पड़े। IMD (मौसम केंद्र) की माने तो सितंबर के पहले सप्ताह से भी तेज बारिश का दौर बना रहेगा। ऐसे में कई और जिलों में कोटा फुल हो सकता है। प्रदेश में अब तक औसत 30 इंच बारिश होना थी, लेकिन 27.3 इंच पानी ही गिरा है। यह कोटे से 2.7 इंच कम है। डैमों में आया पानी, फसलों को फायदा मिला एमपी के डैम औसत 90% तक भरे
प्रदेश के डैमों की स्थिति के बारे में बात करें तो जल भराव की स्थिति 70 प्रतिशत से ज्यादा है। इनमें इंदिरा सागर, गांधी सागर, बाण सागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, बरगी, ओंकारेश्वरर, और तवा 50 से 90 प्रतिशत तक भर चुके हैं। बरगी, जौहिला समेत कई डैमों के गेट भी खुल चुके हैं। हालांकि, इंदौर और उज्जैन संभाग के डैमों की स्थिति ठीक नहीं है। इस बार 9 दिन लेट आया था मानसून
बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा। कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई। इस वजह से औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा, लेकिन तीसरे सप्ताह मानसून ने रफ्तार पकड़ी और 3.3 इंच पानी गिर गया। चौथे सप्ताह में भी भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। अगस्त के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया, जो अब तक जारी है। एमपी में इन जिलों में कम/ज्यादा बारिश
प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, डिंडौरी, निवाड़ी में 1% से 50% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 51% कम पानी गिरा है। 16 जिलों में ज्यादा बारिश
IMD की माने तो अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मध्यप्रदेश में कैसा रहेगा यह सप्ताह
मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि पूर्वी हिस्से में मानसून ने जोर पकड़ा है। मध्य और उत्तरी हिस्से में भी तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। इस सप्ताह निवाड़ी, टीकमगढ़ और शिवपुरी जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश हुई है। हालांकि, पश्चिमी MP का बड़ा हिस्सा अभी भी सूखे जैसा है। अब आसमान की निगाहें बंगाल की खाड़ी के नए निम्न-दाब क्षेत्र पर हैं। अगर अगली बारिश पूर्व से पश्चिम की ओर अपना दायरा बढ़ाती है तो प्रदेश की -9% मौसमी कमी तेजी से कम हो सकती है। यदि बारिश फिर उन्हीं क्षेत्रों में केंद्रित रहती है, जिन्हें पहले ही भरपूर पानी मिल चुका है, तो प्रदेश का औसत आंकड़ा सुधरने के बावजूद मालवा-निमाड़ और पश्चिमी MP की जल-वर्षा असमानता बनी रह सकती है। 5 बड़े शहरों में ऐसा रहेगा मौसम
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संडे एमपी मानसून अपडेट: MP में कोटे की 73% बारिश:भिंड, निवाड़ी-सतना में कोटे से ज्यादा बारिश; भोपाल में 93%, इंदौर-उज्जैन में 61% हुई
