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अररिया के संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। कहीं 18 वर्ष से कम उम्र के गुरुजी की नियुक्ति कर दी गई तो कुछ की नियुक्ति में बोर्ड से अनुमति ही नहीं ली गई। इसकी शिकायत जब डीईओ के पास की गई तो उन्होंने नई नियुक्ति पर रोक लगा दी और सभी शिक्षकों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। जिले में 21 संस्कृत विद्यालय हैं। 14 स्कूलों में 20 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। यह मामला तब सामने आया जब जिले के एक युवक सागर झा ने किसी शिक्षक से बात की। बातचीत के दौरान नियुक्ति में फर्जीवाड़े की आशंका हुई। उसके बाद उसने बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, डीएम, डीईओ, निगरानी और सहयोग पोर्टल से शिकायत की। डीईओ कार्यालय की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि 20 शिक्षक निर्धारित आयु सीमा से कम उम्र के हैं। जबकि संस्कृत विद्यालय कर्मचारी नियुक्ति नियमावली 1976 एवं 2015 के अनुसार शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है। इस संबंध में डीईओ मो. साहेब आलम ने बताया कि बोर्ड के नियमों के तहत जो भी कार्रवाई होगी की जाएगी। अगर कम उम्र मामले में आरोप साबित होता है तो कानूनी कार्रवाई होगी और डीएम, बोर्ड को पत्र भी लिखा जाएगा। बता दें कि इस मामले में करीब 20 दिन पहले जनता दरबार में भी किसी ने डीएम विनोद दूहन से शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि मामले की जांच कराएंगे। बहाली हाल में, रिकार्ड में नियुक्ति बैक डेट में
कई शिक्षकों के आधार कार्ड, शैक्षणिक प्रमाण-पत्र और सेवा पुस्तिका में अलग-अलग जन्मतिथि दर्ज है। कुछ शिक्षकों को हाल के वर्षों में नियुक्त किया गया और बाद में उन्हें 2012, 2013 या 2014 में बैक डेट से नियुक्त दिखाकर रिकॉर्ड बना दिया गया। बरही विनोद संस्कृत विद्यालय के शिक्षक ललन के मामले में बोर्ड ने पहले ही कार्रवाई का निर्देश दिया था। कई नामों का रिकार्ड बोर्ड के पास नहीं
संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव नीरज कुमार ने हाल ही में डीईओ को पत्र भेजकर बताया कि चार विद्यालयों के एक दर्जन से अधिक शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की नियुक्ति का बोर्ड से कोई अनुमोदन नहीं है। केवल वाणी विलास संस्कृत प्रावि सह मवि पलासी के गिरिजानंद झा का अनुमोदन 1990 में किया गया है। कई शिक्षकों का रिकॉर्ड ही बोर्ड के पास नहीं है।
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संस्कृत विद्यालयों में 18 वर्ष से कम के गुरुजी:आधार-सर्टिफिकेट में जन्मतिथि अलग-अलग, अररिया में फर्जीवाड़ा, बोर्ड से अनुमति नहीं ली, नई बहाली पर रोक
