![]()
मुरैना जिले के पोरसा में नशे की लत के चलते शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे एक युवक ने खुद को कट्टे से गोली मारकर जान दे दी। गांधी नगर निवासी सर्वेश राठौर (20) ने आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर अपनी मौत के लिए नशीले इंजेक्शन की लत को जिम्मेदार ठहराया। वीडियो में उसने दावा किया, पिछले 4 वर्षों से उसे अटेर रोड स्थित अग्रवाल मेडिकल स्टोर से लगातार नशीले इंजेक्शन मिलते रहे, जिन पर वह 10 से 12 लाख रुपए खर्च कर चुका है। जिसके बाद इस मामले में पुलिस ने मेडिकल संचालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इंस्टाग्राम वीडियो के आधार पर दर्ज हुई एफआईआर वीडियो के आधार पर पोरसा पुलिस ने मेडिकल संचालक संजय अग्रवाल के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट सहित अन्य धाराओं में शुक्रवार देर रात केस दर्ज किया है। घटना के बाद एडीएम प्रतिज्ञा शर्मा एसडीओपी रवी भदौरिया के नेतृत्व में पुलिस और ड्रग इंस्पेक्टर की टीम ने देर रात तक मेडिकल स्टोर और उसके गोदाम पर जांच और कार्रवाई की। वीडियो में चार साल में 12 लाख के इंजेक्शन खरीदने का दावा वीडियो में सर्वेश बोला- मेरा नाम सर्वेश राठौर है। मुझे पिछले 4 सालों से नशे के इंजेक्शन की लत लग चुकी है, जिसे लगाने के बाद मेरी मानसिक स्थिति खराब हो जाती है। मैं इसे अटेर रोड स्थित अग्रवाल मेडिकल से लाता हूं और अब तक लगभग 10-12 लाख रुपए बर्बाद कर चुका हूं। मैं इसे छोड़ना चाहता हूं पर छोड़ नहीं पा रहा। पोरसा के 80% लड़के इस नशे से बर्बाद हो रहे हैं। मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं और इसके लिए कट्टा ले आया हूं। प्रशासन से गुजारिश है कि इस मेडिकल स्टोर पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके बाद सर्वेश अपने घर के सामने गली में पहुंचा और देशी कट्टे से अपने सीने में गोली मार ली। गोली की आवाज सुनकर परिजन और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर चुका था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। ड्रग इंस्पेक्टर की शिकायत पर केस दर्ज पुलिस ने ड्रग इंस्पेक्टर की शिकायत के आधार पर मेडिकल स्टोर संचालक संजय अग्रवाल के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम के तहत अनियमितताओं का मामला दर्ज किया है। वहीं, मृतक के परिजनों की शिकायत पर उधारी की रकम को लेकर प्रताड़ित करने के आरोप में दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है। फिलहाल पुलिस दोनों मामलों की अलग-अलग जांच कर रही है। मेडिकल स्टोर और गोदाम में देर रात तक जांच घटना के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया। एडीएम प्रतिज्ञा शर्मा और एसडीओपी रवी भदौरिया के नेतृत्व में पुलिस तथा ड्रग विभाग की टीम ने अग्रवाल मेडिकल स्टोर और उसके गोदाम पर देर रात तक जांच की। जांच के दौरान स्टॉक, रिकॉर्ड, दस्तावेज और इंजेक्शनों की उपलब्धता की पड़ताल की गई। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि नियंत्रित और प्रतिबंधित दवाओं का वितरण नियमों के अनुसार किया गया था या नहीं। 135 रुपए के इंजेक्शन को मंहगे में बेच रहे मेडिकल संचालक मेफॅटरमाइन सल्फेट शेड्यूल-एच श्रेणी की दवा है, जिसे केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेचा जा सकता है। इसकी अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) – करीब 135 रुपए है, लेकिन पड़ताल 1 में सामने आया कि नशे के आदी लोगों से जिले में इसके लिए 300 से 500 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ मेडिकल स्टोर संचालक युवाओं की लत का आर्थिक फायदा उठा रहे हैं। डॉक्टर बोले- ऐसे इंजेक्शन का दुरुपयोग बेहद खतरनाक जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. योगेश तिवारी ने बताया कि ‘टरमिन’ जैसे इंजेक्शन सामान्य मेडिकल स्टोर से बिना उचित चिकित्सकीय आवश्यकता के नहीं दिए जाने चाहिए। इनका उपयोग मुख्य रूप से बड़े अस्पतालों और नर्सिंग होम में ऑपरेशन, एनेस्थीसिया या आईसीयू के दौरान मरीज का गिरा हुआ ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। यह सामान्य उपयोग या नशे के लिए बिल्कुल नहीं है। इंजेक्शन लगाने से शरीर और मस्तिष्क पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। इससे हृदय गति और रक्तचाप अनियंत्रित हो सकते हैं, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक दुरुपयोग करने वालों में घबराहट, चिड़चिड़ापन, मानसिक असंतुलन, अवसाद और आक्रामक व्यवहार जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं। इस दवा का उपयोग केवल प्रशिक्षित चिकित्सक की निगरानी में ही किया जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसे इंजेक्शनों का नशे के रूप में इस्तेमाल करने पर व्यक्ति को तुरंत उत्तेजना (यूफोरिया) महसूस होती है। इससे मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है और व्यक्ति आवेग में खतरनाक कदम उठा सकता है। डॉ. तिवारी के अनुसार मॉर्फिन, टरमिन और इसी श्रेणी की अन्य दवाओं का दुरुपयोग बेहद खतरनाक है और बिना चिकित्सकीय सलाह इनके सेवन से गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। पुलिस कर रही जांच एसडीओपी रवी भदौरिया ने बताया कि मेडिकल स्टोर के रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन यह भी पता लगा रहा है कि प्रतिबंधित अथवा नियंत्रित दवाओं का वितरण नियमानुसार किया गया था या नहीं। बाहर से भी इंजेक्शन खरीदने मुरैना आते हैं युक्क जिले में मेफेंटरमाइन इंजेक्शन का इस्तेमाल इलाज से अधिक कथित तौर पर नशे के लिए किया जा रहा है। बिना चिकित्सकीय पर्ची के इसकी बिक्री के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों और युवाओं के अनुसार, पोरसा, अटेर रोड और जिला मुख्यालय सहित कई इलाकों में इसका नेटवर्क सक्रिय है। दावा है कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी नशे के आदी युवक यह इंजेक्शन खरीदने मुरैना पहुंचते हैं। युवाओं का कहना है कि इस लत ने उनकी लाखों रुपए की कमाई और भविष्य दोनों बर्बाद कर दिए।
Source link
सर्वेश राठौर सुसाइड केस में मेडिकल संचालक पर दो FIR:₹135 का इंजेक्शन युवाओं को 300-500 में बेचता था; राजस्थान-उप्र से मुरैना आते हैं खरीदार
