![]()
राजन गोसाईं पंजाब सरकार की ओर से 2 सितंबर से नए हथियार लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाए जाने के बाद अमृतसर में डोप टेस्ट कराने वालों की संख्या करीब 50% घट गई है। पहले सप्ताह में सोमवार, बुधवार और शनिवार को 60 लोग डोप टेस्ट कराते थे। अब यह संख्या घटकर करीब 30 रह गई है। इनमें 80% से ज्यादा टेस्ट पुराने हथियार लाइसेंस के रिन्युअल के लिए हो रहे हैं। मौजूदा करीब 30 टेस्ट में लगभग 22 पुराने लाइसेंस के रिन्युअल से जुड़े हैं, जबकि करीब 8 टेस्ट ऐसे नए आवेदकों के हो रहे हैं, जिन्हें पुलिस जांच में सुरक्षा की वास्तविक जरूरत सामने आई है। यानी नए लाइसेंस के सामान्य आवेदकों का हिस्सा लगभग खत्म हो गया है । सूत्रों के मुताबिक, फिरौती या जान से मारने की धमकी मिलने के आधार पर किसी व्यक्ति का हथियार लाइसेंस अपने आप मंजूर नहीं किया जा रहा। जिला मजिस्ट्रेट की ओर से पुलिस वेरिफिकेशन, खतरे का वास्तविक आकलन और अनिवार्य डोप टेस्ट रिपोर्ट देखने के बाद ही फाइल आगे बढ़ाई जा रही है। सिर्फ सामान्य असुरक्षा की भावना को लाइसेंस का आधार नहीं माना जा रहा। यह प्रक्रिया उस समय और सख्त हुई, जब ईडी ने जुलाई में पुलिस प्रमुख को पत्र भेजकर हथियार लाइसेंस जारी करने में बिचौलियों की भूमिका और कथित धांधली पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद सितंबर में मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने सभी डिप्टी कमिश्नरों को नए हथियार लाइसेंस जारी करने पर रोक के निर्देश दिए। पंजाब में 3.46 लाख लाइसेंसधारक, 4.3 लाख से ज्यादा हथियार : पंजाब में करीब 3.46 लाख सक्रिय हथियार लाइसेंस धारक हैं और इनके नाम पर 4.3 लाख से ज्यादा हथियार पंजीकृत हैं। राज्य की आबादी देश की करीब 2% होने के बावजूद देश के नागरिक लाइसेंसी हथियारों में पंजाब की हिस्सेदारी करीब 10% है। हथियार लाइसेंस की प्रक्रिया में डोप टेस्ट अनिवार्य किए जाने के बाद से पंजाब में करीब 3.65 लाख आवेदकों के टेस्ट हो चुके हैं। इनमें 55,318 आवेदक पॉजिटिव पाए गए। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अमृतसर में डोप टेस्ट में फेल होने वालों की संख्या राज्य में सबसे ज्यादा रही है।
Source link
सितंबर से सामान्य नए लाइसेंस जारी नहीं हो रहे, सिर्फ जिन लोगों को धमकी मिली उन्हीं को मंजूरी
