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‘संबंध बनाओ, 63 जन्म तक रानी बनोगी’:गुरु रेप का आरोपी, शिष्य बोला- मैं शिव; दिल्ली के आश्रम में क्या चल रहा




दिल्ली के विजय विहार में पांच मंजिला एक बिल्डिंग है। इस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय। दीवार पर मनुस्मृति का श्लोक है- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता, यानी जहां नारी की पूजा और सम्मान होता है, वहां देवता वास करते हैं। लेकिन अंदर की कहानी अलग ही है। आश्रम में जबरन लड़कियों को रखने के आरोप लग रहे हैं। आरोप आश्रम शुरू करने वाले वीरेंद्र देव दीक्षित के वकील रहे अमोल कोंकणे पर हैं। अमोल खुद को वीरेंद्र देव का उत्तराधिकारी बताता है। पीड़ित परिवारों का दावा है कि अमोल ने लड़कियों का ब्रेनवॉश किया। वो कहता है कि मेरे अंदर ईश्वर आते हैं। मैं ही शिव हूं। वीरेंद्र देव दीक्षित पर भी दिल्ली के 8 अलग-अलग थानों में रेप और लड़कियों को जबरन बंधक बनाने के केस दर्ज थे। आरोप लगा कि वो महिला अनुयाइयों से कहता था, ‘मैं ही राम हूं, कृष्ण हूं और शिव हूं। तुम मेरी 16 हजार रानियों में से एक हो। जैसे शिवलिंग की पूजा होती है, मेरे लिंग की पूजा करो। तुम्हें जगदंबा बना दूंगा।’ 2017 में मामला हाईकोर्ट पहुंचा। आश्रम में छापेमारी हुई। पता चला कि अंदर लड़कियों को कैद करके रखा जाता था। आश्रम से करीब 200 लड़कियां मिलीं। इनमें 46 नाबालिग थीं। 2023 में वीरेंद्र देव की मौत हो गई। इसके बाद केस बंद हो गया। 2017 से 2026 तक आश्रम के ‘भगवान’ बदल गए, लेकिन एक चीज नहीं बदली- आश्रम पर लगने वाले आरोप। भास्कर ने पीड़ित परिवारों, पुराने मामले से जुड़े लोगों, CBI की चार्जशीट और उपलब्ध वीडियो-चैट्स की पड़ताल की। पढ़िए रिपोर्ट… लोहे की खिड़कियां, बंद दरवाजे, आश्रम में अंदर जाने की इजाजत नहीं
ये आश्रम रिठाला मेट्रो स्टेशन से दो किमी दूर है। हमने अंदर जाने की परमिशन मांगी। जवाब नहीं मिला। बाहर से बिल्डिंग को देखा, तो लगभग हर खिड़की पर लोहे की ग्रिल नजर आई। खिड़कियों के अंदर एक और जाली और उसके पीछे टिन जैसी परत दिखाई दी। दरवाजा थोड़ा खुला, तो सफेद साड़ी में दो महिलाएं दिखाई दीं। नजर पड़ते ही दरवाजा बंद हो गया। करीब आधे घंटे में कई बार दरवाजा खुला-बंद हुआ। गेट और छत से भी हमारे ऊपर नजर रखी जाती रही। आश्रम के ठीक सामने रहने वाली नेहा गाबा बताती हैं, ‘यहां क्या होता है, किसी को नहीं पता। कई बार गाड़ियों में लड़कियों को आते-जाते देखा है। वे मास्क पहने रहती हैं। लोकल होकर भी हमें अंदर नहीं घुसने देते। इतनी लड़कियां रहती हैं, लेकिन उनकी आवाज बाहर नहीं आती। कोई दिखती भी नहीं।’ इसके बाद हम विक्टिम परिवारों तक पहुंचे। परिवार की पहचान उजागर न हो, इसलिए पेरेंट्स के नाम बदले गए हैं। पहला परिवार: जगदंबा बनाने के नाम पर बेटी मांगी; फिर रेप का आरोप दिल्ली के रहने वाले रमेश की दो बेटियां आश्रम जा चुकी हैं। वे बताते हैं, ‘मैं वीरेंद्र देव दीक्षित को भगवान मानता था। पत्नी और बेटियों के साथ उनके पास जाता था। एक दिन बेटी बोली- मैं कुछ दिन आश्रम में रहूंगी। हमने सोचा कि भगवान के सानिध्य में रहेगी। 15 दिन बाद वह वापस आ गई। पूछा क्यों आई, तो कुछ नहीं बताया।’ ‘कुछ समय बाद सुबह 5 बजे वीरेंद्र देव का फोन आया। बोला- बड़ी बेटी गई, अब छोटी बेटी मुझे समर्पित कर दो। उसे जगदंबा बनाना है। मैंने कहा- बालिग होगी, तो भेज दूंगा। वह बोला- बच्चों पर मां-बाप का हक हमेशा रहता है, भले वे बालिग न हों।’ ‘हमने छोटी बेटी को भी भेज दिया। तब से वह वहीं है। बड़ी बेटी कहती थी- इसे आश्रम मत भेजो, वहां माहौल सही नहीं है, लेकिन मैं उसकी बात नहीं समझ सका। फिर एक NGO ने मुझसे संपर्क किया। उनके पास ऐसी लड़कियां थीं, जिन्होंने वीरेंद्र देव पर रेप का आरोप लगाया था। NGO वालों ने मेरी बेटी से बात की। तब उसने बताया कि आश्रम में उसका यौन शोषण हुआ था।’ दूसरा परिवार: पूछा- बेटी बालिग कब हो रही है, 18 की होते ही बुला लिया कोयंबटूर की रहने वाली सुनीता शर्मा आजकल दिल्ली में थाने और कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगा रही हैं। वे सरकारी टीचर हैं। उनकी बेटी 2022 में आश्रम से जुड़ी थी। उसके बाद से सुनीता बेटी को देखने के लिए तरस गईं। वे बताती हैं, ‘बेटी की रुचि ईश्वर में थी। मुझे लगा कुछ सही सीख रही है, इसलिए कभी रोका नहीं। कुछ दिन बाद बेटी आश्रम के लोगों से फोन पर बात करने लगी। पहली बातचीत में ही उससे पूछा गया- मां परेशान तो नहीं करती। आज से हम तुम्हारे गार्जियन हैं। सारी बातें हमसे शेयर करना। उसे बताया गया कि दुनिया खत्म होने वाली है। जो आध्यात्मिक बात मानेंगे, वही सतयुग में जन्म लेंगे। बाकी बर्फ में दबकर मर जाएंगे।’ बेटी ने बताया कि उसकी बात अमोल कोंकणे से होती है। वह कहता है भगवान शिव उसके अंदर हैं। अमोल ने मेरी बेटी से उम्र पूछी। वह तब साढ़े 16 साल की थी। अमोल ने कहा- जल्दी बालिग हो जाओ, फिर मिलते हैं। सुनीता आगे बताती हैं, ‘17 नवंबर को बेटी 18 साल की हुई। अगले दिन उसने फोन किया- मां, मैं दिल्ली जा रही हूं। मैंने किसी तरह उसे रोक लिया। 1 दिसंबर को वह कॉलेज गई। वहां से बताया कि ट्रिप पर जा रही हूं। फिर अकेली दिल्ली चली गई। जाने से पहले आश्रम वालों ने उससे पुलिस स्टेशन के नाम एक लेटर लिखवाया था कि मैं 18 साल की हो गई हूं। अपनी मर्जी से जा रही हूं।’ एडवोकेट बोलीं- आरोपी वकील है, कानून के लूपहोल्स का फायदा उठा रहा सुनीता ने अमोल कोंकणे के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में लड़की को बहला-फुसलाकर फंसाने और घर से भागने के मामले में रिट पिटीशन दायर की है। केस की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट की वकील मणि मुंजाल सुनीता का केस लड़ रही हैं। वे बताती हैं, ‘2024 में हमने पिटीशन दायर की थी। अमोल खुद को आश्रम का उत्तराधिकारी बता रहा है। उसके खिलाफ हमने कोर्ट में सबूत दिए हैं कि कैसे वह बच्चियों का ब्रेनवॉश कर रहा है। छोटी बच्चियों को बुलाने से पहले ही वह लड़कियों से एक लेटर थाने में भिजवा देता है कि वे मर्जी से घर से जा रही हैं और उन्हें रोका न जाए। बच्चियों को इतना ज्ञान कहां है। वह कानून के लूपहोल्स से खेल रहा है।’ लड़कियों से अमोल की आपत्तिजनक चैट पीड़ित परिवारों ने कुछ चैट्स दिखाईं, जिसमें अमोल लड़कियों से आपत्तिजनक बात कर रहा है। तेलंगाना की रहने वाली एक लड़की को उसने मैसेज करके पूछा, ‘मेरे पास कब आओगे। आपकी याद आ रही है।’ ये लड़की उसे भाईजी कहती है। अमोल ने लिखा कि एग्जाम के बाद मिलो। अमोल लड़की से एक और चैट में कहता है, ‘मैंने कपड़े नहीं पहने हैं। मुझे ठंड लग रही है।’ ऐसे कई वीडियो हैं, जिसमें अमोल लड़कियों के सामने बैठकर गाने गा रहा है। ऐसी कॉल रिकॉर्डिंग भी हैं, जिसमें वो लड़कियों को अध्यात्म के नाम पर काल्पनिक कहानियां सुनाता है। लड़कियों से 3 वादे 1. आश्रम में आपको अच्छे पार्टनर मिलेंगे।
2. बाबा से संबंध बन गया तो 63 जन्मों तक अलग-अलग राजपरिवार में जन्म लेकर रानी बनोगी।
3. जो लड़कियां बाबा के लिए समर्पित हो गईं, उनका बाबा से जोड़ी या पत्नी जैसा संबंध बन जाता है। अमोल के गुरु वीरेंद्र देव पर 8 FIR, एक NGO ने किया एक्सपोज दिल्ली में रहने वालीं सीमा शर्मा फाउंडेशन फॉर सोशल एम्पावरमेंट नाम से NGO चलाती हैं। 2017 में हरियाणा का एक परिवार उनसे मिला। उनकी बेटी गायब थी। परिवार को पता चला कि वह रोहिणी के आश्रम में है। सीमा आश्रम गईं, तो उन्हें बेटी से नहीं मिलने दिया गया। सीमा कहती हैं, ‘मुझे कई ऐसे परिवार मिले, जिनकी बेटियां आश्रम में कैद थीं। कुछ के साथ रेप हुआ था। एक बेटी ने आत्महत्या कर ली थी। हम पुलिस के पास गए। 8 FIR दर्ज कराईं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद हमने जनहित याचिका दायर की। हमने केस CBI को देने की मांग की। पहली ही सुनवाई में कोर्ट ने केस CBI को सौंप दिया।’ ‘19 से 22 दिसंबर 2017 के बीच हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई हुई। आश्रम की जांच के लिए कमेटी बनाई गई। 21 दिसंबर को कोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए। इसके बाद एक टीम आश्रम पहुंची। टीम ने लड़कियों को जानवरों की तरह रखे जाने की बात कही।’ ‘कोर्ट ने इंस्पेक्शन टीम बनाकर आश्रम में छापेमारी कराई। यूपी के कानपुर, गोरखपुर, फर्रुखाबाद, लखनऊ, पंजाब के मनसा, दिल्ली में द्वारका, पालम और उत्तम नगर के सेंटर में भी छापे मारे गए। टीम में तब दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रहीं स्वाति मालीवाल भी थीं। उन्होंने बताया कि अंदर लोहे के दरवाजे और ताले लगे थे। लड़कियों का कोई रिकॉर्ड नहीं था। वहां आपत्तिजनक पत्र, दवाइयां, इंजेक्शन और इस्तेमाल की हुई सुइयां मिलीं। मालीवाल के मुताबिक, अंदर मिली कई लड़कियां बोलने की हालत में नहीं थीं।’ पुलिस अधिकारी बोले- कुछ बता नहीं सकते, कोर्ट में रिपोर्ट देंगे CBI ने वीरेंद्र देव पर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद उसका पता नहीं चला। CBI ने कोर्ट को बताया कि उसकी मौत हो चुकी है। सितंबर 2025 में CBI ने कोर्ट में कार्रवाई खत्म करने की मांग की। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय विहार पुलिस को आश्रम के कामकाज की दोबारा जांच कर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। थाने के इंस्पेक्टर मनोहर लाल का कहना है कि स्टेटस रिपोर्ट समय से कोर्ट में देंगे। इस पर बात नहीं कर सकते। अमोल कोंकणे पर लगे आरोपों पर आश्रम का पक्ष जानने के लिए भास्कर टीम आश्रम पहुंची। अमोल कोंकणे से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन नंबर स्विच ऑफ था। उनका पक्ष मिलने पर खबर में शामिल किया जाएगा।



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