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सीवान के मौनिया बाबा मेले में प्रशासन-सांसद में मतभेद:डीजे-ऑर्केस्ट्रा पर विवाद, सांसद के स्कॉट में तोड़फोड़, कार्यक्रम के 15 मिनट बाद निकले डीएम-एसपी




सीवान के महाराजगंज में 103 वर्षों से लग रहे मौनिया बाबा मेले को वर्ष 2024 में राजकीय मेले का दर्जा मिलने के बाद सरकार के निर्धारित प्रावधानों के तहत आयोजन किया जा रहा है। मेले के समापन के बाद राजकीय महोत्सव के तहत सांस्कृतिक संध्या और विभिन्न विभागों की योजनाओं से जुड़े स्टॉल लगाए जाते हैं। इस वर्ष भी रविवार को डीएवी पब्लिक स्कूल परिसर में सांस्कृतिक संध्या हुई, जहां प्रसिद्ध लोक गायकों और स्थानीय कलाकारों ने प्रस्तुति दी। आईसीडीएस, जीविका, कृषि, स्वास्थ्य समेत कई विभागों के स्टॉल भी लगाए गए। डीजे-ऑर्केस्ट्रा को लेकर प्रशासन और सांसद में दिखा मतभेद पूरे मेले के दौरान जिला प्रशासन और स्थानीय सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल के बीच समन्वय की कमी दिखाई दी। जिला प्रशासन ने महावीरी जुलूसों के दौरान डीजे और ऑर्केस्ट्रा पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद सांसद सिग्रीवाल ने ऑर्केस्ट्रा को मेले की परंपरा और सांस्कृतिक कार्यक्रम बताते हुए अखाड़ा समितियों को प्रशासन से अनुमति दिलाने का भरोसा दिया था। सांसद के बयानों के बाद कई अखाड़ों में ऑर्केस्ट्रा और अश्लील गानों के मामले सामने आए। इसी दौरान जुलूस में शामिल युवकों ने पुलिस की गाड़ी समझकर सांसद के स्कॉट वाहन में तोड़फोड़ कर दी। मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई। सात बजे का कार्यक्रम, छह बजे ही हुआ उद्घाटन इसी विवाद की पृष्ठभूमि में रविवार की सांस्कृतिक संध्या में भी प्रशासनिक मौजूदगी महज औपचारिक नजर आई। निमंत्रण कार्ड और प्रशासनिक सूचना के मुताबिक कार्यक्रम का शुभारंभ शाम सात बजे होना था, लेकिन सांसद, विधायक हेम नारायण साह, डीएम विजय प्रकाश मीणा और एसपी भारत सोनी समेत जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने करीब छह बजे ही दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन कर दिया। इसके बाद विभागीय स्टॉलों का भी उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम शुरू होने के 15 मिनट बाद निकल गए डीएम-एसपी सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कार्यक्रम का निर्धारित समय शाम सात बजे था, लेकिन डीएम विजय प्रकाश मीणा और एसपी भारत सोनी कार्यक्रम शुरू होने के करीब 15 मिनट के भीतर ही वहां से रवाना हो गए। कार्यक्रम स्थल पर उनके लिए आरक्षित सीटों पर लगाए गए नेम प्लेट भी बाद में हटा दिए गए और वहां अन्य अधिकारियों ने जगह ले ली। जिस राजकीय महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी अपेक्षित थी, वहां दोनों अधिकारी कार्यक्रम के मुख्य दौर में मौजूद नहीं रहे। देर रात तक चला कार्यक्रम, अधिकारियों का हुआ सम्मान सांस्कृतिक कार्यक्रम देर रात तक चलते रहे। सांसद, विधायक और मौजूद अधिकारियों ने कलाकारों को सम्मानित किया। इसी दौरान एसडीओ अनीता सिन्हा और एसडीपीओ अमन को भी मंच से सम्मानित किया गया। ये वही स्थानीय अधिकारी थे, जिनके जिम्मे मेले के दौरान प्रशासनिक आदेशों और कानून-व्यवस्था का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी थी। मेले की व्यवस्था पर उठे सवाल राजकीय महोत्सव के मंच पर अधिकारियों का सम्मान और महावीरी जुलूस में प्रशासनिक आदेशों के पालन को लेकर उठा विवाद, महाराजगंज मेले की व्यवस्था पर सवाल छोड़ गया है। एक तरफ सरकार के नियम और प्रशासनिक आदेश थे, दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर उनके अनुपालन को लेकर सामने आई तस्वीरें। दोनों के बीच का अंतर पूरे आयोजन में साफ दिखाई दिया।



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