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सुखना लेक के कैचमेंट एरिया में नए निर्माण को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। मामले में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से एफिडेविट दाखिल कर कैचमेंट एरिया में की गई कार्रवाई की जानकारी कोर्ट को दी गई। प्रशासन ने बताया कि कैचमेंट एरिया में नियमों के उल्लंघन को लेकर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है और हाल में भी नए निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्रशासन की ओर से उन लोगों की डिटेल भी हाईकोर्ट में बंद लिफाफे में दाखिल की गई, जिन्होंने कैचमेंट एरिया में नए निर्माण किए हैं। इससे पहले हाईकोर्ट ने कैचमेंट एरिया में रोक के बावजूद हो रहे निर्माण को लेकर प्रशासन से जवाब मांगा था और निर्माण करने वालों की पहचान सामने रखने के निर्देश दिए थे। नए निर्माण पर रोक, इसलिए बिजली कनेक्शन की अनुमति नहीं सुनवाई के दौरान पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की ओर से भी एक एप्लीकेशन दाखिल की गई। इसमें कांसल इलाके में कुछ बिजली कनेक्शन देने की अनुमति हाईकोर्ट से मांगी गई थी। हाईकोर्ट ने इस मांग को अनुमति देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुखना कैचमेंट एरिया में नए निर्माण पर रोक है। ऐसे में इस इलाके में नए निर्माण को किसी तरह की सुविधा देने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट के रुख से साफ है कि कैचमेंट एरिया में निर्माण संबंधी प्रतिबंधों को लेकर हाईकोर्ट फिलहाल किसी तरह की ढील देने के पक्ष में नहीं है। बिजली कनेक्शन का मामला भी इसी प्रतिबंध के दायरे में देखा गया है। प्रशासन ने बताया- समय-समय पर हो रही कार्रवाई चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने एफिडेविट में कहा है कि कैचमेंट एरिया में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है। हाल में भी प्रशासन की टीमों ने ऐसे निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें खेती योग्य जमीन पर फार्म हाउस आदि बनाने के लिए किए गए निर्माण और बाउंड्री वॉल जैसी गतिविधियां शामिल रही हैं। हाईकोर्ट पहले भी इस बात पर नाराजगी जता चुका है कि रोक के बावजूद कैचमेंट एरिया में नए निर्माण कैसे जारी रहे। कोर्ट ने अधिकारियों से निर्माण करने वालों की पहचान और कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। सुखना के लिए महत्वपूर्ण है कैचमेंट एरिया सुखना लेक का कैचमेंट एरिया इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि बारिश के दौरान इसी क्षेत्र से पानी बहकर लेक तक पहुंचता है। कैचमेंट में निर्माण और जमीन की प्राकृतिक स्थिति में बदलाव होने से पानी के बहाव पर असर पड़ सकता है। इससे भविष्य में सुखना लेक के जलस्तर और उसके इकोसिस्टम पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। 28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई मामले की सुनवाई के दौरान प्रशासन का एफिडेविट रिकॉर्ड पर लिया गया, जबकि कांसल में बिजली कनेक्शन देने की PSPCL की मांग को हाईकोर्ट ने अनुमति नहीं दी। अब इस मामले में अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
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सुखना कैचमेंट मामले में हाईकोर्ट की सख्ती:चंडीगढ़ प्रशासन ने दाखिल किया एफिडेविट,कैचमेंट में बिजली कनेक्शन देने की पंजाब की मांग खारिज
