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खगड़िया के अलौली प्रखंड की गोरियामी पंचायत के संझौती गांव में सर्पदंश से 45 वर्षीय राजी देवी की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मृतका गांव निवासी लालो यादव की पत्नी थीं। इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने देवघाट के पास अलौली-खगड़िया मुख्य सड़क को करीब दो घंटे तक जाम कर दिया। सड़क जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। इलाज में लापरवाही का आरोप परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि सर्पदंश के बाद राजी देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अलौली ले जाया गया, लेकिन उन्हें समय पर उचित उपचार नहीं मिला। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें खगड़िया सदर अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनकी मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर समुचित इलाज मिलता तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। डॉक्टर की ड्यूटी पर भी सवाल महिला की मौत के बाद सीएचसी अलौली की स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की ड्यूटी पर सवाल उठ रहे हैं। जिला परिषद सदस्य रजनीकांत कुमार ने आरोप लगाया कि ड्यूटी रोस्टर में डॉक्टर की तैनाती होने के बावजूद घटना के समय संबंधित चिकित्सक अस्पताल में मौजूद नहीं थे। रोस्टर और सीसीटीवी जांच की मांग रजनीकांत कुमार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक या हाजिरी रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज, एंटी-स्नेक वेनम (ASV) के स्टॉक और मरीज के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि डॉक्टर की गैरमौजूदगी या चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होनी चाहिए। ‘ड्यूटी सिर्फ कागज पर नहीं होनी चाहिए’ जिप सदस्य ने कहा कि अस्पताल का ड्यूटी रोस्टर केवल कागजों पर बनाने के लिए नहीं होता। जिस चिकित्सक की जिस समय ड्यूटी निर्धारित है, उसका उस समय अस्पताल में मौजूद रहना जरूरी है। उन्होंने प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी और जिला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। दो महीने में दूसरी घटना का दावा रजनीकांत कुमार ने दावा किया कि दो महीने के भीतर इस तरह की दो घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा की मांग की। उनका आरोप है कि सरकारी अस्पतालों की कमजोर व्यवस्था का सबसे ज्यादा असर गरीब मरीजों पर पड़ता है। चिकित्सा पदाधिकारी ने लापरवाही से किया इनकार इधर, प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी मनीष कुमार ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप से इनकार किया। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के मरीज का इलाज उसकी स्थिति और लक्षणों के आधार पर किया जाता है। जहर के प्रभाव के लक्षण मिलने पर चिकित्सकीय प्रक्रिया के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम दिया जाता है। बिना लक्षण के प्रत्येक मरीज को एंटी-स्नेक वेनम देना उचित नहीं है। गंभीर हालत में सदर अस्पताल किया गया रेफर चिकित्सा पदाधिकारी के अनुसार, राजी देवी को सीएचसी अलौली लाए जाने के बाद उनकी स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए खगड़िया सदर अस्पताल रेफर किया गया था। उन्होंने कहा कि गंभीर स्थिति में एंटी-स्नेक वेनम दिए जाने के बावजूद हर मरीज की जान बचाना संभव नहीं होता। मुआवजे के आश्वासन पर खत्म हुआ जाम सड़क जाम की सूचना पर अलौली थाना प्रभारी कृष्ण कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अंचलाधिकारी हिमांशु कुमार भी घटनास्थल पर पहुंचे और परिजनों व ग्रामीणों से बातचीत की। अधिकारियों ने आवेदन लेकर मामले में एफआईआर और जांच में दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया। अंचलाधिकारी ने नियमानुसार एक सप्ताह के भीतर मुआवजा दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद जिप सदस्य रजनीकांत कुमार ने भी ग्रामीणों को समझाया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद जाम समाप्त हुआ और परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने पर सहमत हुए। करीब दो घंटे बाद सड़क पर यातायात सामान्य हो सका। अस्पतालों में पर्याप्त ASV की मांग घटना के बाद संझौती गांव में मातम पसरा है। ग्रामीणों ने सर्पदंश के मामलों को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त एंटी-स्नेक वेनम, प्रशिक्षित चिकित्सकों और तत्काल उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही इस मामले में लगाए गए लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
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स्नेक बाइट से महिला की मौत, 2 घंटे सड़क जाम:अलौली में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, डॉक्टर की ड्यूटी से गैरहाजिरी की जांच की मांग
