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स्मार्ट मीटर से मीटर रीडरों पर रोजगार का संकट:बेमेतरा में कलेक्टर को ज्ञापन, बोले- अनुभव के आधार पर दूसरे काम में करें समायोजित




बेमेतरा जिले में स्मार्ट मीटर, प्रीपेड मीटर और ऑटो पंचिंग जैसी नई तकनीक लागू होने के साथ ही वर्षों से मीटर रीडिंग का काम कर रहे कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। बुधवार को बेमेतरा विद्युत मीटर रीडर श्रमिक संघ के सदस्य कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और नौकरी बचाने की मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संघ के अनुसार, बेमेतरा जिले में करीब 200 मीटर रीडर काम कर रहे हैं। इनमें कई कर्मचारी पिछले 15 से 20 वर्षों से मीटर रीडिंग, बिलिंग और फील्ड से जुड़े काम संभाल रहे हैं। जिले में करीब 200 मीटर रीडर मीटर रीडरों का कहना है कि स्मार्ट और प्रीपेड मीटर आने के बाद पारंपरिक तरीके से मीटर रीडिंग की जरूरत कम हो जाएगी। ऐसे में लंबे समय से विभाग से जुड़े कर्मचारियों को काम से हटाने के बजाय उनके अनुभव और योग्यता का दूसरे कार्यों में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। KYC से लेकर शिकायत निवारण तक काम देने की मांग संघ ने मांग की है कि मीटर रीडरों को KYC, स्मार्ट मीटर से जुड़े फील्ड कार्य, मीटर जांच, उपभोक्ता सर्वे, डाटा सत्यापन, कनेक्शन की जांच और उपभोक्ताओं की शिकायतों के निराकरण जैसे कामों में लगाया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से फील्ड में काम कर रहे हैं और बिजली उपभोक्ताओं, कनेक्शन, मीटर तथा स्थानीय क्षेत्रों की अच्छी जानकारी रखते हैं। इस अनुभव का उपयोग नई व्यवस्था में भी किया जा सकता है। प्रदेश में करीब 5 हजार रीडरों पर असर की आशंका संघ के मनोज ने बताया कि नई व्यवस्था का असर प्रदेश में करीब 5 हजार मीटर रीडरों पर पड़ सकता है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की है, जिनकी उम्र 40 से 50 वर्ष के बीच है और वे लंबे समय से इसी काम पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि अचानक रोजगार खत्म होने से कर्मचारियों के परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए तकनीक में बदलाव जरूरी है, लेकिन उसके साथ वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। बोले- तकनीक बदले, रोजगार नहीं मीटर रीडरों ने कहा कि वे नई तकनीक के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि तकनीकी बदलाव के कारण वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को बेरोजगार न किया जाए। विभाग उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर दूसरे कार्यों में समायोजित करे, ताकि नई व्यवस्था का लाभ भी मिले और कर्मचारियों की आजीविका भी बनी रहे।



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