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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अभिषेक मिश्र की सेवा समाप्ति और उनके पद पर जारी किए गए नए भर्ती विज्ञापन के मामले में अहम फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथमदृष्टया नियमित प्रकृति के पद पर तैनात कर्मचारी को केवल तीन महीने का नोटिस देकर सेवा से हटाया नहीं जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने 27 जुलाई 2026 के भर्ती विज्ञापन के तहत होने वाले चयन पर भी रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने अभिषेक मिश्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची अभिषेक मिश्र ने नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय द्वारा 18 जुलाई 2026 को बर्खास्तगी आदेश (जिसमें तीन माह का नोटिस देकर सेवा समाप्त कर दी गई थी) और उसके बाद 27 जुलाई 2026 को असिस्टेंट प्रोफेसर (पत्रकारिता एवं जनसंचार) पद के लिए निकाले गए नए भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी थी। कोर्ट ने पेश हुई दलीलें याची के अधिवक्ताओं अमित कुमार उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि याची की नियुक्ति चयन समिति की सिफारिश और निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई थी, जिसे 31 अक्टूबर 2020 को कुलपति द्वारा नियमित आधार पर मंजूरी दी गई थी। याची यूजीसी एक्ट और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप आठ प्रतिशत ब्याज सहित नियमित वेतन की मांग कर रहा था।
इसी दुर्भावना के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसे बर्खास्त कर दिया। विश्वविद्यालय की अधिवक्ता ने दलील दी कि संस्थान में स्थायी कर्मचारी को तीन माह और अस्थायी कर्मचारी को एक माह का नोटिस देकर हटाना सामान्य नियम है। हालांकि वह इस संबंध में कोई अधिकृत नियम या विनियम प्रस्तुत नहीं कर सकीं और दस्तावेज पेश करने के लिए समय मांगा। कोई चयन प्रक्रिया न की जाए कोर्ट ने कहा कि नियमित नियुक्ति होने के बाद केवल तीन महीने का नोटिस देकर इस प्रकार बर्खास्त करना न्यायोचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने मामले में सभी विपक्षियों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा और उसके बाद याची को प्रत्युत्तर हलफनामे के लिए दो सप्ताह का समय दिया।
साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक 27 जुलाई 2026 के विज्ञापन के क्रम में कोई चयन प्रक्रिया न की जाए। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि शिक्षक की अनुपस्थिति से कक्षाएं नहीं चल पा रही हैं और छात्रों का नुकसान हो रहा है। इस पर याची ने कर्तव्य पालन के लिए तत्परता जताई। दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि शिक्षक 28 सितंबर को सुबह 10 बजे कुलसचिव के समक्ष उपस्थित होकर अपनी ज्वाइनिंग देंगे। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि कामकाज में बाधा डाली गई या याची उपस्थित नहीं हुआ तो नियमानुसार परिणाम भुगतने होंगे।
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हाईकोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर की बर्खास्तगी पर रोक लगाई:नई भर्ती प्रक्रिया भी स्थगित, शिक्षक को दोबारा ज्वाइनिंग की अनुमति
