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राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्ट परिसर की सुरक्षा और गरिमा बनाए रखने के लिए एडवोकेट क्लर्कों और लॉ इंटर्न के प्रवेश, पहचान और आचरण संबंधी नियमों को सख्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बिना रजिस्ट्रेशन या वैध अस्थायी पहचान-पत्र के किसी भी व्यक्ति को एडवोकेट क्लर्क के रूप में कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जस्टिस रवि चिरानिया ने निर्देश दिए कि वर्तमान में कार्यरत सभी पात्र अपंजीकृत एडवोकेट क्लर्क 10 दिन में आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करें। रजिस्ट्रार प्रशासन को रजिस्ट्रार न्यायिक के समन्वय से 45 दिन में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास करना होगा। आवेदकों का पुलिस सत्यापन भी अनिवार्य किया गया है। 330 से अधिक लोग क्लर्क के रूप में कर रहे काम कोर्ट को बताया गया कि जोधपुर में लगभग 163 एडवोकेट क्लर्क पंजीकृत हैं, जबकि 330 से अधिक लोग क्लर्क के रूप में काम कर रहे हैं। वर्ष 2019 के बाद कोई नया रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ था। कोर्ट ने चेतावनी दी कि बिना वैध आईडी के काम करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। नए नियमों के तहत, स्थायी पहचान-पत्र में क्यूआर कोड होगा। क्लर्कों के लिए निर्धारित वर्दी पहनना अनिवार्य होगा। कोर्ट रूम में ईयरफोन का उपयोग, मोबाइल का अनुचित इस्तेमाल और अनुशासनहीन व्यवहार पर भी रोक रहेगी। लॉ इंटर्न के लिए भी निर्धारित ड्रेस कोड, कॉलेज आईडी और हाईकोर्ट पास अनिवार्य किया गया है। इस आदेश की अनुपालना पर अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
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हाईकोर्ट ने क्लर्कों के लिए नियम सख्त किए:10 दिन में रजिस्ट्रेशन के निर्देश; बिना वैध आईडी काम नहीं
