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हिमाचल खिलाड़ियों के दिए पुरस्कार से नीति पर विवाद:कबड्‌डी टीम के 4 बेटियों के मात्र 33.33 लाख, कप्तान पुष्पा राणा ने उठाए सवाल




एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की हिमाचल प्रदेश की चार खिलाड़ियों कप्तान पुष्पा राणा, रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर के पुरस्कार की घोषणा के बाद प्रदेश में विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार द्वारा घोषित पुरस्कार राशि पर खिलाड़ियों ने असंतोष जताते हुए इसे उपलब्धि के अनुरूप सम्मान न मिलने का मुद्दा बताया है। हिमाचल प्रदेश की खेल पुरस्कार नीति के तहत एशियन गेम्स में ‘व्यक्तिगत’ स्वर्ण पदक विजेता को 4 करोड़ रुपये देने का प्रावधान है। वहीं, 12 सदस्यीय कबड्डी टीम में शामिल हिमाचल की चारों खिलाड़ियों के लिए सरकार ने 33.33-33.33 लाख रुपये देने का ऐलान किया है, जो कुल मिलाकर लगभग 1.33 करोड़ रुपये बनता है। सरकार का कहना है कि यह राशि टीम स्पर्धा के नियमों के तहत 12 खिलाड़ियों में बांटी गई है। इस पर टीम की कप्तान पुष्पा राणा ने तीखा सवाल उठाया है। उनका कहना है कि “टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक सभी खिलाड़ियों की सामूहिक मेहनत से ही आता है। हर खिलाड़ी ने देश को स्वर्ण दिलाने में बराबर का योगदान दिया है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका सवाल केवल पैसे का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं के सम्मान का है। क्रिकेट से तुलना और हरियाणा का उदाहरण
खिलाड़ियों ने पुरस्कार नीति में असमानता को लेकर पड़ोसी राज्यों और अन्य खेलों का उदाहरण सामने रखा है।वर्ष 2025 में महिला क्रिकेट विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम की हिमाचली खिलाड़ी रेणुका सिंह ठाकुर को प्रदेश सरकार द्वारा 1 करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हरियाणा में 3-3 करोड़ का पुरस्कार: पड़ोसी राज्य हरियाणा में 2023 एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेताओं को 3-3 करोड़ रुपये नकद दिए गए थे। वहीं 2026 एशियन गेम्स को लेकर भी हरियाणा के मंत्री व कबड्डी एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण लाल पंवार ने स्वर्ण पदक विजेता कबड्डी खिलाड़ियों को 3-3 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है। सम्मान के साथ भविष्य की सुरक्षा और सरकारी नौकरी की मांग
पुरस्कार राशि के अलावा, एशियन गेम्स में देश को गौरवान्वित करने वाली पुष्पा राणा और उनकी साथी खिलाड़ियों ने सरकारी नौकरी की भी मांग रखी है। खिलाड़ियों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन का सबसे मूल्यवान समय देश के खेल को समर्पित किया है, इसलिए खेल के बाद उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए स्थायी रोजगार मिलना बेहद आवश्यक है।



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