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हिमाचल विधानसभा में फिर गूंजेगा आउटसोर्स भर्ती मामला:डिजिटल मीटर से जनता की परेशानी पर चर्चा, बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरेगा विपक्ष




हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें दिन आज फिर सदन में आउटसोर्स भर्ती का मामला गूंजेगा। करसोग से बीजेपी विधायक दीपराज ने आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और उनके मानदेय में बढ़ोतरी से जुड़ा सवाल लगाया है। इसी मुद्दे पर मंगलवार को भी सदन में तीखी नोकझोंक हुई थी, जिसके बाद विपक्ष ने वॉकआउट किया था। सदन में सीबीएसई स्कूलों के लिए चयनित टीचरों की नियुक्ति का मामला भी उठेगा। बीजेपी विधायक सुधीर शर्मा, राकेश जम्वाल, विपिन सिंह परमार, रणधीर शर्मा, डॉ. जनकराज ने सीबीएसई स्कूलों में रिक्त पदों, स्वीकृत पदों के साथ साथ स्कूलों के विलय का भी प्रश्न पूछ रखा है। इस प्रश्न पर सदन में हंगामा हो सकता है, क्योंकि राज्य सरकार सभी चयनित शिक्षकों को सीबीएसई स्कूलों में तीन माह से अधिक समय बाद भी तैनाती नहीं दे पाई है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा सदन में आज 45 तारांकित और 22 अतारांकित प्रश्नों के भी सरकार द्वारा जवाब दिए जाएंगे। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस सरकार की गारंटियों को लेकर विधानसभा परिसर में धरना दे सकती है। डिजिटल मीटर से हो रही परेशानी का मामला सदन में गूंजेगा प्रश्नकाल के बाद राज्य में लग रहे डिजिटल मीटर का मामला भी सदन में गूंजेगा। कांग्रेस विधायक राम कुमार ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाकर इस मुद्दे पर चर्चा का नोटिस दे रखा है। इस दौरान विधायक द्वारा डिजिटल मीटर से जनता को हो रही परेशानी सदन में रखी जाएगी। वहीं बीजेपी विधायक राकेश जम्वाल भी स्लापड़-ततापानी सड़क बंद होने से जनता को हो रही परेशानी का मामला सदन में रखेंगे। विपक्ष के चार विधायकों ने बेरोजगारी पर मांगी चर्चा इसके बाद बेरोजागरी के मुद्दे पर चर्चा जारी रहेगी। बीजेपी विधायक सुधीर शर्मा, रणधीर शर्मा, राकेश जम्वाल और हंसराज ने बेरोजगारी व कांग्रेस की रोजगार की गारंटी पर सदन में चर्चा मांग रखी है। पहले इस मुद्दे पर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाया था। स्पीकर ने इसे स्वीकार नहीं किया और नियम 130 के तहत चर्चा की इजाजत दी है। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी विधायक सत्तारूढ़ कांग्रेस को हर साल एक लाख नौकरी देने के मामले में घेरेगी। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में पहली ही कैबिनेट में पांच लाख नौकरी का वादा किया था। बीजेपी का आरोप है कि पौने चार साल में चंद हजार लोगों को ही नौकरी मिल पाई है।



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