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साइबर थाने में एक ही दिन दर्ज हुए 3 FIR:हरदोई में 2.60 लाख की धोखाधड़ी, सोफा कारोबारी सहित दो लोग शिकार




हरदोई जिले में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आम लोगों के साथ व्यापारी भी साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। पुलिस और बैंक स्तर पर सुनवाई नहीं होने पर कई पीड़ितों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है। इसी क्रम में साइबर थाने में मंगलवार देर शाम एक ही दिन में साइबर धोखाधड़ी के तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें एक मामला रात 8:51 बजे दर्ज हुआ। पहला मामला सांडी थाना क्षेत्र के काजीटोला निवासी मोहम्मद शकील अहमद का है। वह ‘जैद एंटरप्राइजेज’ नाम से सोफा कारखाना चलाते हैं। शकील ने फेसबुक पर जयपुर की ‘विनायक इंडस्ट्रीज’ का विज्ञापन देखा था। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय शर्मा ने उन्हें 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 700 किलोग्राम सोफा पन्नी देने का सौदा किया। शकील ने 12 से 16 मार्च 2026 के बीच यूपीआई के जरिए 63 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद उन्हें न तो सामान मिला और न ही रकम वापस की गई। पीड़ित ने मामले को लेकर एसीजेएम तृतीय की अदालत में याचिका दाखिल की। कोर्ट के आदेश के बाद साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मोबाइल हैक कर खाते से निकाले 98 हजार दूसरा मामला हरियावां थाना क्षेत्र के मदरावां निवासी ऋषभ शुक्ला से जुड़ा है। आरोप है कि 18 मई 2026 को उनका मोबाइल हैक कर लिया गया। उसी दिन दोपहर 1:19 बजे उनके बैंक ऑफ इंडिया खाते से धोखाधड़ी कर 98 हजार रुपये निकाल लिए गए। जांच में सामने आया कि रकम दिलदेर हुसैन नाम की गूगल आईडी से जुड़े बैंक खाते में भेजी गई थी। पीड़ित की याचिका पर एसीजेएम तृतीय के आदेश के बाद साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। PhonePe हैक कर निकाले 98,999 रुपये, पूरी रकम फ्रीज तीसरा मामला बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र के गुरौली गांव निवासी हरीबाबू द्विवेदी का है। 13 मई 2026 की रात अज्ञात हैकर्स ने उनका PhonePe अकाउंट हैक कर लिया। इसके बाद तीन किस्तों में उनके खाते से कुल 98,999 रुपये निकाल लिए गए। रकम कटने की जानकारी मिलते ही हरीबाबू ने तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल की। हेल्पलाइन की त्वरित कार्रवाई से ठगी की पूरी रकम समय रहते फ्रीज करा दी गई। इससे पीड़ित को बड़ी राहत मिली। साइबर थाने की पुलिस तीनों मामलों की जांच कर रही है। पुलिस ठगी में इस्तेमाल खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।



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