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हिसार में 25 करोड़ का पेयजल प्रोजेक्ट फेल:6 गांवों में पानी का संकट गहराया, ग्रामीणों ने जलघर पर ताला लगाया




हिसार के बरवाला ब्रांच नहर के टेल एरिया में स्थित गांवों को पीने के पानी की गंभीर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। 25 करोड़ रुपए की लागत से बना जनस्वास्थ्य विभाग का पंप हाउस प्रोजेक्ट इन गांवों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। रविवार को किरतान गांव के ग्रामीणों ने पानी की समस्या से परेशान होकर जलघर पर ताला लगा दिया और प्रदर्शन किया। यह प्रोजेक्ट टेल एरिया के 6 गांवों- किरतान, बुड़ाक, बालसमंद, गोरछी, सरसाना और बासडा को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया था। चौधरी माइनर पर सीसवाला हेड पर एक पंप हाउस स्थापित किया गया और 35 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर इसे इन 7 जलघरों से जोड़ा गया था। इसका उद्देश्य नहर में पानी कम होने पर भी इन गांवों तक पेयजल पहुंचाना था। किसी भी गांव को नहीं मिला प्रोजेक्ट का लाभ 3 साल पहले इस पंप हाउस को चालू कर दिया गया था, जिससे ग्रामीणों को पानी की किल्लत दूर होने की उम्मीद थी। हालांकि, आज तक इस प्रोजेक्ट का लाभ किसी भी गांव को पूरी तरह नहीं मिल पाया है। विभाग कभी नहर में पानी की कमी, कभी बिजली कटौती तो कभी अन्य समस्याओं का हवाला देकर टालमटोल करता रहा है। इन 6 गांवों को अभी भी पुरानी पाइपलाइन के माध्यम से ही थोड़ा-बहुत पानी मिल रहा है। टैंक में अब तक केवल 3 फीट पानी ही जमा हुआ किरतान गांव के लोगों ने बताया कि नहर में 3 दिन से पानी चल रहा है और यह केवल 4 दिन और चलेगा, लेकिन उनके गांव के टैंक में अब तक केवल 3 फीट पानी ही जमा हो पाया है। पिछले 15 दिनों से गांव में पानी की आपूर्ति नहीं की गई है। ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद विभाग ने पंप हाउस की मोटर चालू करवाई है। पानी की कमी के कारण ग्रामीणों को एक हजार रुपये प्रति टैंकर के हिसाब से पानी खरीदना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बीते साल नलवा हलके के विधायक रणधीर पणिहार को भी इस समस्या से अवगत कराया था, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हो पाया है। हेड पर अभी पानी नहीं, हांसी वाले इसी नहर से मांग रहे पानी मामले में एरिया के किसान नेता सुरेन्द्र आर्य ने बताया कि विभाग वालों का कहना है कि सीसवाला हेड पर पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण मोटर नहीं चल सकी थी। अगर इस नहर में से हांसी और जींद को पानी देने से पहले ही यहां पीने का पानी नहीं पहुंच रहा है तो इन शहरों को पानी देने का बाद हालात और ज्यादा बदतर होंगे। प्रोजेक्ट की विफलता के कारण अवैध लाइनों से सप्लाई होता है पानी वहीं गोरछी गांव निवासी अनिल ने बताया कि उनके गांव तक इस पंप हाउस से लाइन दबाई गई है, लेकिन आजतक इस लाइन से टैंक नहीं भरे हैं। ये लाइन चालू होने के बाद पुरानी लाइन का कनेक्शन नहर से हटाना था, लेकिन इस प्रोजेक्ट के फेल होने के कारण अभी तक पुरानी लाइन से काम चल रहा है।



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