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हैबोवाल ई-बस डिपो का 70% काम पूरा:एक महीने में पूरा होगा निर्माण, 100 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की तैयारी, घोड़ा रोड डिपो का काम जारी




लुधियाना में प्रदूषण कम करने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 100 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए नगर निगम की ओर से हैबोवाल और घोड़ा रोड में दो ई-बस डिपो तैयार किए जा रहे हैं। हैबोवाल डिपो का करीब 70% काम पूरा हो चुका है और निगम अधिकारियों का दावा है कि इसका निर्माण एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। नगर निगम ने हैबोवाल में ई-बस डिपो का निर्माण करीब तीन महीने पहले शुरू किया था। इतनी कम अवधि में निर्माण कार्य का बड़ा हिस्सा पूरा होने के बाद अब डिपो में फिनिशिंग का काम चल रहा है। 30 बसों के लिए बन चुका शेड नगर निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर श्याम लाल गुप्ता के मुताबिक, डिपो में इलेक्ट्रिक बसों की चार्जिंग के लिए जरूरी पावर सब-स्टेशन, 30 बसों के लिए बस शेड, मेंटेनेंस वर्कशॉप और दो मंजिला प्रशासनिक भवन का निर्माण पूरा हो चुका है। फिलहाल फर्श तैयार करने का काम चल रहा है। इसके बाद बाकी फिनिशिंग वर्क पूरा किया जाएगा। घोड़ा रोड डिपो के लिए जमीन का पेच दूसरी ओर घोड़ा रोड में प्रस्तावित ई-बस डिपो का काम अभी शुरुआती चरण में है। निगम अधिकारियों के अनुसार यहां भूमि अधिग्रहण से जुड़ी कुछ समस्याएं सामने आ रही हैं। हालांकि डिपो के कुछ हिस्सों में काम शुरू किया जा चुका है। दोनों डिपो में लगेंगे चार्जिंग स्टेशन नगर निगम की फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट्स कमेटी ने शनिवार को हुई बैठक में दोनों डिपो में इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन लगाने को मंजूरी दे दी है। इससे बसों के संचालन के लिए जरूरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र की योजना के तहत मिलेंगी 100 ई-बसें SE श्याम लाल गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार की योजना के तहत देश में 1000 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई जानी हैं, जिनमें से 100 बसें लुधियाना को मिलेंगी। इन बसों के संचालन के लिए डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों कम करने का लक्ष्य इलेक्ट्रिक बसों के शहर में संचालन से सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलने के साथ प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। निगम का मानना है कि सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बस सेवा शुरू होने से लोग निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे शहर की व्यस्त सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होने की संभावना है।



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