रायपुर24 मिनट पहलेलेखक: अश्विनी पांडेय
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नक्सल प्रभाव कम होने के बाद स्वास्थ्य टीमें बस्तर के दुर्गम और घने जंगलों में बसे गांवों तक पहली बार पहुंचीं। वहां चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।
कई गांवों में पहली बार डॉक्टर-नर्स और दवा पहुंची। बड़ी संख्या में लोग बीमार थे, पर उन्हें जानकारी तक नहीं थी। अस्पताल दूर होने से वे बिना जांच और इलाज के जीवन गुजार रहे थे।
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान ‘मावा सेहत, मावा बस्तर’ के तहत अब तक 34.41 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें 59,921 लोगों को इलाज के लिए प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में रेफर करना पड़ा। जांच में सबसे ज्यादा 21,666 लोग हाई ब्लड प्रेशर के मिले।
529 लोगों में कुष्ठ रोग पीड़ित हैं। टीबी के अधिकतर मरीज लंबे समय से खांसी से परेशान थे, लेकिन बीमारी से अनजान थे। सभी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के पोर्टल से जोड़कर इलाज शुरू किया गया है। अभियान की शुरुआत सीएम विष्णुदेव साय ने 13 अप्रैल 2026 को सुकमा से की थी। इसके लिए डॉक्टर, स्टाफ नर्स, एएनएम, आरएचओ की 1,020 टीमें बनाई गईं।
ये टीमें 3,999 गांवों तक पहुंच चुकी हैं। अब केवल 16 गांवों में स्क्रीनिंग बाकी है।
रेफर किए गए 33 हजार स्वस्थ हुए अभियान के दौरान 59,921 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में रेफर किया गया। इनमें से करीब 33 हजार इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं 14,132 मरीजों का लंबे समय तक इलाज चलना है। अन्य 4,626 मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत बताई गई है।
1020 स्वास्थ्य टीमें 4000 गांवों के हर घर पहुंचीं
10.44 लाख लोगों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं: घर-घर जांच के दौरान 10.44 लाख लोग ऐसे मिले, जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। बड़ी संख्या में लोगों के पास आधार कार्ड या कोई अन्य सरकारी पहचान-पत्र भी नहीं था। अब इनके दस्तावेज और आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया चल रही है।


बस्तर के जंगलों में पहली बार सीएम साय के निर्देश पर स्वास्थ्य जांच टीमें भेजी गईं। घर-घर जांच कर बीमारों को अस्पताल भेजा गया है। फोकस स्वास्थ्य सुधार पर है। -श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री
अभियान के तहत 1,020 स्वास्थ्य टीमें करीब 4000 गांवों के घर-घर तक पहुंचीं। 60 हजार बीमारों को इलाज से जोड़ा गया। इनमें 33 हजार स्वस्थ हो चुके हैं, बाकी का इलाज चल रहा है। -संजीव झा, संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं
- मोतियाबिंद से जा रही थी रोशनी: तोकापाल ब्लॉक के छापरभानपुरी गांव में टीम को 68 वर्षीय सोमारू राम मिले। उनकी दोनों आंखों की रोशनी घट रही थी। उन्हें नहीं पता था कि वे मोतियाबिंद से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य टीम ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। ऑपरेशन के बाद अब उनकी आंखों की रोशनी लौटने लगी है।
- 10 किमी पैदल पहुंची टीम, समय पर इलाज से बची बच्चे की जान: बीजापुर के डोडी तुमनार गांव में 10 वर्षीय सोमलू मोदियाम का पेट फूल रहा था। परिजन जड़ी-बूटियों से उसका इलाज कर रहे थे। स्वास्थ्य टीम कमर तक पानी भरी नदी पार कर और 10 किमी पैदल चलकर गांव पहुंची। बच्चे को जिला अस्पताल भेजा गया, जहां नेफ्रोटिक सिंड्रोम का पता चला। समय पर इलाज से जान बच गई।

