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किन्नौर जिले की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा किए गए सामाजिक अंकेक्षण के बाद आयोजित जनसुनवाई में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। अंकेक्षण के तहत जिले के 225 सरकारी विद्यालयों में से 46 विद्यालयों (20 प्रतिशत) का विस्तृत अध्ययन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षित 67 प्रतिशत विद्यालयों में कक्षाओं की कमी पाई गई। जबकि 11 प्रतिशत विद्यालयों में मिड-डे मील के लिए रसोईघर उपलब्ध नहीं हैं। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए बाधारहित पहुंच की सुविधा 76 प्रतिशत विद्यालयों में नहीं है। इसके अलावा, 11 प्रतिशत विद्यालयों में लड़कों तथा 9 प्रतिशत विद्यालयों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं हैं। 24 प्रतिशत विद्यालयों में चारदीवारी का भी अभाव पाया गया। रिपोर्ट में हुआ सकारात्मक पहलुओं का भी उल्लेख हालांकि, रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक पहलुओं का भी उल्लेख किया गया। सभी सर्वेक्षित विद्यालयों में 100 प्रतिशत शिक्षक उपलब्ध पाए गए। साथ ही पात्र विद्यार्थियों को समय पर निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें और विद्यालयी वर्दी उपलब्ध कराई गईं। अंकेक्षण में यह भी सामने आया कि 63 प्रतिशत विद्यालयों में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है, जबकि 46 प्रतिशत विद्यालयों का ‘फिट इंडिया’ पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हुआ है। जनसुनवाई में शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण और समावेशी बनाने के सुझाव दिए।
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किन्नौर के 67% स्कूलों में कक्षाओं की कमी:76% में दिव्यांग सुविधा नहीं; सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट में खुलीं खामियां
