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शिकायत में कहा गया है कि 20 दिसंबर 2025 को कपिलवस्तु महोत्सव आयोजन समिति ने टेंट, मंच, पंडाल, साउंड सिस्टम, एलईडी, वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी, बैरिकेडिंग सहित सभी व्यवस्थाओं के लिए विधिवत निविदा जारी की थी। पूरे महोत्सव की व्यवस्थाएं आयोजन समिति के माध्यम से कराई गईं। इसके बावजूद प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग ने भी मंच, पंडाल, बैरिकेडिंग एवं अन्य कार्यों का अलग से आगणन तैयार कर भुगतान प्राप्त किया। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब पूरा कार्य आयोजन समिति के माध्यम से कराया गया, तो लोक निर्माण विभाग ने आखिर किस कार्य का भुगतान लिया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कपिलवस्तु महोत्सव की व्यवस्थाओं के लिए एक ओर आयोजन समिति ने टेंडर जारी किया, वहीं दूसरी ओर प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग ने भी हेलीपैड सहित विभिन्न कार्यों के लिए अलग से निविदा प्रक्रिया अपनाई। अब सवाल यह उठ रहा है कि एक ही आयोजन के लिए दो अलग-अलग एजेंसियों द्वारा समान कार्यों के लिए आगणन और भुगतान की प्रक्रिया क्यों अपनाई गई तथा वास्तविक कार्य किस एजेंसी ने कराया। अधिवक्ता प्रशस्त उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं ने आपसी मिलीभगत से कूटरचित आगणन तैयार किया, शासन से धन स्वीकृत कराया और अपने चहेते ठेकेदार/फर्म को 37.93 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। शिकायत में इसे सरकारी धन के कथित गबन का मामला बताते हुए पूरे प्रकरण की वित्तीय एवं तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है।
नोटरी शपथपत्र के साथ FIR, वसूली और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने प्रमुख अभियंता को भेजी शिकायत के साथ नोटरीकृत शपथपत्र एवं संबंधित निविदा दस्तावेज संलग्न किए हैं। मांग की गई है कि शासन स्तर पर स्वतंत्र जांच टीम गठित कर मौके पर वास्तविक कार्यों और भुगतान का सत्यापन कराया जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अभियंताओं एवं भुगतान प्राप्त करने वाली फर्म के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाए, सरकारी धन की वसूली की जाए तथा की गई कार्रवाई की प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।
DM ने अधिशासी अभियंता की ओर भेजा
मामले में जब दैनिक भास्कर की टीम ने जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन से पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ही अधिकृत जानकारी देंगे। इसके बाद भास्कर की टीम सुबह करीब 11 बजे प्रांतीय खंड कार्यालय पहुंची, लेकिन अधिशासी अभियंता कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने बाद में बात करने का समय दिया, लेकिन इसके बाद किए गए फोन कॉल का भी जवाब नहीं दिया। समाचार लिखे जाने तक विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
शिकायतकर्ता ने अपने नोटरी शपथपत्र में उल्लेख किया है कि 25 अक्टूबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान बीएससी ग्राउंड (मुख्यालय) पर प्रशासन द्वारा तीन अस्थायी हेलीपैड बनाए गए थे। इसके अलावा शिकायत में यह भी कहा गया है कि कपिलवस्तु महोत्सव स्थल पर प्रधानमंत्री के पूर्व आगमन के दौरान बनाया गया हेलीपैड भी उपयोग में रहा है। ऐसे में वर्ष 2026 के आयोजन के लिए नया हेलीपैड निर्माण अथवा उसी मद में नया आगणन तैयार कर शासन से धन स्वीकृत कराने की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि नया निर्माण नहीं हुआ, तो हेलीपैड मद में स्वीकृत धन और भुगतान की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता कमल किशोर का नाम पहले भी विवादों में रह चुका है। उन पर देवरिया जनपद में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई हुई थी। बाद में न्यायालय के आदेश पर उनकी बहाली हुई। अब सिद्धार्थनगर में सामने आई इस नई शिकायत के बाद विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी धन के उपयोग को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, समाचार में वर्णित सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा प्रमुख अभियंता को भेजी गई नोटरीकृत शिकायत एवं उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित हैं। आरोपों की सत्यता की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी।
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