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- Pt. Vijayshankar Mehta Column | Chaturmas Significance & Spiritual Growth
2 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
आने वाले चार महीने हम मनुष्यों के लिए एक अलग यात्रा के रहेंगे। आज हरिशयनी एकादशी है। साल भर हमारी कुछ आदतें रहीं- अच्छी भी, बुरी भी। आदत बनती है समय और व्यवहार से। यदि आप समय का सदुपयोग करें, व्यवहार को तराश लें तो आदत अच्छी।
समय का दुरुपयोग करें, व्यवहार बिगाड़ लें तो आदत खराब। दैत्यराज बली को भगवान विष्णु ने वामन रूप में ठगा, लेकिन उसकी दान वृत्ति से प्रसन्न होकर कहा कि कुछ मांग लो तो उसने कहा कि आप मेरे राज्य पाताल में चलिए। और विष्णु जी पाताल पहुंच गए।
अब चार महीने विष्णु जी पाताल में रहेंगे। भगवान पाताल में पहुंचकर विश्राम कर रहे हैं और कह रहे हैं कि तुमने जीते-जी अपनी जिंदगी को जो नर्क बनाया है, समझ लो अब चार महीने में आ गया हूं, मेरी उपस्थिति का भरपूर लाभ उठाओ। इसलिए आने वाले चार महीने खूब साधना करिए, शुभ विचार जीवन में उतारिए, क्योंकि प्रकृति और परमात्मा चातुर्मास में अलग ढंग से आपके साथ में हैं।

