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Operation Thunderbolt Uganda | Israel Rescue Mission Spy Files Story


दैनिक भास्कर की ‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आप पढ़ रहे हैं- ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट।’ पार्ट-1 में आपने पढ़ा- 27 जून 1976 को डेनिम स्कर्ट पहनी लड़की ने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर एक विमान को हाईजैक कर लिया। विमान इजराइल के तेल अवीव एयरपोर्ट से पेरिस जा रहा था।

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हाईजैकर 245 यात्रियों को बंधक बनाकर युगांडा ले गए। इनमें ज्यादातर इजराइली थे। हाईजैकरों ने अल्टीमेटम दे रखा था- 1 जुलाई को दोपहर 2 बजे तक उनकी मांगे नहीं मानी गईं, तो सभी यात्री मार दिए जाएंगे।

सिर्फ 8 घंटे बाद 100 से ज्यादा इजराइली मारे जाने वाले थे। प्रधानमंत्री हाईजैकरों के आगे झुकने को तैयार थे, लेकिन रक्षा मंत्री के दिमाग में कुछ ऐसा चल रहा था, जो नामुमकिन सा था। पूरी कहानी पार्ट-2 में पढ़िए…

तारीख 1 जुलाई 1976, सुबह के 6 बज रहे थे। यरुशलम के कमांड रूम में इजराइली पीएम यित्जाक राबिन, रक्षा मंत्री शिमोन पेरेस और सेना प्रमुख जनरल मोटा गुर परेशान बैठे थे।

पीएम ने सिगरेट का कश भरते हुए रक्षा मंत्री से कहा- ‘कल रात हाईजैकरों ने फ्रांस और दूसरे देशों के 148 यात्रियों को छोड़ दिया है। हमारे लोग अभी भी बंधक हैं। मैं उन्हें मरने के लिए नहीं छोड़ सकता।’

रक्षा मंत्री पेरेस कुछ देर चुप रहे। फिर गहरी सांस लेते हुए कहा- ‘हम मिलिट्री एक्शन लेंगे।’

‘मिलिट्री एक्शन? फिर वही बात। आज तक ऐसा हुआ है।’ पीएम ने लगभग चीखते हुए कहा।

पेरेस ने भी तल्खी से जवाब दिया- ‘इजराइल भी तो आज तक झुका नहीं है। जो कभी नहीं हुआ, वो अब होगा।’

पेरेस ने सेना प्रमुख से पूछा- ‘जनरल साहब, आपकी क्या राय है?’

जनरल मोटा गुर ने कहा- ‘मिलिट्री एक्शन ले सकते हैं, लेकिन तैयारी के लिए कम से कम दो दिन चाहिए।’

तभी पीएम ने टोका- ‘क्या ये मुमकिन है?’

जनरल गुर ने कहा- ‘मेरी टीम एंटेबे जाकर आतंकियों को ढेर कर सकती है, लेकिन बंधक जिंदा बचेंगे या नहीं, इसकी गारंटी नहीं दे सकता।’

इजराइली पीएम राबिन (बाएं) और रक्षा मंत्री पेरेस।

इजराइली पीएम राबिन (बाएं) और रक्षा मंत्री पेरेस।

रक्षा मंत्री ने पूछा- ‘किस बात का डर है?’

सेना प्रमुख ने कहा- ‘हमें नहीं मालूम बंधक कहां हैं? आतंकी किस जगह तैनात हैं? हमारे पास कोई तस्वीर या नक्शा भी नहीं है।’

रक्षा मंत्री- ‘ये सारी जानकारी मिल जाए तो?’

‘तो भी गारंटी नहीं दे सकता।’ सेना प्रमुख ने जवाब दिया।

रक्षा मंत्री ने गुस्से में कहा- ‘गारंटी क्यों नहीं दे सकते?’

सेना प्रमुख- ‘डेडलाइन में कुछ ही घंटे बचे हैं। मुझे कम से कम 2 दिन चाहिए।’

पेरेस ने झुंझलाकर कहा- ‘वक्त ही तो नहीं है।’

प्रधानमंत्री ने हाथ उठाकर दोनों को शांत कराया। फिर सिगरेट का कश भरते हुए कहा- ‘हम फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करने के लिए तैयार हैं। यह मैसेज तुरंत युगांडा भिजवाइए।’

पेरेस हक्के-बक्के रह गए, ‘लेकिन सर…!’

‘कोई लेकिन-वेकिन नहीं, पेरेस। आप आंतकियों से कहिए कि वो हमें थोड़ा वक्त दें।’ इतना कहकर राबिन अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए।

पेरेस चुपचाप कमरे से बाहर निकल गए। राबिन मुड़े और सेना प्रमुख की आंखों में देखते हुए कहा- ‘मिलिट्री एक्शन की तैयारी कीजिए।’

‘लेकिन, सर अभी तो आप…’ सेना प्रमुख इतना ही बोल पाए थे कि राबिन ने उन्हें टोक दिया- ‘तैयारी कीजिए…वक्त आपको मिल जाएगा।’

एक तरफ हाईजैकरों से डील और दूसरी तरफ सेना प्रमुख को कार्रवाई का आदेश… आखिर पीएम के दिमाग में चल क्या रहा था…?

इजराइली पीएम राबिन, रक्षा मंत्री पेरेस और सेना प्रमुख गुर मीटिंग करते हुए। (बाएं से दाएं) AI इमेज

इजराइली पीएम राबिन, रक्षा मंत्री पेरेस और सेना प्रमुख गुर मीटिंग करते हुए। (बाएं से दाएं) AI इमेज

करीब 2 घंटे बाद, प्रधानमंत्री का फोन बजा। उधर से आवाज आई- ‘हाईजैकरों ने वक्त दे दिया है। अब डेडलाइन है 4 जुलाई दोपहर 12 बजे तक।’

राबिन ने जोर से मेज पर घूंसा मारा- ‘इतना वक्त बहुत है।’

उन्होंने फौरन अपनी खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ के चीफ यित्जाक होफी को फोन लगाया- ‘बंधक कहां बंद हैं? अंदर आने-जाने के कितने दरवाजे हैं? मुझे एक-एक डिटेल चाहिए, होफी।’

दूसरी तरफ से आवाज आई- ‘मुझे 24 घंटे दीजिए।’ फोन कट गया।

अब शाम ढल चुकी थी। पेरिस का ओरली एयरपोर्ट पुलिस की गाड़ियों के सायरन से गूंज रहा था। एंटेबे से रिहा हुए गैर-इजराइली अभी-अभी यहां पहुंचे थे।

एयरपोर्ट पर एक कैफे में बैठकर 50 साल का बुजुर्ग कॉफी पी रहा था। तभी 30-35 साल का एक शख्स उसके पास पहुंचा। उसने अपना आईकार्ड दिखाते हुए कहा- ‘सर, घबराइए नहीं। मुझे कुछ जानकारी चाहिए।’

बुजुर्ग ने अपनी आंखें रगड़ते हुए कहा- ‘कैसी जानकारी?’

शख्स ने कहा- ‘एंटेबे में बंधकों को कहां रखा गया है?’

बुजुर्ग ने कुछ सोचते हुए कहा- ‘ओल्ड टर्मिनल के मुख्य हॉल में।’

‘माहौल कैसा है? कुल कितने लोग हैं अंदर?’ शख्स ने फिर पूछा।

‘100 से ज्यादा बंधक हैं। हॉल में कांच के दो बड़े दरवाजे हैं, जो बाहर रनवे की तरफ खुलते हैं।’

हाईजैकरों के चंगुल से निकलकर पेरिस पहुंचे यात्री से बात करता हुआ शख्स। AI इमेज

हाईजैकरों के चंगुल से निकलकर पेरिस पहुंचे यात्री से बात करता हुआ शख्स। AI इमेज

अब शख्स, बुजुर्ग के करीब सरकते हुए पूछा- ‘सिक्योरिटी कैसी है?

‘मेन गेट पर चार आतंकवादी तैनात हैं। इसमें एक महिला भी है।’ बुजुर्ग ने बताया।

‘और बाकी आतंकी?’

बुजुर्ग ने थोड़ा सोचते हुए कहा- ‘बाकी आतंकी हॉल के ठीक बगल वाले VVIP रूम में आराम करते हैं। इसके अलावा दर्जनभर युगांडा के सैनिक भी राइफल लिए तैनात हैं।’

बुजुर्ग को लगा शायद पत्रकार है। उसने सारी बातें बता दीं, लेकिन असल में वो शख्स मोसाद का एजेंट था।

रात करीब 2 बजे मोसाद चीफ का फिर से फोन बजा। उधर से आवाज आई- ‘सर, एक इजराइली कंपनी ने एंटेबे के ओल्ड टर्मिनल का नक्शा बनाया था। हमें नक्शा मिल गया है।’

मोसाद चीफ ने कहा- ‘हम्म…सिर्फ नक्शे के भरोसे 100 से ज्यादा जिंदगियों को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। ओरिजिनल तस्वीर चाहिए।’

फोन कट गया।

अब तक 2 जुलाई हो चुकी थी। सुबह के 10 बज रहे थे। केन्या की राजधानी नैरोबी से एक विमान ने उड़ान भरी। विमान में सिर्फ पायलट और को-पायलट थे। कुछ ही देर बाद विमान युगांडा की तरफ मुड़ गया। घंटेभर का सफर था।

जैसे ही विमान युगांडा के एंटेबे हवाई अड्डे के ऊपर पहुंचा, पायलट ने उसकी ऊंचाई बढ़ा दी। को-पायलट ने हाई-टेक कैमरा निकाला और एयरपोर्ट की दर्जनों तस्वीरें खींच लीं।

ये दोनों मोसाद के एजेंट थे। इजराइल ने इसके लिए केन्या सरकार से चुपचाप डील कर ली थी।

3 जुलाई 1976, सुबह के 4 बजे थे। इजराइल डिफेंस फोर्स की स्पेशल यूनिट के कमांडर योनी नेतन्याहू मिलिट्री एक्सरसाइज से घर लौटे। उनका शरीर धूल, मिट्टी और पसीने से सना था।

योनी, इजराइल के मौजूदा पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई थे। बेंजामिन के पीएम बनने में इस मिशन का बहुत बड़ा रोल था। अब कहानी में लौटते हैं…

इजराइल डिफेंस फोर्स की स्पेशल यूनिट के कमांडर योनी नेतन्याहू।

इजराइल डिफेंस फोर्स की स्पेशल यूनिट के कमांडर योनी नेतन्याहू।

उस वक्त योनी की प्रेमिका ब्रूरिया कपड़े धो रही थी। योनी को देखते ही वह बोल पड़ी- ‘तुमने कल से कुछ खाया नहीं है। मैंने तुम्हारी पसंदीदा लेमन मेरिंग पाई बनाई है। खा लो।’

योनी ने फ्रिज से निकालकर पाई का आधा कौर मुंह में रख लिया। फिर धीरे से कहा- ‘बहुत टेस्टी है। नहाकर आता हूं, फिर खाकर सो जाऊंगा।’

योनी बाथरूम में चले गए। 20 मिनट बाद जब कपड़े धोकर ब्रूरिया लौटी, तो देखा कि बाथरूम का दरवाजा अब भी बंद है। उसने आवाज लगाई- ‘योनी…इतनी देर से क्या कर रहे हो?’

अंदर से कोई आवाज नहीं आई। ब्रूरिया ने धीरे से धक्का दिया। दरवाजा खुल गया। योनी का सिर दीवार से टिका हुआ था। आंखें बंद थीं। ऊपर से शॉवर का पानी गिर रहा था।

ब्रूरिया बुदबुदाई- ‘ओह योनी… तुम तो सो गए।’ उसने शॉवर बंद किया। योनी को बेडरूम तक ले गई और चादर ओढ़ाकर सुला दिया।

इधर, प्रधानमंत्री दफ्तर में बैठे राबिन सिगरेट पर सिगरेट पिए जा रहे थे। टेबल पर रखी ऐशट्रे जली हुई सिगरेट के टुकड़ों से भरी थी। तभी विदेश मंत्री आलोन पहुंच गए।

विदेश मंत्री को देखते ही राबिन ने कहा- ‘मैं मिलिट्री एक्शन लेने जा रहा हूं। एक ड्राफ्ट तैयार करो। कैबिनेट के सामने ब्रीफिंग देनी है।’

आलोन ने सहमति में सिर हिलाया और वहां से निकल गए। राबिन उन्हें छोड़ने के लिए लिफ्ट तक साथ आए।

चलते-चलते राबिन ने कहा- ‘एक बात और… अगर यह मिशन नाकाम हुआ, तो मेरे इस्तीफे का ड्राफ्ट भी तैयार कर देना।’

आलोन ने हैरान होकर पूछा- ‘सर… आपकी नजर में नाकामी की परिभाषा क्या होगी?’

राबिन ने कहा- ‘अगर 25 लोग मारे जाते हैं, तो मैं इसे नाकाम मानूंगा। आंकड़ा इससे कम रहा, तो मैं इसे सफल मानूंगा।’

‘कामयाबी के कितने चांस हैं?’ आलोन ने झिझकते हुए पूछा। राबिन ने गहरी सांस भरते हुए कहा- ‘मेरे हिसाब से 50-50.’

इजराइली पीएम राबिन (बाएं) और विदेश मंत्री आलोन।

इजराइली पीएम राबिन (बाएं) और विदेश मंत्री आलोन।

अब तक सुबह के 7 बज चुके थे। यानी हाईजैकर्स की डेडलाइन खत्म होने में अभी भी 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बचा था।

इधर, योनी की प्रेमिका ब्रूरिया हड़बड़ाकर नींद से जागी। शायद उसने कोई बुरा सपना देख लिया था। योनी उठ चुके थे और जैतूनी-हरे रंग की वर्दी पहन रहे थे।

योनी ने शर्ट का बटन बंद करते हुए कहा- ‘अगर मैं रात तक वापस न लौटूं, तो समझ लेना कोई बड़ा मिशन शुरू हो चुका है।’

ब्रूरिया ने रुंधे गले से कहा- ‘यह एंटेबे वाले मामले से जुड़ा है न?’ योनी ने गहरी सांस ली और कहा- ‘हां।’

ब्रूरिया कुछ कहती, इससे पहले ही योनी ने उसे गले लगा लिया। धीमें से उसके कानों में कहा- ‘मैं लौटकर आऊंगा, इंतजार करना।’

योनी ने बैग उठाया और तेजी से बाहर निकल गए। पीछे-पीछे दौड़ती हुई ब्रूरिया चिल्लाई- ‘योनी रुको, तुम मोर को बाय कहना भूल गए।’

लेकिन योनी कार में बैठकर निकल चुके थे। दरअसल, मोर योनी का जर्मन शेफर्ड डॉग था।

ब्रूरिया ने मोर को पुचकारते हुए कहा- ‘कोई नहीं बेटा… योनी लौटकर आएंगे तो तुम नाराजगी जता देना।’

ब्रूरिया को पता नहीं था कि योनी लौटेंगे तो जरूर, लेकिन मोर को मना नहीं पाएंगे…

3 जुलाई दोपहर 1 बजकर 40 मिनट का वक्त। इजराइल का बेन गुरियन एयरपोर्ट भट्टी की तरह धधक रहा था। पारा 40°C के पार पहुंच चुका था। चार हरक्यूलिस C-130 विमान और करीब 190 इजराइली कमांडो रनवे पर खड़े थे।

तभी एक चमचमाती हुई काली मर्सिडीज और पीछे-पीछे 2 लैंड रोवर गाड़ियां रनवे पर पहुंचीं। उसमें से 5-7 सैनिक उतरे और फौरन तीनों गाड़ियां एक विमान में लोड कर दी गईं। रनवे पर खड़े एक कमांडो ने दूसरे से पूछा- ‘ये गाड़ियां क्यों लोड की जा रही हैं? इनका क्या काम है?’

दूसरे ने कहा- ‘सब मोसाद का खेल है। देखो तो आगे होता क्या है।’

अब दुनिया का सबसे खतरनाक कमांडो मिशन शुरू हो चुका था। नाम- ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट।’ ये नाम इसलिए क्योंकि सबकुछ बिजली की रफ्तार से होना था।

पूरे ऑपरेशन को लीड कर रहे थे जनरल डैन शैमरोन और ग्राउंड कमांडर थे योनी नेतन्याहू। योनी की टीम को ही सबसे पहले बंधकों तक पहुंचना था।

ऑपरेशन थंडबोल्ट में शामिल इजराइली कमांडो।

ऑपरेशन थंडबोल्ट में शामिल इजराइली कमांडो।

दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर पहले विमान ने उड़ान भरी। पांच-पांच मिनट के फासले पर बाकी तीन विमान भी आसमान में थे। चारों विमानों ने शुरुआत में अलग-अलग दिशाएं पकड़ीं, फिर सब दक्षिण की ओर निकल गए।

एक घंटे के बाद विमान दक्षिणी सिनाई के ओफिरा एयरबेस पर लैंड हुए। वहां फ्यूल भरा और ठीक साढ़े तीन बजे फिर से विमान आसामान में थे। अब मंजिल थी- एंटेबे एयरपोर्ट।

इन चार विमानों के साथ दो बोइंग 707 विमान भी आसमान में गश्त लगा रहे थे। उनमें से एक उड़ता हुआ हाईटेक कमांड सेंटर था और दूसरा आधुनिक सुविधाओं से लैस मेडिकल हॉस्पिटल।

करीब एक घंटे बाद योनी नेतन्याहू को थकान महसूस होने लगी। उन्होंने शैमरोन से कहा- ‘मुझे नींद आ रही है। सो जाऊं?’

शैमरोन ने मुस्कुराते हुए कॉकपिट के पिछले हिस्से की तरफ इशारा कर दिया- ‘तुम जाते वक्त सुस्ता लो, वापसी में मैं सो जाऊंगा।’

योनी बंक पर चढ़े, सिर के नीचे तकिया टिकाया और लेट गए। आंखें मूंदने से पहले उन्होंने नेविगेटर से कहा- ‘एंटेबे पहुंचने से आधे घंटे पहले मुझे जगा देना।’

रात के ठीक 10:30 बजे। नेविगेटर ने योनी का कंधा पकड़कर जोर से हिलाया- ‘योनी, उठ जाओ, हम विक्टोरिया झील के करीब पहुंच रहे हैं।’

योनी ने आंखें खोलीं और पूछा- ‘कितना वक्त बचा है?’ नेविगेटर ने कहा- ‘30 मिनट।’

योनी तुरंत बंक से नीचे उतरे। झटपट वर्दी ठीक की। साइलेंसर गन लोड किया और विमान में खड़ी मर्सिडीज की फ्रंट सीट पर जाकर बैठ गए। उन्होंने ड्राइवर से कहा- ‘फौरन इंजन स्टार्ट करो।’

मर्सिडीज की हेडलाइट्स जल उठीं। ठीक उसी पल पीछे खड़ी दो लैंड रोवर्स की बत्तियां भी जगमगा उठीं।

रात ठीक 11 बजकर 1 मिनट पर पहले विमान के पहिए ने रनवे को छुआ। कोई आवाज नहीं हुई। होती भी कैसे, पहियों में हवा ही बहुत कम भरी गई थी।

विमान के रुकने से पहले ही इजराइली कमांडो कूद पड़े। उन्होंने फौरन रनवे के दोनों किनारों पर जलती हुई लैंप रख दीं, ताकि युगांडा वाले एयरपोर्ट की लाइटें बंद कर दें, तो भी बाकी विमानों को उतरने में दिक्कत न हो।

अगले ही पल, विमान से चमचमाती हुई काली मर्सिडीज निकली। ठीक इसी तरह की मर्सिडीज से तानाशाह ईदी अमीन चलता था। उसके पीछे दो लैंड रोवर गाड़ियां भी फर्राटा भरते हुए निकल पड़ीं।

गाड़ियों की स्पीड बिल्कुल नाप-तोलकर उतनी ही रखी गई थी, जितनी ईदी अमीन के काफिले की हुआ करती थी- न ज्यादा तेज, न बहुत धीमी। काफिला चल पड़ा।

ये मोसाद की चाल थी, ताकि युगांडा के सैनिकों को लगे कि उनके राष्ट्रपति का काफिला है, पर क्या युगांडा के सैनिक क्या इतने भोले थे? कहानी में आगे बढ़ते हैं…

एंटेबे में ऑपरेशन थंडरबोल्ट की तैयारी करते हुए इजराइली कमांडो।

एंटेबे में ऑपरेशन थंडरबोल्ट की तैयारी करते हुए इजराइली कमांडो।

अभी काफिला कुछ ही कदम आगे बढ़ा था कि कंट्रोल टावर पर तैनात दो संतरियों की नजर मर्सिडीज पर पड़ी। एक ने कहा- ‘दादा ने तो सफेद मर्सिडीज ले ली है। इतनी रात को काली गाड़ी में कौन आ रहा है?’

दूसरे ने कहा- ‘टेंशन ना लो भाई… ये दादा की ही पुरानी गाड़ी है।’

तभी गाड़ियों की हेडलाइट उन पर चमकी। एक संतरी भागकर अंधेरे में छिप गया, लेकिन दूसरे ने राइफल तान दी और चिल्लाया- ‘आगे आओ’

फ्रंट सीट पर बैठे योनी ने ड्राइवर से कहा- ‘इसे शूट करो फौरन।’

बगल में बैठे डिप्टी कमांडर मुकी झट से बोल पड़े- ‘नहीं योनी फायर नहीं करना। यह उनकी रूटीन चेकिंग है।’

योनी ने डांटते हुए कहा- ‘इसे शक हो गया है।’ उन्होंने अपनी साइलेंसर गन निकाली और फायर कर दिया। गोली लगते ही संतरी जमीन पर गिर पड़ा।

मर्सिडीज जैसे ही आगे बढ़ी पीछे से गोलियों की आवाज आने लगी। जख्मी संतरी फर्श पर पड़े-पड़े फायरिंग कर रहा था, तभी पीछे आ रही लैंड रोवर के कमांडो ने उसे वहीं ढेर कर दिया।

अब ओल्ड टर्मिनल महज 50 गज की दूरी पर था। इसी टर्मिनल में बंधक थे। तीनों गाड़ियां आकर रुक गईं। सबकुछ सामान्य था। अब तक हाईजैकरों को भनक नहीं लगी थी।

योनी ने कहा- ‘हेडलाइट बंद करो और सीधे टर्मिनल में घुस जाओ।’

हेडलाइट बंद कर दी गई। इजराइली सैनिक फायरिंग करते हुए टर्मिनल की तरफ दौड़ पड़े। तभी हाईजैकरों ने भी फायरिंग खोल दी। दोनों तरफ से गोलियां चलने लगीं।

इजराइली डिप्टी कमांडर मुकी ने भागते-भागते एके-47 का ट्रिगर दबा दिया। 2 हाईजैकर वहीं ढेर हो गए।

अब इजराइली कमांडो ओल्ड टर्मिनल के बिल्कुल करीब पहुंच चुके थे। योनी लगातार चिल्ला रहे थे- ‘आगे बढ़ो। आगे बढ़ो।’

डिप्टी कमांडर आगे बढ़े। टर्मिनल का पहला दरवाजा लॉक था। वो दौड़कर दूसरे गेट की तरफ भागे। इधर, योनी एंट्री गेट पर पहुंचकर फायरिंग के लिए मुड़े ही थे कि कंट्रोल टावर पर तैनात युगांडा के सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी

एक गोली सीधे योनी के सीने को चीरती हुई निकल गई। वे जमीन पर गिर पड़े। तभी बैकअप कर रहे इजराइली कमांडो ने कंट्रोल टावर पर खड़े गनमैन को मार गिराया।

इसी बीच दो कमांडो योनी को उठाकर ले गए। डॉक्टर ने खून से लथपथ योनी की शर्ट काटकर पट्टियां बांधी, पर गोली अंदरूनी अंगों को छलनी कर चुकी थी।

इजराइली कमांडो ने एंटेबे पहुंचते ही हाईजैकरों पर धावा बोल दिया था। AI इमेज

इजराइली कमांडो ने एंटेबे पहुंचते ही हाईजैकरों पर धावा बोल दिया था। AI इमेज

इधर, डिप्टी कमांडर और उनकी टीम टर्मिनल का दरवाजा तोड़ते हुए अंदर दाखिल हो चुकी थी। हॉल में चारों तरफ दहशत पसरी हुई थी। बंधक गद्दों से मुंह ढंककर दुबके पड़े थे। तभी एक हाईजैकर ने खंभे के पीछे से ग्रेनेड फेंक दिया। उसके ब्लास्ट होते ही हॉल में आग लग गई।

आग की लपटों के बीच हाईजैकर ने फायरिंग शुरू कर दी, लेकिन इजराइली कमांडो ने उसे मार गिराया।

इजराइली कमांडो को लगा कि अब सारे हाईजैकर मारे जा चुके हैं, लेकिन गद्दों के बीच दुबकी डेनिम स्कर्ट वाली लड़की अभी भी मौत का सामान थामे बैठी थी।

कमांडो ने मेगाफोन पर आवाज लगाई- ‘नीचे लेटे रहो! हम इजराइली सैनिक हैं।’

तभी एक शख्स खड़ा होकर चिल्लाने लगा। कमांडो को लगा कि ये हाईजैकर है और ट्रिगर दबा दिया। वहा वहीं गिर पड़ा। तभी उसकी मां चिल्ला उठी- तुम लोगों ने ये क्या किया। ये इजराइली है। बेटा है मेरा।

कमांडो ने कहा- ‘सॉरी, लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता। फटाफट सब बाहर निकलो, विमान तुम लोगों के इंतजार में खड़े हैं। जल्दी करो।’

लोग उठकर बाहर की तरफ भागने लगे। तभी डेनिम स्कर्ट वाली लड़की भीड़ से निकली और एक कमांडो पर झपट पड़ी। उसकी गन छीन ली और फायरिंग करने लगी। तभी पीछे से डिप्टी कमांडर ने उसे जोर से धक्का दिया और अपनी एके-47 की पूरी गोलियां उसके सीने में उतार दी।

अब यात्री जैसे ही टर्मिनल से बाहर निकले, युगांडा के दर्जनभर सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी। बंधकों और डिप्टी कमांडर की सांसें अटक गईं। एक पल के लिए लगा कि सबकुछ खत्म हो गया।

तभी पीछे से इजराइली कमांडोज की एक दूसरी टुकड़ी आ गई। दोनों तरफ से करीब 10 मिनट तक फायरिंग होती रही। इसमें युगांडा के सभी सैनिक मारे गए।

अब बंधकों को एक-एक करके विमान में बैठाया जाने लगा। कुछ ही देर में सभी बंधक विमान में सवार हो चुके थे।

एंटेबे एयरपोर्ट पर घायल बंधकों को ले जाते हुए इजराइली कमांडो।

एंटेबे एयरपोर्ट पर घायल बंधकों को ले जाते हुए इजराइली कमांडो।

रनवे पर खड़े पहले विमान के पायलट ने चिल्लाते हुए पूछा- ‘क्या सभी बंधक आ गए हैं?’ लोडमास्टर ने जवाब दिया- ‘हां सब आ गए हैं।’

पायलट ने पूछा- ‘मुझे सटीक नंबर चाहिए। कितने लोग हैं। लिखकर दो।’

लोडमास्टर ने पर्ची थमाई- ‘102 जीवित और 3 मृत।’

इधर, योनी को बचाने की कोशिश जारी थी। सीपीआर दिया गया, खून चढ़ाया गया… लेकिन अब ये कमांडर गहरी नींद में सो चुका था। कभी ना जगने वाली नींद में।

रात के ठीक 11 बजकर 40 मिनट पर, बंधकों और घायलों को लेकर पहला विमान उड़ चला, लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी।

आसामान में गश्त लगा रहे बोइंग 707 में बैठे जनरल कुटी एडम तक जैसे ही यह मैसेज पहुंचा, उन्होंने फौरन ऑर्डर दिया- ‘रनवे पर खड़े युगांडा के विमानों को तबाह कर दो।’

एयरपोर्ट पर 11 मिग लड़ाकू विमान खड़े थे। इजराइली कमांडो ने बम से सभी विमानों को उड़ा दिया। ताकि युगांडा की सेना उनका पीछा नहीं कर सके।

इसके बाद बाकी के विमानों ने भी उड़ान भरनी शुरू की। रात 12:40 बजे अंतिम इजराइली विमान ने एंटेबे को अलविदा कह दिया। 1 घंटा 39 मिनट में ऑपरेशन थंडरबोल्ट पूरा हो चुका था।

4 जुलाई की सुबह करीब 10 बजे सभी विमान तेल अवीव एयरपोर्ट पहुंचे। रनवे पर पीएम राबिन और उनके मंत्रियों के साथ हजारों इजराइली मौजूद थे।

एयरपोर्ट तालियों और नारों से गूंज रहा था। जैसे ही विमानों के दरवाजे खुले और अपनों ने अपनों को देखा, लोग एक-दूसरे से लिपटकर रोने लगे।

इजराइली के तेल अवीव एयरपोर्ट पर बंधकों और सैनिकों का स्वागत करते लोग।

इजराइली के तेल अवीव एयरपोर्ट पर बंधकों और सैनिकों का स्वागत करते लोग।

एयरपोर्ट पर बंधकों के स्वागत के बाद प्रधानमंत्री ने जश्न मनाने के लिए विपक्ष के नेता मेनाखेम बेगिन को अपने दफ्तर बुलाया। बेगिन जैसे ही अंदर दाखिल हुए, राबिन ने मुस्कुराते हुए विस्की की बोतल उठा ली। बेगिन ने हाथ जोड़ते हुए कहा, ‘राबिन, मैं शराब नहीं पीता।’

राबिन ने ठहाका लगाया। उन्होंने एक ग्लास में विस्की उड़ेली और बेगिन की तरफ बढ़ा दी। बोले, ‘बेगिन साहब, समझ लो कि आप रंगीन चाय पी रहे हैं।’

इस तरह इजराइल और मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट कामयाब हुआ। इसमें जान गंवाने वाले योनी नेतन्याहू के नाम पर उनके छोटे भाई बेंजामिन नेतन्याहू राजनीति में उतरे। 1996 में पहली बार इजराइल के पीएम बने। अभी भी वे उस पद पर कायम हैं।

ऑपरेशन थंडरबोल्ट का पार्ट-1 भी पढ़िए :

डेनिम स्कर्ट, हाथ में पिस्तौल, बॉयफ्रेंड के साथ प्लेन हाईजैक : पीरियड का खून दिखाकर एक महिला भाग निकली, फिर क्या हुआ; ऑपरेशन थंडरबोल्ट पार्ट-1

रेफरेंस :

1. Operation Thunderbolt: Flight 139 and the Raid on Entebbe Airport : By Saul David.

2. A State of Blood: The Inside Story of Idi Amin : By Henry Kyemba



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