![]()
35 दिन का धरना, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, संसद मार्च, लाठीचार्ज, वांगचुक का अनशन खत्म होना और आखिर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी मांगें मनवा लीं। प्रदर्शन खत्म हुआ। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा, हम कॉकरोच हैं, एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है।’ आगे क्या होगा, इस पर दैनिक भास्कर ने पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष राकां और सौरव दास से बात की।
पहले आशुतोष की बात सवाल: आप लोगों ने आंदोलन को यहां तक पहुंचाया है। कैसा महसूस होता है? जवाब: लोग अपने हक के लिए लड़ना सीख रहे हैं। मुद्दों के लिए लड़ रहे हैं। दो महीने पहले इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते थे। डेढ़ महीने पुराना ऑर्गेनाइजेशन इतना बड़ा आंदोलन करता है, तो शुरुआत में नयापन होता है। लोगों को इंटरेस्ट रहता है। इसके बाद भरोसा बहुत जरूरी है। इसी पर लोग आना शुरू होते हैं। पिछले एक-डेढ़ महीने में आंदोलन की क्रेडिबिलिटी बढ़ी है। लोगों को लगता है कि ये प्लेटफार्म कुछ बड़ा करने की कोशिश कर रहा है। व्यवस्था बदलने की कोशिश कर रहा है। सवाल: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने के बाद क्या आपकी पार्टी खत्म हो जाएगी? जवाब: बिल्कुल नहीं। ये तो शुरुआत है। देश के लिए बहुत सपने हैं। ये बस पहली सीढ़ी है। उसके बाद कई काम है। शिक्षा व्यवस्था पर काम करेंगे। सवाल: भविष्य में कॉकरोच जनता पार्टी को किस तरीके से देख रहे हैं और क्या प्लान है? जवाब: यह ऐसा मंच बने, जहां युवा बिना किसी डर या झिझक के अपने मुद्दे उठा सकें, जहां हम सरकार को उसके फैसलों और कामकाज के लिए जवाबदेह ठहरा सकें। सवाल: प्रोटेस्ट के दौरान घायल हुईं साक्षी अब भी ICU में हैं। उनके लिए आप लोग क्या कर रहे हैं? जवाब: हमारी टीम लगातार उनके संपर्क में है। सौरभ उनके भाई से बात कर रहे हैं। अच्छी बात है कि उनकी हालत स्थिर है। वह बोल पा रही है। अभी वेंटिलेटर पर है। उन्हें जो भी मेडिकल या लीगल हेल्प चाहिए होगी, हम देंगे। सवाल: लोग कह रहे हैं कि अभिजीत में नेतृत्व करने की क्षमता नहीं है? जवाब: लोग नहीं कह रहे हैं राइटविंग मीडिया और आईटी सेल का एक हिस्सा ये बात कह रहा है। उस शख्स ने अपनी जिंदगी को खतरे में डाला है। प्रोफेशनल करियर दांव पर लगाया है। एक-डेढ़ महीने में देश की पूरी जनता को जगाया है। उससे ज्यादा आप एक लीडर से क्या उम्मीद करते हो, मुझे नहीं पता। दीपके से मेरी दोस्ती सात साल पुरानी है, लेकिन पिछले डेढ़ महीने में मैंने उस व्यक्ति को जो करते देखा है, जिस हालत में देखा है, लड़ते हुए, रोते हुए, समझाते हुए देखा है। मेरा मानना है कि इस दौर में इससे बेहतर नेतृत्व नहीं मिल सकता था। वह हर दिन बेहतर नेता बन रहा है। अब सौरव दास की बात सवाल: आप पहली बार जेपी नड्डा से मिलने गए थे, तब आपके फोन रखवाए गए थे? जवाब: हां। जाते ही हमारा फोन जब्त कर लिया गया। कहा कि अलाउड नहीं है। ठीक है कोई बात नहीं। सिक्योरिटी सिचुएशन को समझते हैं। फिर बहुत देर इंतजार ही करा रहे थे। हमने कहा कि हम फोन इस्तेमाल कर लेते हैं, टीम के लोगों से बात कर लेते हैं। देख लेते हैं सिचुएशन क्या है। वे अलाऊ नहीं कर रहे थे। फिर हमने कहा कि हम यहीं धरना दे देंगे, फिर उन्होंने अलाऊ किया। फिर नड्डा जी से बात हुई और हम वापस आ गए। सवाल: लोग कह रहे हैं कि अभिजीत दीपके लीडर जैसे नहीं लगते, इसलिए उन पर भरोसा नहीं हो रहा? जवाब: हमने यहां 32-33 दिन से ज्यादा प्रोटेस्ट कर लिया। ये नहीं हो पाता अगर लीडरशिप नहीं होती। यहां जितने भी लोग हैं, सभी में लीडरशिप क्वालिटीज है। हां, हम लोग पहली बार प्रदर्शन कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता इतिहास में ऐसा हुआ होगा कि तीन लोग जो इतने यंग है, उन्हें इतनी भीड़ हैंडल करने को मौका मिला। हम इस जिम्मेदारी को समझते हैं। हम लोग एक-दूसरे की सलाह से ही फैसले लेते हैं। सवाल: आप तीनों कैसे काम करते हैं, किसके पास क्या जिम्मेदारी है? जवाब: तीनों काम बांट लेते हैं। सरकार से बातचीत करने के लिए मैं और आशु चले जाते हैं। अभिजीत और मैं लीगल चीजों पर काम करते हैं। सवाल: जेपी नड्डा से मिलने अभिजीत क्यों नहीं गए? जवाब: लोग ऐसे ही बोल रहे हैं कि 20 जुलाई को लीडरशिप नहीं थी। अभिजीत यहां से चले जाते, तो फिर लगता वे भागकर चले गए। सवाल: CJP और इस आंदोलन का भविष्य क्या देख रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा से सब खत्म हो जाएगा? जवाब: प्रदर्शन खत्म हो जाएगा, लेकिन आंदोलन चलता रहेगा। प्रोटेस्ट के दौरान सोनम वांगचुक के साथ JNU स्टूडेंट नेहा 23 दिन भूख हड़ताल पर रहीं। हमने उनसे भी बात की। सवाल: अब तक का सफर कैसा रहा, अभिजीत दीपके और पूरी टीम कैसे साथ आई? जवाब: मैं अंडरग्रेड के तीसरे साल से स्टूडेंट एक्टिविज्म में हूं। 2019-19 का इक्वल सिटीजनशिप आंदोलन, किसान आंदोलन और रेसलर्स प्रोटेस्ट देखा। इनसे सीख मिली कि अगर हम चाहें तो व्यवस्था पर न सिर्फ सवाल उठा सकते हैं, बल्कि उसमें दखल भी दे सकते हैं। ये तमाम लड़ाइयां हम लोग लंबे समय से लड़ रहे हैं। हम हमेशा से चाहते थे कि एजुकेशन के मुद्दे पर सीरियस बातचीत हो। अभिजीत ने हमसे बात की और कहा कि वे दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले हैं और चाहते हैं स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन उसका हिस्सा बने। हमारी मीटिंग हुई। इसमें बात हुई कि सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठेंगे, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगते हुए। हमने बतौर स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन अनशन में शामिल होने का फैसला लिया। सवाल: अभिजीत से पहली मुलाकात कैसे हुई थी? जवाब: वे जब अमेरिका से प्लेन पकड़कर जंतर-मंतर पर आए थे। उन्होंने कहा कि मैं जेट लैग में हूं। सिर दर्द हो रहा है। कुछ खाया नहीं है। उसी बदहाल हालत में हम उनसे पहली बार मिले थे। फोन पर बात हुई थी। मिले हम उसी प्रोटेस्ट में थे। सवाल: कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर क्या प्लानिंग है? जवाब: मैं कॉकरोच जनता पार्टी का हिस्सा नहीं हूं। मैं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन से हूं। हम लोगों का वर्किंग रिलेशनशिप है क्योंकि ये मूवमेंट बहुत ज्यादा जरूरी है। कॉकरोच जनता पार्टी बेहतर काम करें, लड़े। हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं। सवाल: AISA और कॉकरोच जनता पार्टी का साथ बस यहीं तक था? जवाब: जब भी ऐसे मुद्दे उठेंगे, जिसमें हम दोनों को साथ आकर लड़ाई मजबूत करना है तो हम जरूर साथ आएंगे। ………………….. नोट: आशुतोष और सौरव से बातचीत धरना खत्म होने से पहले हुई थी। नेहा से धरना खत्म होने के बाद बात हुई।
Source link
‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पहली सीढ़ी’:CJP के प्रवक्ता बोले- इस्तीफे के बाद रुकेंगे नहीं, पुलिसवालों का भी हिसाब होगा
