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जबलपुर में भ्रूण लिंग परीक्षण गिरोह का भंडाफोड़:दो बड़े सोनोग्राफी सेंटरों के संचालकों समेत नर्स पर FIR, जल्द होगी गिरफ्तारी




जबलपुर में वर्षों से चल रहे अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण और गर्भपात के नेटवर्क का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। शहर के मालवीय चौक स्थित आरके डिजिटल सोनोग्राफी सेंटर के संचालक डॉ. आर.के. अग्रवाल, आधारताल स्थित सरल सोनोग्राफी सेंटर के संचालक डॉ. सतीष अग्रवाल और एक नर्स खुशी के खिलाफ पीसीपीएनडीटी एक्ट एवं भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। महिला आरक्षकों को गर्भवती बनाकर भेजा, 15 हजार में लिंग परीक्षण का सौदा मुखबिर से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने करीब एक माह तक दोनों सोनोग्राफी सेंटरों पर निगरानी रखी। इसके बाद योजना बनाकर दो महिला पुलिस आरक्षकों को गर्भवती महिला के रूप में सेंटर भेजा गया। जांच के दौरान स्टाफ और डॉक्टर कथित तौर पर 15 हजार रुपये लेकर भ्रूण का लिंग बताने के लिए तैयार हो गए। इतना ही नहीं, यदि गर्भ में बेटी होने की पुष्टि होती, तो अलग से मोटी रकम लेकर गर्भपात कराने की व्यवस्था करने की भी बात सामने आई। एक साथ दो सेंटरों पर छापा, कई जिलों तक फैला मिला नेटवर्क महिला आरक्षकों से मिली जानकारी के आधार पर एएसपी अनु बेनीवाल और आयुष जाखड़ के नेतृत्व में सोमवार रात दोनों सोनोग्राफी सेंटरों पर एक साथ छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेज, रजिस्टर और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क केवल जबलपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, सिवनी सहित आसपास के कई जिलों तक फैला हुआ था। इन जिलों से महिलाओं को लिंग परीक्षण और गर्भपात के लिए यहां बुलाया जाता था। डॉक्टर के मोबाइल में मिले संदिग्ध फोटो-वीडियो पुलिस ने आरके डिजिटल सोनोग्राफी सेंटर के संचालक डॉ. राजेंद्र अग्रवाल का मोबाइल जब्त कर उसकी जांच की। मोबाइल से कई मरीजों से जुड़े संदिग्ध फोटो और वीडियो मिले हैं। पुलिस इन्हें डिजिटल साक्ष्य के रूप में सुरक्षित कर तकनीकी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन साक्ष्यों से पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों का खुलासा हो सकता है। 15 से 50 हजार रुपये तक वसूले जाते थे जांच में यह भी सामने आया कि अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए 15 हजार रुपए से लेकर 50 हजार रुपए तक की रकम वसूली जाती थी। कार्रवाई के दौरान सेंटरों में बड़ी संख्या में मरीज, स्टाफ और कुछ संदिग्ध दलाल भी मिले हैं, जिनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। लाइसेंस निरस्त, पूरे नेटवर्क की जांच जारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने बताया कि दोनों सोनोग्राफी सेंटरों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने सेंटरों से महत्वपूर्ण रिकॉर्ड, मशीनों से जुड़े दस्तावेज और ऑनलाइन लेन-देन से संबंधित सामग्री जब्त की है। एएसपी अनु बेनीवाल ने कहा कि ‘गरिमा अभियान’ के तहत महिलाओं और बच्चियों से जुड़े अपराधों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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