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विश्वविद्यालय की 3 सदस्यीय टीम जांच को पहुंची:बांका कॉलेज विवाद में प्राचार्य-कर्मचारी के आरोपों पर जांच शुरू




बांका के रजौन प्रखंड अंतर्गत बुधवार की संध्या डीएन सिंह महाविद्यालय भुसिया, रजौन में तृतीय वर्ग कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह के विरुद्ध प्रभारी प्राचार्य की शिकायत के बाद तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय जांच टीम कॉलेज पहुंची और पूरे मामले की जांच की। टीम के पहुंचने के बाद महाविद्यालय में चल रहा विवाद थमने के बजाय और गहराता नजर आ रहा है, जिसे लेकर कॉलेज परिसर और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।पूर्व में अनशन पर बैठे लोग भी उपस्थित रहे । जांच टीम में सीसीडीसी सदस्य एसएन पांडे, विश्वविद्यालय निरीक्षक प्रो. डॉ. रंजना दुबे और कुलानुशासक डॉ. मुकेश कुमार सिंह शामिल थे। टीम ने कॉलेज पहुंचकर प्रभारी प्राचार्य समेत संबंधित पक्षों से मामले की जानकारी ली और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए। साथ ही उपलब्ध दस्तावेजों की भी जांच की गई।महाविद्यालय के सभी स्टॉप से एक-एक कर पूछताछ की गई।जांच टीम के सदस्यों ने बताया कि महाविद्यालय के प्राचार्य की ओर से विश्वविद्यालय को लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत में तृतीय वर्ग कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह पर कॉलेज परिसर में अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है। आवेदन के अनुसार, नोटिस दिए जाने के बावजूद उनके नियमित रूप से महाविद्यालय में उपस्थित नहीं होने और पूछताछ किए जाने पर कॉलेज परिसर में आकर कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करने की बात कही गई है। प्राचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज परिसर में जबरन एक शिलापट्ट लगाया गया तथा उन पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर कराए गए।जांच के दौरान टीम के समक्ष महाविद्यालय में पूर्व में हुई अवैध बहाली और बिना विज्ञापन नियुक्ति से संबंधित शिकायत का मामला भी सामने आया। इस संबंध में प्राचार्य ने जांच टीम को बताया कि संबंधित बहाली को रद्द कर दिया गया है। शिक्षकों व कर्मचारियों से 20 लाख रुपये लिए इधर, तृतीय वर्ग कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह ने प्राचार्य की ओर से लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि महाविद्यालय में अवैध बहाली और कॉलेज के लिए अनुदान लाने के नाम पर शिक्षकों व कर्मचारियों से करीब 20 लाख रुपये लिए जाने तथा उसका स्पष्ट हिसाब नहीं दिए जाने सहित कई मामलों को लेकर उन्होंने सवाल उठाए थे। उन्होंने संबंधन के नाम पर महाविद्यालय निधि से अवैध निकासी, सेमेस्टर परीक्षा शुल्क जमा नहीं करने और बोनाफाइड प्रमाणपत्र के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने का भी आरोप लगाया। कन्हैया सिंह का कहना है कि इन्हीं मामलों को उठाने के कारण उनके खिलाफ झूठी शिकायत की गई है। जांच के बाद पूरी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाएगी शिलापट्ट लगाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद ही शिलापट्ट स्थापित किया गया था। उनके अनुसार, निर्माण से पहले प्राचार्य महेंद्र प्रसाद सिंह ने स्वयं पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इससे संबंधित लिखित आवेदन और वीडियो फुटेज भी मौजूद है।
जांच टीम ने कहा कि दोनों पक्षों के बयान और दस्तावेजों की जांच के बाद पूरी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



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