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गया कॉलेज में भ्रष्टाचार पर एबीवीपी का प्रदर्शन:उच्चस्तरीय जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग, कुलपति ने दिया आश्वासन




गया कॉलेज में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक अव्यवस्था के विरोध में गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्र नेताओं ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन गया कॉलेज के एकता भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुआ। छात्र नेताओं ने बिहार सरकार के मंत्री और मगध विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति के समक्ष महाविद्यालय में भ्रष्टाचार की जांच और सभी लंबित जांच प्रतिवेदनों को सार्वजनिक करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं के विरोध को देखते हुए बिहार सरकार के मंत्री और मगध विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति ने छात्र प्रतिनिधियों से बात की। उन्होंने परिषद के प्रतिनिधियों की ओरसे सौंपे गए मांग-पत्र को सुना और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा एबीवीपी के जिला संयोजक विनायक कुमार ने आरोप लगाया कि गया कॉलेज भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक विफलताओं का केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक वातावरण को मजबूत करने के बजाय महाविद्यालय में ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। विकास कार्यों, निर्माण कार्यों और वित्तीय मामलों में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। छात्रों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और महिला-पुरुष छात्रावास बदहाल स्थिति में हैं, जबकि प्रशासन छात्रों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है। कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि लगातार अनियमितताएं सामने आने के बावजूद दोषियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, बल्कि उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। आंदोलन को दबाने के लिए बाहरी तत्वों को बुलाया कॉलेज मंत्री चंदन शर्मा ने कहा कि छात्र आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से महाविद्यालय परिसर में बाहरी तत्वों को बुलाया गया, जिन्होंने छात्र नेताओं और विद्यार्थियों को डराने-धमकाने का प्रयास किया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार बताया और कहा कि एबीवीपी ऐसे किसी दबाव में नहीं आएगी। शर्मा ने जोर देकर कहा कि परिषद छात्रहित से जुड़े प्रत्येक मुद्दे पर संघर्ष करती रहेगी।
मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
एबीवीपी ने चेतावनी दी कि यदि गया कॉलेज में व्याप्त भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और छात्रहित से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई और लंबित जांच रिपोर्टों को सार्वजनिक नहीं किया गया, तो विद्यार्थी परिषद आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन एवं महाविद्यालय प्रशासन की होगी।



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