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गोरखपुर में बच्ची की हैवानियत के बाद सिपाही ने निर्ममता से हत्या की थी। मासूम बच्ची के पैर, गर्दन समेत शरीर के मुख्य अंगो की 5 हडि्डयां टूट गईं थी। उसके हाथ की उंगलियां भी कट गई थी। पेट भी फट गया था, अतड़ी बाहर आ गई थी। प्राइवेट पार्ट पर गहरे जख्म के निशान थे। हाथ पीठ के पीछे बांधकर नदी में फेंका गया था। जहां उसका सिर किसी पत्थर से टकराया था। 28 जुलाई की रात जिला अस्पताल से बच्ची गायब हुई थी। 36 घंटे बाद पुलिस ने जब चिऊटहां पुल के नीचे से शव बरामद किया तो कुछ इस तरह दृश्य देखने को मिला। देखने से लग रहा था कि बच्ची की दर्द से तड़पकर मौत हुई है। जिसे देखकर पुलिस टीम भी सन्न रह गई। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी इस हैवानियत से हैरान थे। वहीं पुलिस विभाग इस घटना से शर्मशार था। हर कोई यह कह रहा था कि इसके सीने में गोली मारकर सजा देनी चाहिए। वहीं रात करीब 9 बजे मृतिका की मां ने एक बेटे को जन्म दिया। 5 बेटियों के बाद इस घर में एक बेटे का जन्म हुआ था। लेकिन बेटी की मौत से पूरा परिवार टूट गया था। श्मशान घाट के कमरे में खून के निशान शहर से 15 किमी दूर चिऊटहां पुल के नीचे स्थित श्मशान घाट के कमरे में बच्ची के साथ हैवानियत की गई। वहां पर खून के निशान जगह-जगह मिले हैं। आरोपी पुलिस कर्मी की वर्दी पर भी खून के दाग लगे थे। जिसे वह बच्ची को मारने के बाद पुलिस लाइन आकर धूल लिया था। इसके बाद आराम से सोया था। बच्ची को वह 10 बजे के करीब जिला अस्पताल से बहला फुसलाकर घर छोड़ने के बहाने लेकर गया। श्मशान घाट पर ले जाकर 1 घंटे तक उसके साथ हैवानियत की। इसके बाद तड़पाकर मार डाला। जिला अस्पताल में चला 1 घंटे तक हंगामा गुरुवार को जिला अस्पताल में घटना से नाराज स्टाफ नर्सों ने करीब 1 घंटे तक हंगामा किया। दोपहर में मेडिकल कराने आए आरोपी सिपाही की जमकर पिटाई की। इसके बाद पुलिस से भी काफी देर तक नोकझोंक चली। किसी तरह पुलिस टीम ने समझाकर उन्हें शांत कराया। किसी तरफ भारी फोर्स बुलाकर सिपाही को पुलिस कस्टडी में बाहर निकाला गया। दो घंटे तक जिला अस्पताल का सारा काम ठप था। मरीज के साथ आए परिवार ने लोग भी इधर उधर दौड़ते नजर आए। इधर जली चिता, उधर जन्मा बेटा 10 साल की बच्ची की निर्ममता से हत्या की गई। इसे निर्भया कांड से भी बड़ी घटना बताई जा रही है। गुरुवार शाम 5 बजे पोस्टमार्टम के बाद बच्ची के शव को पुलिस घर न ले जाकर सीधे एंबुलेंस से राजघाट लेकर पहुंची। इस सूचना पर उसकी चार बहनें दौड़ती हुई, वहां पहुंची। एंबुलेंस का दरवाजा खोलकर बहन का शव देखकर छोटी बहन वहीं पर बेहोश हाे गई। पुलिस फोर्स की मौजूदगी में ई-रिक्शा चलाने वाले पिता ने बेटी का दाह संस्कार किया। अभी पिता परिवार और रिश्तेदारों के साथ घर पहुंचे ही थे। तभी उनकी पत्नी को लेबर पेन शुरू हो गया। आनन फानन में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर रात 9 बजे मृतिका की मां ने बेटे को जन्म दिया। बहन बोली थी, इस बार रक्षा बंधन में मेरा भी भाई आएगा
7th में पढ़ने वाली बड़ी बहन ने बताया कि मेरी मम्मी 9 महीने की प्रेग्नेंट थी। इसीलिए उनकी तबियत ठीक नहीं रहती। हम पांच बहने हैं। मृतिका दूसरे नंबर पर थी। बड़ी बहन ने बताया कि सबका ख्याल मैं और मुझसे छोटी बहन ही रखते थे। 27 जुलाई की शाम करीब 7 बजे मेरी अचानक तबियत बिगड़ गई। सीने में दर्द होने लगा और बहुत तेज बुखार चढ़ गया। पापा तुरंत हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने मुझे एडमिट कर लिया। हॉस्पिटल में मेरे साथ दादी रुकी थी। 28 जुलाई को दूसरे नंबर की बहन ने अपने हाथ से खाना बनाई। वह 5th क्लास में पढ़ती थी। घर पर पापा के न होने और मम्मी के बीमार होने की वजह से तीसरे नंबर की बहन के साथ वह खुद खाना लेकर पहुंची। फिर तीसरी बहन को हॉस्पिटल में ही रुकने को बोल कर खुद खाना खिलाने के बाद जाने लगी। तभी यह घटना हुआ। मेरी छोटी बहन प्रेग्नेंट मां से कहती थी इस बार रक्षा बंधन में मेरा भी भाई आएगा। उसको राखी बांधकर अपना सपना पूरा करूंगी। लेकिन यह सब देखने से पहले ही वह इस दुनिया से चली गई। आज वह हाेती तो, सबसे अधिक खुश होती। वो हमेशा मां से भाई की डिमांड करती थी। वह हमेशा बोलती थी कि एक दिन पढ़कर अच्छी डॉक्टर बनकर दिखाऊंगी। फिर अपनी मां का इलाज खुद करूंगी। गोरखनाथ रूट पर लगी थी सिपाही डयूटी आरोपी सिपाही अभिषेक यादव वर्ष 2016 बैच का भर्ती जवान है, जिसकी पुलिस सेवा में ज्वाइनिंग वर्ष 2018 में हुई थी। वर्तमान में उसकी तैनाती डॉयल-112 में थी। वारदात वाले दिन उसकी ड्यूटी सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक गोरखनाथ से चिउटहां रूट पर लगी थी। ड्यूटी पूरी करने के बाद वह पुलिस लाइन स्थित अपने आवास नहीं गया, बल्कि सीधे जिला अस्पताल पहुंचा। आरोप है कि यहीं से उसने मासूम बच्ची को अगवा किया और बाद में जघन्य वारदात को अंजाम दिया। जांच में सामने आया है कि आरोपी सिपाही का विभागीय रिकॉर्ड पहले से ही सवालों के घेरे में रहा है। उस पर पहले भी कई आरोप लग चुके हैं और उसका सेवा रिकॉर्ड अच्छा नहीं माना जाता। इसके बावजूद वह पुलिस सेवा में बना रहा। आरोपी का अतीत भी विवादों से भरा रहा है। वह एक मामले में करीब नौ माह तक जेल में रहा। इसके बाद फरवरी में उसकी बहाली की प्रक्रिया शुरू हुई और सितंबर 2025 में उसे दोबारा सेवा में बहाल कर दिया गया। जिला अस्पताल से मंगलवार रात 10 बजे बच्ची के लापता होने के बाद परिजनों ने करीब दो घंटे तक अपने स्तर पर तलाश की। देर रात पुलिस को सूचना भी दे दी गई, लेकिन शुरुआती घंटों में जिस तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह नहीं दिखी। एफआईआर बुधवार दोपहर 2:02 बजे दर्ज हुई और इसके बाद पुलिस मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज होने के बाद बुधवार दोपहर से 10 थानों की पुलिस और टीमें सर्च अभियान में जुटीं। इसी दौरान आसपास के इलाकों के सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए। कैमरों में जिला अस्पताल से बाइक सवार संदिग्ध सिपाही मासूम को ले जाता दिखाई दिया, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर मिलते ही पुलिस आरोपी तक पहुंच गई।
सीसीटीवी से बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर मिलने के बाद बुधवार दोपहर बाद आरोपी की पहचान हो गई। पुलिस ने उसी दौरान उसे हिरासत में भी ले लिया गया। हालांकि पहचान होने के बावजूद आरोपी करीब चार घंटे तक पुलिस को गुमराह करता रहा और जांच को भटकाने की कोशिश करता रहा। वारदात के बाद भी करता रहा ड्यूटी, किसी को नहीं हुई भनक सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी सामान्य तरीके से अपनी ड्यूटी करने गोरखनाथ थानाक्षेत्र में पहुंच गया। उसके हावभाव से किसी को जरा भी संदेह नहीं हुआ। बाद में तकनीकी साक्ष्यों और बाइक नंबर के आधार पर पुलिस उसके करीब पहुंच सकी। पुलिस अगर पहले सक्रिय होती तो बच जाती जान
पूरे घटनाक्रम ने पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मासूम के मामा का कहना है कि सूचना देने के बाद यदि पुलिस मंगलवार रात में ही सक्रिय होकर सर्च अभियान शुरू करती, इलाके की घेराबंदी करती और सीसीटीवी तुरंत खंगालती, तो आरोपी तक जल्दी पहुंचा जा सकता था। कोतवाली पुलिस की शुरुआती घंटों की सुस्ती ने उनकी मासूम भांजी की जिंदगी छीन ली। मायके में रहती है सिपाही की पत्नी सिपाही अभिषेक यादव की एक बेटी और बेटा है। जो मां के साथ ससुराल में रहते हैं। गाजिपुर में सिपाही का घर है, वहीं पर उसका ससुराल भी है। पत्नी को जब इस घटना की जानकारी मिली तो उसने सिर पकड़ लिया। पत्नी बोली उनकी आदतों की वजह से ससुराल छोड़कर बच्चों के साथ मायके में रहती हूं। भगवान से यही मनाती हूं कभी उनके साथ न रहना पड़े। बच्ची के साथ जो घटना हुई है, वह कभी माफ करने लायक नहीं है। उनकी भी बेटी है। कैसे चेहरा दिखाएंगे। अब जानिए पूरा घटनाक्रम डॉक्टर और नर्सों ने दोड़ाकर पीटा गोरखपुर में 35 साल के सिपाही अभिषेक यादव ने 10 साल की बच्ची से रेप करने के बाद हत्या की थी। गुरुवार शाम को आई बच्ची की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है। सिपाही ने जिला अस्पताल से ही बच्ची को किडनैप किया। फिर उसे बाइक से श्मशान घाट ले गया। वहां रेप करने के बाद बच्ची की गर्दन को पैर से दबाकर तोड़ दिया। इसके बाद शव नदी में फेंक दिया था। इससे पहले आरोपी सिपाही को जिला अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। दोपहर करीब ढाई बजे पुलिस सिपाही को मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल ले गई। उसे देखते ही अस्पताल के कर्मचारी भड़क गए और हमला कर दिया। पुलिसवालों ने बड़ी मुश्किल से सिपाही को छुड़ाया। दरअसल, 28 जुलाई को बच्ची अपनी बीमार बहन को खाना देने अस्पताल आई थी। घर लौटते समय सिपाही ने बाइक से उसका पीछा किया। फिर उसे बाइक पर बैठाकर 15 किलोमीटर दूर श्मशान घाट ले गया। अपने साथ ले गया। इधर, बच्ची नहीं लौटी, तो घरवालों ने गुमशुदगी दर्ज कराई। जांच के लिए पुलिस ने 10 टीमें लगाईं, 200 CCTV फुटेज खंगाले। इसमें बाइक की नंबर प्लेट से आरोपी सिपाही की पहचान हुई। पुलिस ने सिपाही को पकड़कर सख्ती से पूछताछ की, तो उसने जुर्म कबूल कर लिया। गुरुवार सुबह साढ़े 8 बजे आरोपी सिपाही की निशानदेही पर पुलिस ने बच्ची का शव बरामद किया। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया- सिपाही अभिषेक यादव गोरखपुर में डायल-112 में तैनात था। जनवरी, 2025 में उसने बंगाल की एक महिला से छेड़छाड़ की थी। तब भी उसे सस्पेंड किया गया था। जेल भी भेजा गया था। सितंबर, 2025 में उसकी बहाली हुई थी। अभिषेक 2018 बैच का सिपाही था। उसकी 7 साल की एक बेटी है। सिपाही को बर्खास्त कर दिया गया है। उस पर पॉक्सो एक्ट में FIR दर्ज की गई है। रासुका (एनएसए) भी लगाया जाएगा। 3 तस्वीरें देखिए- पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस शव सीधे अंतिम संस्कार के लिए ले गई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के प्राइवेट पार्ट में चोट मिली। गर्दन की हड्डी भी टूटी थी। हत्या के 36 घंटे बाद पुलिस को बच्ची की लाश मिली। पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस शाम 5 बजे बच्ची का शव एंबुलेंस से सीधे राजघाट लेकर पहुंची। पिता ने बच्ची का अंतिम संस्कार किया। परिवार ने 50 लाख रुपए, नौकरी और आरोपी को फांसी देने की मांग की है। अस्पताल में भर्ती बहन को खाना देने गई थी आजमगढ़ जिले के कप्तानगंज थाना इलाके के रहने वाले एक युवक ने बुधवार को पुलिस से शिकायत की थी। बताया था कि पिछले 4 साल से पत्नी और 5 बेटियों के साथ गोरखपुर में किराए पर रहते हैं। ई-रिक्शा चलाकर घर चलाते हैं। पत्नी प्रेग्नेंट है। 27 जुलाई को 13 साल की बेटी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द और बहुत तेज बुखार हो गया। मैं तुरंत उसे हॉस्पिटल लेकर पहुंचा। डॉक्टरों ने उसे एडमिट कर लिया। 28 जुलाई को मैं काम पर गया था। पत्नी की भी तबीयत ठीक नहीं थी। इसलिए रात 8:30 बजे मेरी 10 साल बेटी अपनी बीमार बड़ी बहन के लिए खाना लेकर अस्पताल गई थी। रात 10 बजे घर वह लौटने के लिए निकली। जब वह काफी देर तक घर नहीं आई, तो मैं हॉस्पिटल पहुंचा। इधर-उधर पूछताछ की। हर जगह ढूंढा, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। पिता बोले- बेटी ने बताया, सिपाही बच्ची के पीछे पड़ा था पिता ने बताया- अस्पताल में भर्ती बड़ी बेटी से पूछा तो उसने बताया कि जब हम दोनों बहनें बाहर बैठकर खाना खा रहे थे, तभी पुलिस वर्दी पहने एक व्यक्ति आया। उसने पूछा कि कहां रहती हो? हमने पता बताया, तो उसने कहा कि रात काफी हो गई है। अगर किसी को घर जाना हो, तो मैं छोड़ दूंगा। बड़ी बेटी ने उससे कहा कि छोटी बहन को घर जाना है। इसके बाद वह मेरी छोटी बेटी के पीछे पड़ गया। लेकिन, बेटी ने उसके साथ जाने से इनकार कर दिया। रात करीब 10 बजे जब छोटी बेटी अस्पताल से निकली, तो सिपाही भी उसके पीछे-पीछे निकल गया। CCTV में बच्ची को गाड़ी पर बैठाते दिखा था सिपाही पिता की शिकायत के बाद पुलिस एक्शन में आ गई। अस्पताल के CCTV खंगाले, तो लड़की की बात सच निकली। 39 सेकेंड की फुटेज में लड़की हॉस्पिटल से बाहर पैदल जाती दिखी। उसके पीछे वर्दी पहनकर सिपाही बाइक से आता दिखा। पास पहुंचकर रुक गया। कुछ देर बात की। फिर लड़की उसकी बाइक पर बैठ गई। सिपाही ने पुलिस को पूछताछ में बताया- 28 जुलाई को मैं अस्पताल में दवा लेने आया था। इसी दौरान बच्ची मिल गई। घर छोड़ने के बहाने उसे किडनैप कर लिया था। सिपाही की पत्नी और बेटी गाजीपुर में रहती है आरोपी सिपाही अभिषेक यादव मूल रूप से गाजीपुर के शादियाबाद थाना क्षेत्र के हंसराजपुर चौरा गांव का रहने वाला है। उसकी शादी दुल्लहपुर थाना क्षेत्र के मोलनापुर गांव में हुई थी। मेरिट के आधार पर 2016 में उसकी नियुक्ति हुई थी। 2018 से उसकी तैनाती गोरखपुर में थी। उसकी पत्नी बेटी के साथ गाजीपुर में ही रहती है। ————————-
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गोरखपुर में सिपाही ने श्मशान घाट में हैवानियत की:फटा पेट, टूटी हडि्डयां, हाथ बांधकर नदी में फेंकने से बच्ची की मौत, भाई का जन्म हुआ
