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चार जिलों में पड़ताल…:नियम- एक पैथोलॉजिस्ट, दो लैब; हकीकत- एक नाम पर 5 से 6 लैब, 250 किमी दूर से दे रहे रिपोर्ट




पैथोलॉजिस्ट स्वयं की लैब के अलावा एक अन्य या विजिटिंग के तौर पर वह सिर्फ जिले की दो लैब में ही सेवा दे सकते है। पर, इस नियम को तोड़कर एक पैथोलॉजिस्ट के नाम पर 5 से 6 लैब चल रही है। हद तो यह है ​कि दो लैब की दूरी भी 250 किमी से ज्यादा है, ऐसे में पैथोलॉजिस्ट डिजिटल साइन का फायदा उठाकर रिपोर्ट जारी कर रहे हैं। इस खुलासे के लिए भास्कर रिपोर्टर नीमच, मंदसौर, देवास और रतलाम जिले में एक ही समय पर जांच करवाने पहुंचे। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि जिस पैथोलॉजिस्ट के साइन पर नीमच में रिपोर्ट जारी हो रही है, उसी के नाम पर देवास में भी रिपोर्ट जारी हो रही है। जबकि मौके पर पैथोलॉजिस्ट मौजूद ही नहीं मिले। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि प्रदेशभर में यह पूरा खेल डिजिटल साइन की आड़ में चल रहा है और इन पर कार्रवाई तो दूर निगरानी तक नहीं हो रही है। जबकि, कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने 22 अक्टूबर 2024 को स्पष्ट किया था कि पैथोलॉजिस्ट नियमित रूप से लैब में मौजूद रहेगा, प्रत्येक जांच उसके प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में होगी और विजिटिंग पैथोलॉजिस्ट अधिकतम दो लैब में ही सेवाएं देगा। दूसरी, तरफ ऑनलाइन पोर्टल पर पैथोलॉजिस्ट के नाम व रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज होना चा​हिए, जो नहीं है। कागज में कम, हकीकत में ज्यादा लैब
सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार नीमच में 18, मंदसौर में 25 और रतलाम में 23 पंजीकृत लैब हैं, लेकिन पड़ताल में तीनों जिलों में इससे कहीं ज्यादा नियमों के विरुद्ध लैब और कलेक्शन सेंटर संचालित मिले। कई जगह कलेक्शन सेंटर भी खोल रखे है। इसी की आड़ में मरीजों से मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है। टेक्नीशियन के भरोसे इस तरह नियम तोड़कर चल रहा पैथोलॉजी लैब का कारोबार मनासा, देवास, मंदसौर की लैब में कराई जांच पैथोलॉजिस्ट – डॉ. सलोनी जैन (एमपी-30448)
क्या मिला – इनके नाम रिकॉर्ड में मनासा पैथोलॉजी लैबोरेटरी, विजिया लैब (मनासा), निष्कर्ष पैथोलॉजी लैब (देवास), श्रीनाथ पैथोलॉजी (हाटपिपल्या) और दशपुर डायग्नोस्टिक सेंटर (मंदसौर) हैं। हम मनासा की दो व देवास और मंदसौर की लैब पर पहुंचे और जांच कराई। तीनों जगह डॉ. जैन के डिजिटल हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट दी। रतलाम की दो-तीन लैब पर भी इनके साइन से रिपोर्ट जारी हो रही। ये मंदसौर मेडिकल कॉलेज में असि. प्रोफेसर भी है।
क्या बोलीं – विभाग कुछ नहीं करता। जानकारी अपडेट नहीं की। 251 किमी दूर दो जिलों में एक ही समय एक पैथोलॉजिस्ट
पैथोलॉजिस्ट – डॉ. मनीष पंत (एमपी-28818)
क्या मिला – इनके नाम पर अग्रवाल डायग्नोस्टिक सेंटर (नीमच), भंडारी डायग्नोस्टिक सेंटर (देवास) और देवास सिटी मेड्स पैथोलॉजी (देवास) दर्ज मिलीं। टीम ने तीनों लैब पर एक ही समय जांच कराई। नीमच और देवास सिटी मेड्स पैथोलॉजी से डॉ. पंत के नाम पर रिपोर्ट दी। दोनों जगहों के बीच करीब 251 किमी की दूरी है।
क्या बोलें – लैब पर संपर्क करने पर डॉ. युवराज ने कॉल किया। कहा- डॉ. पंत की तरफ से मैं ही बात करता हूं। नियम से काम कर रहे हैं। ऐसा हो सकता है।
एक जैसे रिकॉर्ड कई और के नाम पर भी
डॉ. देवांग शर्मा (एमपी-16855) के नाम पर रतलाम, खातेगांव और आगर मालवा की चार लैब, वहीं डॉ. नरेंद्र राज (एमपी-9247) के नाम पर देवास, मंदसौर और गरोठ की 6 लैब दर्ज हैं। यानी मामला किसी एक डॉक्टर या एक जिले तक सीमित नहीं है। भास्कर ने जिन चार पैथोलॉजिस्ट के रिकॉर्ड खंगाले, उनमें एक ही डॉक्टर के नाम पर कई लैब संचालित मिलीं। क्या बोलें- डॉ. नरेंद्र राज ने कहा मिलकर बात करों, फोन पर बात नहीं कर सकता। नियम : शर्त सहित अधिकतम दो लैब में ही दे सकते सेवा
एक पैथोलॉजिस्ट दो लैब में ही सेवा दे सकते हैं। एक तो खुद की लैब और इसके अलावा एक अन्य लैब हो सकती है। लेकिन शर्त यह है कि दोनों लैब में जांच उनके सीधे सुपरविजन में की गई हो। यदि स्वयं की लैब नहीं है तो भी एक पैथोलॉजिस्ट अधिकतम जिले की दो लैब में ही विजिटिंग सेवा दे सकता है। तकनीशियन अकेले लैब संचालित नहीं कर सकता। सभी पैथोलॉजिस्ट को अपनी उपस्थिति और सेवाओं की जानकारी सीएमएचओ कार्यालय में देना अनिवार्य है। ऐसे हो रहा फर्जीवाड़ा : ऑनलाइन पोर्टल पर नाम ही नहीं
ऑनलाइन पोर्टल पर कई लैब की जानकारी अधूरी है। कई जगह पैथोलॉजिस्ट का नाम ही दर्ज नहीं है, उसकी जगह केवल ऑनर या डायरेक्टर का नाम दर्ज कर वास्तविक जानकारी छिपाई गई। पोर्टल पर पैथोलॉजिस्ट के रजिस्ट्रेशन नंबर को अनिवार्य नहीं किया। इसी का लाभ उठाकर यह पूरा खेल चल रहा है। जिम्मेदार भी आरटीआई में जानकारी छिपाकर गड़बड़ी में सहयोग कर रहे हैं। हम इसकी जानकारी लेकर कार्रवाई करेंगे दो लैब में भी पैथोलॉजिस्ट तब सेवाएं दे सकते, जब वे पास में हो। अधिक दूरी वाले जिलों में यह संभव भी नहीं है। सीएमएचओ से जानकारी मंगवाकर इन पर कार्रवाई के लिए निर्देश दिए जाएंगे।
-डॉ. दीपक पिप्पल, क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं



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