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नई दिल्ली3 मिनट पहले
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जंतर-मंतर और संसद मार्च में घायल दिल्ली पुलिस के परिजन ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में घायल दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों के परिजन ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा- 20 तारीख के बाद यही नेरेटिव चलाया जा रहा है कि छात्रों को पुलिस ने पीटा, लेकिन प्रोटेस्ट का दूसरा हिस्सा कुछ ओर ही है। एक पुलिस जवान की बेटी गुंजन ने कहा, ‘मेरे पिता जब घर आते थे, तो कहते थे कि अब ये स्टूडेंट प्रोटेस्ट नहीं रहा, इसमें गलत लोग जुड़ गए हैं। 20 जुलाई को मेरे पिता के साथी उन्हें रात 10 बजे घर लेकर आए। उनके सिर पर 5 टांके थे। उनकी यूनिफॉर्म खून से लथपथ थी, फिर भी सोशल मीडिया पर उन्हें ही क्रिमिनल बताया गया।’ दूसरी तरफ, एक ASI की पत्नी सीमा ने कहा- भीड़ में शरारती तत्वों ने पत्थर-हथियारों से पुलिस पर हमला किया। मेरे पति का हेलमेट भी टूट गया था। बैरिकेडिंग तोड़कर पुलिस फोर्स पर हमला हुआ। गुंजन के पिता और सीमा के पति दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और संसद से पुलिसकर्मियों के अधिकारों पर सवाल उठाने की अपील की। प्रदर्शन और मार्च के दौरान 148 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए, कई गंभीर रूप से जख्मी हैं।
संसद मार्च हिंसा में पुलिसकर्मियों पर हमले की तस्वीरें…

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की तस्वीरें आईं थीं।

इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि कुछ प्रदर्शनकारी सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर रहे थे।

20 जुलाई को संसद मार्च में छात्रों ने पुलिस पर पथराव किया।
दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिजन ने क्या कहा…
1. गुंजन (दिल्ली पुलिस के SI की बेटी)- मेरे पिता मुख्य प्रदर्शन स्थल पर फ्रंटलाइन में तैनात थे। वे अक्सर कहते थे कि यह अब सिर्फ छात्रों का प्रदर्शन नहीं रहा, इसमें असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए हैं।
हिंसक भीड़ ने उन्हें घसीटा और जंतर-मंतर मंच के पास पीट-पीटकर मारने की कोशिश की। वे करीब चार घंटे तक RML अस्पताल में बेहोश रहे।
रात में जब साथी उन्हें घर लाए तो उनकी वर्दी खून से लथपथ थी और सिर पर टांके लगे थे।
सोशल मीडिया पर मेरे पिता को ही अपराधी बताया जा रहा था। जिन्होंने हमला किया, वही पुलिस को कटघरे में खड़ा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट गए, इसलिए हमें भी अपना पक्ष रखने कोर्ट जाना पड़ा।
2. सीमा (घायल ASI की पत्नी)- 20 जुलाई की शाम पति को फोन किया तो पता चला कि वे अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
भीड़ में मौजूद शरारती तत्वों ने पत्थरों और हथियारों से पुलिसकर्मियों पर हमला किया था।
रात 11 बजे जब वे घर लौटे तो उनका हेलमेट पूरी तरह टूटा हुआ था। यह देखकर मैं डर गई।
संसद से अपील है कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के अधिकारों तथा उन पर हुए हमलों पर भी चर्चा हो। सिर्फ यह नैरेटिव नहीं चलना चाहिए कि पुलिस ने छात्रों को पीटा।
3. लक्ष्य सिंह बिष्ट (घायल ASI के बेटे)- मेरे पिता ASI हैं और उन्हें बहादुरी के लिए चार सम्मान मिल चुके हैं। मेरे दादाजी भी BSF में थे और 1971 की जंग लड़ चुके हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन में पिता फ्रंटलाइन पर तैनात थे। उनके साथी से पता चला कि उनके सिर में गंभीर चोट लगी है।
जब उनकी तस्वीर देखी तो सिर मुंडा हुआ था और चार टांके लगे थे। मैं डर गया था।
पिता ने बताया कि प्रदर्शन में सिर्फ छात्र नहीं थे, बल्कि हिंसक और उपद्रवी लोग भी शामिल थे। वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षित निकालते समय उनके सिर पर पत्थर लगा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
पूरा मामला जानें…
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान 148 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इनमें कई को गंभीर चोटें आई थीं।


