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हर काम को ‘परफेक्ट’ बनाने की होड़ से बेचैनी:बेहतर की दौड़ लक्ष्य से भटका रही, लगातार प्रयास ही कामयाबी का राज




हर कोई ‘सबसे बेहतर’ काम करना चाहता और सबसे बेहतर बनने की चाह भी होती है। लेकिन हर काम को ‘परफेक्ट’ बनाने की यह चाहत कई लोगों में बेचैनी का कारण बन रही है। व्यक्तिगत विकास पर काम करने वाले न्यूजीलैंड के लेखक सैम मटला ने इसके उल्टे प्रभावों से आगाह किया है। डॉ. मटला बताते हैं कि आजकल लोग हर काम को अपने अनुकूल बनाने के पीछे भागते हैं। नतीजा यह होता है कि वे वास्तविक लक्ष्य से भटक जाते हैं और यह भूल जाते हैं कि सफलता ‘परफेक्शन’ की चाहत से नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य और लगातार प्रयास से हासिल होती है। मटला इसे ल्यूक नाम के एक व्यक्ति के उदाहरण से समझाते हैं। फ्रीलांस वेब डिजाइनर ल्यूक घर से काम करता है। कमाई ठीकठाक है। फिर भी उसे लगता है कि जिंदगी में उद्देश्य नहीं है। कोई प्रेरणा नहीं है। हल्की बेचैनी बनी रहती है। डॉ. मटला बताते हैं कि ल्यूक की परेशानी यह है कि इस बेचैनी से छुटकारा पाने के लिए वह हर नए ट्रेंड को अपनाने लगता है। नींद मापने वाली अंगूठी पहनता, अंधेरा करने वाले काले रंग के पर्दे लगाता, पोषक आहार के साथ ही अन्य उपाय आजमाने में फंस जाता है। उसे लगता है कि बस एक सही रूटीन मिल जाए तो सब ठीक हो जाएगा। शुरुआत में कुछ फायदा होता है। पर असली समस्या बनी रहती है। समय, ऊर्जा, ध्यान सब ‘तैयारी’ में खर्च हो जाता है और रुटीन टूटने पर परेशान होता है। पहले नींव मजबूत करें विशेषज्ञों के अनुसार, ‘परफेक्शन’ यानी पूर्णता पिरामिड के सबसे ऊपरी हिस्से पर आता है। अगर आपकी नींव ही कमजोर है, तो महंगे गैजेट्स या कठिन रुटीन काम नहीं आएंगे। डॉ. मटला बताते हैं कि जीवन को कामयाब बनाने के लिए सबसे पहले यह तय करें कि आप किस तरह का इंसान बनना चाहते हैं? इसके लिए लक्ष्य स्पष्ट करें। यानी यह तय करें कि अगले 6 से 12 महीने में क्या हासिल करना है? नींद, पोषण, व्यायाम और फोकस करने को आदत बनाएं। इसके साथ ही लगातार 30 से 60 मिनट तक गंभीरता से काम करने की आदत बनाएं। इसके बाद ही पूर्णता के बारे में सोचें। सफलता के लिए ‘पूर्णता’ से ज्यादा जरूरी है आपका जुनून अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, जो लोग 5 से अधिक जटिल सुबह-शाम के रुटीन का पालन करते हैं, उनमें ‘थकान’ का खतरा 40% तक बढ़ जाता है। पैरेटो सिद्धांत के मुताबिक, हमारी सफलता का 80% हिस्सा सिर्फ 20% बुनियादी आदतों, जैसे- पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और स्पष्ट लक्ष्य से आता है। बाकी 80% बारीक ‘परफेक्शन’ सिर्फ 20% का फर्क डालते हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा परफेक्शन की चाह से दिमाग में ‘कोर्टिसोल’ हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जिससे तनाव, थकान और बर्नआउट का खतरा बढ़ता है। याद रखें- सफलता के लिए पूर्णता से ज्यादा जरूरी व्यक्ति का जुनून है।



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