अल-फलाह यूनिवर्सिटी को अभिभावकों ने लिखा पत्र
दिल्ली लाल किला ब्लास्ट के बाद चर्चा में आई फरीदाबाद की अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर के एक एमबीबीएस छात्र के अभिभावक ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से विश्व स्तर पर मान्यता से जुड़ी प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है। उन्होंने इस संबं
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ईसीएफएमजी स्पॉन्सर नोट से जुड़ी प्रक्रिया
दिल्ली के द्वारका निवासी जसवीर सिंह देसवाल, जो वर्ष 2023 बैच के एक एमबीबीएस छात्र के पिता हैं, ने अपने पत्र में कहा है कि यूनिवर्सिटी को वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मेडिकल स्कूल्स (WDOMS) में ईसीएफएमजी स्पॉन्सर नोट (ECFMG Sponsor Note) से जुड़ी प्रक्रिया जल्द पूरी करनी चाहिए।

अभिभावकों का कहना है कि इसके बगैर बच्चों को विदेशों के अवसर नही मिल पाएंगे
क्या है ईसीएफएमजी स्पॉन्सर नोट
ईसीएफएमजी स्पॉन्सर नोट एक आधिकारिक मान्यता संबंधी टिप्पणी (मान्यता नोट) होती है, जो विश्व चिकित्सा महाविद्यालय निर्देशिका (वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मेडिकल स्कूल्स–WDOMS) में किसी मेडिकल कॉलेज की प्रोफाइल पर दर्ज की जाती है। यह दर्शाती है कि उस मेडिकल कॉलेज से स्नातक होने वाले विद्यार्थी एजुकेशनल कमीशन फॉर फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (ECFMG) द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों के अनुसार प्रमाणन (ECFMG Certification) के लिए आवेदन करने के योग्य हो सकते हैं
मेडिकल कॉलेजों स्पॉन्सर नोट उपलब्ध नहीं
उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कई भारतीय मेडिकल कॉलेजों के छात्रों को विदेश में मेडिकल लाइसेंस की परीक्षाएं, जैसे यूएसएमएलई (USMLE) और पीएलएबी (PLAB), देने में परेशानी हो रही है। इसकी वजह संबंधित मेडिकल कॉलेजों के नाम के साथ ईसीएफएमजी स्पॉन्सर नोट का उपलब्ध नहीं होना बताया गया है।
पत्र में कहा गया है कि इस प्रक्रिया को कोई छात्र स्वयं पूरा नहीं कर सकता। इसके लिए मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और संबंधित नियामक संस्थाओं को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

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अभिभावक ने प्रशासन से रखीं ये प्रमुख मांगें
यूनिवर्सिटी की वर्तमान स्थिति की जांच की जाए कि WDOMS में स्पॉन्सर नोट उपलब्ध है या नहीं। यदि प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है तो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और ECFMG/WDOMS के साथ आवश्यक कार्रवाई तुरंत शुरू की जाए। सभी जरूरी दस्तावेज जल्द जमा कराए जाएं ताकि वर्तमान और भविष्य के छात्रों को विदेश में लाइसेंस परीक्षा देने में परेशानी न हो। छात्रों और पूर्व छात्रों को समय-समय पर प्रक्रिया की जानकारी और संभावित समय सीमा बताई जाए। इस विषय में छात्रों की सहायता के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए।
प्रक्रिया पूरी होने से छात्रों के हित सुरक्षित
जसवीर सिंह देसवाल ने कहा कि समय रहते यह प्रक्रिया पूरी होने से छात्रों के विदेश में उच्च शिक्षा, रेजिडेंसी, फेलोशिप और मेडिकल लाइसेंस प्राप्त करने के अवसर सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से इस मामले में जल्द कार्रवाई कर छात्रों को स्थिति से अवगत कराने की भी अपील की है।
