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“अक्षय को हम लोग रोहित और भूरा के नाम से जानते हैं। 2016 में ही उसकी नौकरी लग गई थी। करीब तीन साल बाद उसने घर बनाया और उसी साल उसकी शादी भी हुई थी। जब अक्षय की पहली बार नौकरी लगी थी, तब गड़बड़ी के आरोप में उसे बिहार पुलिस से सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि बाद में दोबारा नौकरी मिलने पर वह STFमें चला गया। इस दौरान उसने गांव के कुछ लोगों से दरोगा की नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे भी लिए थे।” ये बातें अरवल जिले के वंशी सूरजपुर निवासी अक्षय कुमार के पड़ोसियों ने बताईं। उनका कहना है- अक्षय को शुरू से ही रईस बनने का शौक था। बिहार पुलिस में नौकरी मिलने के बाद वह जल्द से जल्द अधिक पैसे कमाना चाहता था। इसी वजह से वह लोगों से पैसे लेकर पुलिस में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। इसकी जानकारी पुलिस को मिलने पर उसे निलंबित कर दिया गया था। भोजपुर के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार एसटीएफ के जवान अक्षय कुमार को पुलिस ने गुरुवार देर रात गिरफ्तार किया था। अक्षय के बारे में गांव के लोगों ने और क्या-क्या बताया? पड़ोसियों और ग्रामीणों से उसका व्यवहार कैसा था? उसके परिवार में कौन-कौन हैं और वे कहां रहते हैं? पढ़िए एक्सक्लूसिव रिपोर्ट। पिता और बड़े भाई हजारीबाग में रहते हैं, मां का हो चुका है निधन पड़ोसियों ने बताया कि अक्षय के पिता और बड़े भाई हजारीबाग जिले के रामगढ़ में रहते हैं। पिता राम प्रवेश सिंह रामगढ़ में एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। जबकि उसकी मां का निधन हो चुका है। गांव के लोगों ने बताया, “अक्षय के बड़े भाई ने शादी नहीं की है, जबकि अक्षय की पत्नी और बच्चे पटना में ही रहते हैं। 2023 में अक्षय की मां एक हादसे की शिकार हो गई थी। आखिरी बार अक्षय तभी घर आया था। उसके घर पर ताला ही लगा रहता है। कभी-कभी उसके पिता और बड़े भाई गांव आते हैं।” गांव के लोग बोले- 2016 में अक्षय की बिहार पुलिस में नौकरी हुई थी वंशी गांव के रहने वाले पेशे से पुजारी और अक्षय के पड़ोसी एन.के. मिश्रा ने बताया, “भरत तिवारी एनकाउंटर केस में अक्षय की गिरफ्तारी की खबर मिली है। अक्षय का पूरा परिवार मेरा यजमान है। अक्षय की शादी, उसके घर का गृहप्रवेश, अक्षय की मां का श्राद्धकर्म मैंने ही कराया है।” उन्होंने बताया कि जब अक्षय की बिहार पुलिस ने साल 2016 में नौकरी हुई तो वो घर से बाहर चला गया था। इसके बाद कभी-कभी गांव आता था। तीन साल बाद यानी साल 2019 में उसने मकान बनवाया। इसी साल अक्षय की शादी भी हुई। इसके बाद से वो अक्सर बाहर ही रहने लगा। पंडित एनके मिश्रा ने बताया, “2023 में अक्षय की मां छत से गिर गई थी। हादसे में उनकी मौत हो गई थी। तब श्राद्धकर्म के लिए अक्षय गांव आया था। चूंकि छोटे बेटे को मां को मुखाग्नि देनी होती है, उसने श्राद्धकर्म को विधि-विधान से पूरा किया। चाहे शादी की बात हो, गृहप्रवेश की बात हो, श्राद्धकर्म का मामला हो, हर बार अक्षय ने मन से दक्षिणा भी दी। वो सीधा-साधा था, हां गांव में एक दो लोगों से पुलिस में भर्ती के लिए उसने रूपए जरूर लिए थे। हालांकि, इस बारे में मैं ज्यादा नहीं जानता हूं।” अक्षय के परिवार का पड़ोसियों संग विवाद होता रहता है अक्षय के पड़ोसी और रिश्ते में चाचा अरुण सिंह चंद्रवंशी ने बताया कि गांव में बना मकान भी अक्षय ने ही बनवाया था। उन्होंने बताया कि मेरी भाभी यानी अक्षय की मां की मौत हुई थी, तब पूरा परिवार गांव आया था। उन्होंने बताया कि अक्षय के परिवार का हम लोगों से और पड़ोसियों से जमीन को लेकर झगड़ा भी चलता रहता है। कुछ मामले अभी तक फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया, “हम लोग चार भाई हैं, जिनमें से एक अक्षय के पिता राम प्रवेश सिंह हैं। पिताजी की जमीन को लेकर ही अक्षय के पिता हम लोगों से झगड़ा करना चाहते हैं, वे गांव में नहीं रहना चाहते हैं, इसलिए वे अधिकतर हजारीबाग के रामगढ़ में ही रहते हैं।”
कैमरे पर बात नहीं कर सकते… गांव के लोगों से नौकरी के नाम पर रुपए लेता था अक्षय के बारे में पंडित एनके मिश्रा ने रुपए लेने की बात कही थी। उस बारे में जब गांव के लोगों से बात करने की कोशिश की गई, तो अधिकतर लोगों ने कैमरे पर बात करने से इनकार कर दिया। नाम न बताने की शर्त पर गांव के लोगों ने बताया कि अक्षय ने बिहार पुलिस में रहकर गड़बड़ी करता था। नौकरी लगवाने के नाम पर गांव के कुछ लोगों से रुपए भी लिए थे। पुलिस ने जब उसकी गड़बड़ी को पकड़ा था, तब उसे सस्पेंड कर दिया था। हालांकि, दोबारा अक्षय पुलिस में बहाल हो गया था। उसे दोबारा नौकरी कैसे मिली, इसकी जानकारी हम लोगों को नहीं है। वहीं, एक शख्स ने बताया कि गांव के ही रहने वाले एक युवक से नौकरी दिलाने के नाम पर अक्षय ने रुपए लिए थे, लेकिन जब अक्षय उस शख्स को नौकरी नहीं दिला पाया तो रुपए को लेकर काफी विवाद हुआ था। युवक ने जब अक्षय से रुपए मांगे तो उसने पहले साफ इनकार कर दिया और अपने पुलिस में होने का रौब दिखाने लगा। हालांकि, बाद में उसने अपने नाम पर खरीदी गई एक जमीन का टुकड़ा बेचकर युवक को रुपए लौटाए थे। अक्षय के गांव में कम दोस्त, अब गिरफ्तारी से हैरान लोग अक्षय के हमउम्र युवकों का कहना है कि गांव में उसके बहुत अधिक दोस्त नहीं थे। हालांकि नौकरी मिलने से पहले वह गांव में ही रहता था और पूजा-पाठ, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा अन्य सामाजिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। युवकों ने बताया कि उन्हें टीवी और सोशल मीडिया पर खबर देखने के बाद ही पता चला कि उनके गांव का रहने वाला अक्षय भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में चर्चा में है और इस मामले में उसकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है। जब गिरफ्तारी की खबर मिली, तब लगा था कि अब यहां मीडिया आएगी वंशी गांव के लोगों ने कहा कि भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जब अक्षय की गिरफ्तारी की सूचना मिली, उसके बाद से ही हम लोग चर्चा करने लगे थे कि अब गांव में मीडिया का जमावड़ा लगेगा और आज आपलोग आ ही गए। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में सबसे पहले दैनिक भास्कर की टीम ही पहुंची। लोगों ने कहा, “पहले जब कहीं बाहर जाते थे और अगर कोई हम लोगों के गांव का लोकेशन पूछता था तो हम लोग कहते थे कि हम लोगों के गांव का नाम वंशी है। तब लोग नहीं समझते थे कि गांव कहां है। फिर हम लोग बताते थे कि हम लोगों का वंशी गांव सेनारी गांव के पास है, जहां नरसंहार हुआ था। बदनामी ही सही, लेकिन अब लोग हमारे गांव को अक्षय के नाम से जानेंगे, जिसने भारत तिवारी का एनकाउंटर किया था।” बता दें कि 18 मार्च 1999 को सेनारी गांव में नरसंहार हुआ था। जहां प्रतिबंधित नक्सली संगठन माओवादि कम्युनिस्ट सेंटर के उग्रवादियों में 34 स्वर्ण जाति के ग्रामीणों की हत्या कर दिया था। भरत तिवारी के एनकाउंटर से जुड़ी तीन तस्वीरें….
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'STF में जाते ही घूस लेकर दरोगा बनाने लगा अक्षय':पड़ोसी बोले-रईस बनने का शौक था, घूसखोरी में सस्पेंड; भरत तिवारी को गोली मारने की कहानी
