पंचकूला में पूर्व इंस्पेक्टर तरसेम समेत 4 बरी:नकली IPS, फर्जी वर्दी और ठगी के आरोप; मुख्य गवाहों ने बदले बयान




पंचकूला में पुलिस की नौकरी दिलाने और जमीन संबंधी विवाद सुलझाने के नाम पर लोगों से ठगी करने के करीब 14 साल पुराने मामले में पंचकूला की कोर्ट ने चार आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के अहम गवाहों के अपने बयानों से मुकरने के कारण आरोप साबित नहीं हो सके। बरी होने वालों में पूर्व चंडीगढ़ पुलिस इंस्पेक्टर तरसेम सिंह राणा के अलावा नरेश कुमार, रविंदर कुमार और स्वर्ण सिंह शामिल हैं। मामला वर्ष 2012 में चंडीगढ़ पुलिस थाने में दर्ज FIR से जुड़ा था। इसमें ठगी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और प्रतिरूपण सहित IPC की विभिन्न धाराओं तथा आर्म्स एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM), पंचकूला ने 23 जनवरी 2018 के फैसले के खिलाफ आरोपियों की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दी। IPS बनकर घूम रहा था मुख्य आरोपी अभियोजन के अनुसार, पंचकूला CIA की टीम को सूचना मिली थी कि अमन कुमार खुद को IPS अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर रहा है। रामगढ़ चौक पर पुलिस ने उसे पकड़ा तो वह कथित तौर पर IPS अधिकारी की वर्दी में था और उसके पास रिवॉल्वर थी। पुलिस के मुताबिक, स्वर्ण सिंह वाहन चला रहा था, जबकि रविंदर कुमार पुलिस की वर्दी में नकली AK-47 लेकर गार्ड के रूप में बैठा था। नरेश कुमार पीछे बैठा था। पुलिस ने मौके से रिवॉल्वर, कारतूस, नकली पिस्टल, कारतूसों के खोखे, फर्जी पहचान पत्र, पुलिस की वर्दियां, लाल बीकन और झंडा बरामद करने का दावा किया था। झांसा देकर लाखों लेने का आरोप पुलिस का आरोप था कि अमन कुमार ने पुलिस में नौकरी लगवाने और जमीन संबंधी विवाद सुलझाने का झांसा देकर लोगों से बड़ी रकम ऐंठी। शिकायतकर्ताओं में शामिल मनीष और अवतार से क्रमशः 4 लाख और 1.60 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया गया था। ट्रायल कोर्ट ने पहले नरेश कुमार, रविंदर कुमार और स्वर्ण सिंह को IPC की धारा 419, 420 और 120-B के तहत दोषी ठहराया था। तरसेम सिंह राणा को IPC की धारा 119, 420 और 120-B के तहत दोषी करार दिया गया था। कोर्ट बोलीं- गवाह ही मुकर गए अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि अभियोजन की कहानी को मजबूत करने वाले मुख्य गवाह ही अपने बयानों से मुकर गए। शिकायतकर्ता अवतार ने जिरह के दौरान यह तक स्वीकार किया कि किसी भी आरोपी ने उससे धोखाधड़ी नहीं की और न ही उससे कोई रकम ली। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि रविंदर कुमार, नरेश कुमार और स्वर्ण सिंह ने मुख्य आरोपी अमन कुमार के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची थी या प्रतिरूपण के जरिए लोगों को ठगा था। साजिश से जोड़ने वाला सबूत भी स्पष्ट नहीं कोर्ट ने यह भी माना कि अभियोजन पक्ष पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर तरसेम सिंह राणा को कथित आपराधिक साजिश से जोड़ने के लिए स्पष्ट और ठोस साक्ष्य पेश करने में विफल रहा। गवाहों के मुकरने और आरोपों की पुष्टि करने वाला पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के चलते कोर्ट ने चारों आरोपियों को बरी कर दिया।



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